विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच निर्वाचन आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों ने बड़े पैमाने पर मोर्चा खोल दिया है। इस सियासी घमासान और विरोध प्रदर्शनों के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का एक अहम बयान सामने आया है। उन्होंने निर्वाचन आयोग को यह सुझाव दिया है कि अगर संस्थान पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो आयोग को आगे आकर अपना पक्ष बेहद मजबूती से पेश करना चाहिए, ताकि देश की जनता के मन में लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर कोई भ्रम न रहे।
चिराग पासवान ने निर्वाचन आयोग को क्या संदेश दिया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की उठाई जा रही मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब निर्वाचन आयोग जैसी संस्था की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया जा रहा हो, तो यह उस आयोग की अपनी जिम्मेदारी बन जाती है कि वह सार्वजनिक तौर पर अपने तर्कों और स्थिति को पूरी मजबूती के साथ रखे।
चिराग पासवान के अनुसार पूरी चुनावी प्रक्रिया के ऊपर आम जनता का भरोसा कायम रहना सबसे अहम तत्व है। यदि देश के नागरिकों के मन में मतदान और चयन प्रक्रिया को लेकर जरा भी संदेह पैदा होता है, तो यह लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। लिहाजा, जनता के मन में उठ रहे तमाम सवालों का निवारण करने और किसी भी भ्रम को दूर करने के लिए चुनाव आयोग को खुद आगे आकर अपना पक्ष पूरी ताकत से सामने रखना चाहिए।
विपक्ष का देशव्यापी प्रदर्शन और कलेक्ट्रेट मार्च की तैयारी
दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी संगठनों ने सड़कों पर उतरने की घोषणा कर दी है। दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि विभिन्न राज्यों में राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालयों का घेराव किया जा रहा है। दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्र संगठन आइसा (AISA) विरोध दर्ज करा रहा है, वहीं बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का आह्वान किया है।
कांग्रेस की योजना आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और व्यापक बनाने की है। पार्टी ने अपनी सभी जिला कमेटियों को 28 तारीख से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने के निर्देश जारी किए हैं। पार्टी का इरादा इस मुद्दे को सीधे जमीनी स्तर तक ले जाने का है, जिससे निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर देशव्यापी बहस छेड़ी जा सके।
आयोग के भीतर मतभेद के दावे और आधिकारिक स्पष्टीकरण
इस ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब यह बात सामने आई कि निर्वाचन आयोग के भीतर सब कुछ सुचारू नहीं चल रहा है। चर्चाओं में दावा किया गया कि SIR से जुड़े मसलों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयोग के बाकी दो चुनाव आयुक्तों के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं। इस जानकारी के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने इसे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का संकट बताते हुए हमला तेज कर दिया।
हालांकि इन आरोपों के जवाब में निर्वाचन आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि किसी भी लोकतांत्रिक अथवा निर्णय लेने वाले संस्थान के आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग मत और राय सामने आना एक पूरी तरह स्वाभाविक और सामान्य प्रक्रिया है। इसके साथ ही आयोग ने यह भी साफ किया कि पिछले एक वर्ष के दौरान लिए गए उसके सभी आदेश और निर्णय आयोग की सर्वसम्मति का ही परिणाम हैं, इसलिए आंतरिक टकराव के दावे आधारहीन हैं।
संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की दिशा में कांग्रेस की रणनीति
इस पूरे मामले को केवल सड़कों तक सीमित न रखते हुए कांग्रेस अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विधायी कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस पेश करने की योजना बना रही है। इस कदम के लिए कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों से भी तालमेल साधना शुरू कर दिया है।
तैयारियों से जुड़े घटनाक्रम के अनुसार इस महाभियोग प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और इसे अगले दो हफ्तों के भीतर पेश किए जाने की संभावना है। विधायी नियमों के तहत ऐसे प्रस्ताव का नोटिस देने के लिए संसद सत्र की कार्यवाही का उस वक्त जारी रहना आवश्यक नहीं होता है, जिसके चलते कांग्रेस जल्द ही दोनों सदनों के सचिवालय को औपचारिक नोटिस सौंपने की रूपरेखा पर काम कर रही है।



















