पाकिस्तान में चौतरफा उपजे प्रशासनिक संकट, आर्थिक बदहाली और सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने वहां के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश में जारी वित्तीय तंगी और आवश्यक वस्तुओं की कमी के बीच अब राजधानी इस्लामाबाद में राजनीतिक गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और थल सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर के समक्ष एक तरफ जहां आंतरिक विद्रोह को संभालने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख सहयोगी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने सरकार के पतन की सार्वजनिक चेतावनी जारी कर दी है। इसी बीच, सीमा पार सक्रिय भारत विरोधी प्रतिबंधित संगठनों के भीतर भी भारी घबराहट देखी जा रही है, क्योंकि कई कुख्यात आतंकी सरगना अज्ञात हमलावरों का शिकार बन चुके हैं।
रहस्यमयी हमलावरों के खौफ से आतंकियों में हड़कंप और लश्कर कमांडर की स्वीकारोक्ति
पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से शरण ले रहे आतंकवादी ढांचों पर अज्ञात हमलावरों की गोलियों का कहर टूटा है। आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख और पाक अधिकृत कश्मीर नेटवर्क के प्रभारी रिजवान हनीफ का एक नया वीडियो सामने आया है। इस वीडियो संदेश में रिजवान हनीफ ने बेहद डरी हुई आवाज में यह स्वीकार किया है कि पिछले कुछ महीनों के भीतर पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में उनके 30 से अधिक प्रमुख कमांडरों को अज्ञात हमलावरों ने मौत के घाट उतार दिया है। रिजवान हनीफ, जो नए आतंकियों की भर्ती, ट्रेनिंग तथा पीएएफएफ जैसे छद्म संगठनों के संचालन का जिम्मा संभालता है, के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पेशावर, रावलपिंडी, कराची और मुजफ्फराबाद में छिपे आतंकी अब सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। इस सिलसिलेवार कार्रवाई के बाद से हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे कुख्यात आका पूरी तरह से भूमिगत हो गए हैं।
पाकिस्तानी सरजमीं पर ढह गया आतंकी तंत्र: मारे गए 10 प्रमुख सरगना
हालांकि पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि उसकी सीमा के भीतर हो रही इन घटनाओं के पीछे विदेशी सुरक्षा एजेंसियां शामिल हैं, लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि किसी अन्य देश की सीमा में जाकर लक्षित हत्याएं करना भारत सरकार की आधिकारिक नीति का हिस्सा नहीं है। इसके बावजूद पाकिस्तान में छिपकर भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले कई बड़े नेटवर्क पूरी तरह तबाह हो चुके हैं।
मई 2026 में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष आतंकी हमजा बुरहान को पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में गोली मार दी गई। हमजा बुरहान को 2019 के पुलवामा आतंकी हमले का प्रमुख हैंडलर माना जाता था और वह हाफिज सईद का करीबी सहयोगी था। इसके बाद मई 2025 में सिंध प्रांत के बदनी इलाके में लश्कर के प्रमुख रणनीतिकार अबू सैफुल्लाह खालिद को ढेर कर दिया गया, जो भारत में कई बड़े हमलों को अंजाम देने का मास्टरमाइंड था। मार्च 2025 में झेलम शहर में भारत द्वारा मोस्ट वांटेड घोषित किए गए लश्कर आतंकी अबू कताल की हत्या कर दी गई।
इससे पहले भी कई बड़े आतंकी निशाने पर रहे हैं। नवंबर 2023 में जम्मू-कश्मीर में 2018 के आतंकी हमले के मास्टरमाइंड ख्वाजा शाहिद का सिर कटा शव पाक अधिकृत कश्मीर की नीलम वैली में नियंत्रण रेखा के पास पाया गया था। अक्टूबर 2023 में उत्तरी वज़ीरिस्तान के इलाके में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के खास रणनीतिकार दाऊद मलिक को अज्ञात बंदूकधारियों ने मार गिराया। उसी महीने, यानी अक्टूबर 2023 में, सियालकोट के भीतर 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले के मुख्य साजिशकर्ता शाहिद लतीफ को गोलियों से भून दिया गया था।
सितंबर 2023 में जम्मू के डांगरी हमले के मुख्य साजिशकर्ता और लश्कर के शीर्ष हैंडलर रियाज अहमद की पाक अधिकृत कश्मीर के रावलाकोट में हत्या कर दी गई। मई 2023 में लाहौर के भीतर खालिस्तान कमांडो फोर्स के प्रमुख और भारत में वांटेड आतंकी परमजीत सिंह पंजवड़ को अज्ञात हमलावरों ने मौत के घाट उतारा। फरवरी 2023 में रावलपिंडी के बीचोंबीच हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख घुसपैठ नेटवर्क संचालक बशीर अहमद पीर को ढेर किया गया। इससे पहले मार्च 2022 में कराची शहर में 1999 के इंडियन एयरलाइंस विमान आईसी-814 के अपहरण कांड में शामिल जैश आतंकवादी जहूर मिस्त्री को भी गोलियों से उड़ा दिया गया था।
पाक अधिकृत कश्मीर में जनआक्रोश, हिंसा और अल जजीरा का डिजिटल ब्लॉक
सुरक्षा संकट के साथ-साथ पाक अधिकृत कश्मीर में नागरिक अशांति और चुनावी विवाद ने हालात को और गंभीर बना दिया है। हाल ही में सेना की सीधी निगरानी में आयोजित असेंबली चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली और सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित ज्यादतियों की खबरें सामने आई थीं। चुनावी झड़पों और सैन्य कार्रवाई के दौरान 50 से अधिक नागरिकों की जान जाने की खबर के बाद पूरे इलाके में जनता सड़कों पर उतर आई है। जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया घराने अल जजीरा ने इस चुनावी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की जमीनी रिपोर्ट प्रसारित की, तो असीम मुनीर के प्रशासन ने प्रतिक्रियास्वरूप पूरे देश में अल जजीरा के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया।
गठबंधन सरकार में दरार: बिलावल भुट्टो का अल्टीमेटम और प्रशासनिक विफलता
राजनीतिक मोर्चे पर, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की नीतियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। चुनावी अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलता का हवाला देते हुए बिलावल भुट्टो ने सार्वजनिक मंचों से ऐलान किया है कि मौजूदा सरकार का कार्यकाल अब समाप्ति की ओर है। चूंकि शहबाज शरीफ की सरकार पीपीपी की बैसाखियों के सहारे चल रही है, इसलिए बिलावल के इस बयान को सत्ता परिवर्तन और संभावित तख्तापलट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच, सरकार के भीतर की खींचतान तब और उजागर हो गई जब गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने अपनी ही सरकार के प्रशासनिक तंत्र की कड़ी आलोचना की। जनरल असीम मुनीर के करीबी माने जाने वाले मोहसिन नकवी ने सार्वजनिक तौर पर यह बयान दे दिया कि मुल्क की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और देश में 21 साल का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। इन तमाम घटनाक्रमों ने पाकिस्तान के राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य को बेहद नाजुक मोड़ पर ला खड़ा किया है।



















