अमेरिकी सियासत में सोशल मीडिया, एल्गोरिदम और इंटरनेट हस्तियों की दखलअंदाजी अब पारंपरिक संवाद के तौर-तरीकों को तेजी से पीछे छोड़ रही है। हाल ही में दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी कामयाबी के बाद मियामी में आयोजित एक सार्वजनिक मंच पर डिजिटल राजनीति के भविष्य को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। इस परिचर्चा में इलिनॉय हाउस सीट से डेमोक्रेट के रूप में चुनाव लड़ चुकीं पूर्व मीडिया मैटर्स रिपोर्टर कैट अबूघजालेह और रिपब्लिकन रणनीतिकार सीजे पियर्सन ने शिरकत की। दोनों के बीच इस बात पर गंभीर चर्चा हुई कि कैसे नई पीढ़ी की राजनीतिक सोच को एल्गोरिदम पूरी तरह से अलग-अलग ध्रुवों में बांट रहे हैं।
व्हाइट हाउस में डिजिटल क्रिएटर्स की बढ़ती भागीदारी
ट्रंप प्रशासन इंटरनेट पर सक्रिय दक्षिणपंथी सामग्री निर्माताओं को सीधे सत्ता के गलियारों तक लाने में काफी आक्रामक रहा है। पूर्व प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पिछले साल पारंपरिक प्रेस ब्रीफिंग के दरवाजे स्वतंत्र डिजिटल रचनाकारों के लिए खोल दिए थे। इसके अलावा उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान केवल इन्फ्लुएंसर्स के लिए अलग से विशेष ब्रीफिंग भी आयोजित की थीं। लीविट के इस कदम पर काफी सवाल उठे थे, क्योंकि मुख्यधारा के पारंपरिक पत्रकारों की मौजूदगी सीमित की जा रही थी और डिजिटल रचनाकारों से आसान सवाल पूछे जाने की बात कही जा रही थी। आरएनसी की यूथ एडवाइजरी काउंसिल से जुड़े रहे सीजे पियर्सन ने इस पूरी प्रक्रिया में सीधी भूमिका निभाई है। पियर्सन का कहना है कि अब कई अन्य संघीय एजेंसियां भी इसी रणनीति को दोहरा रही हैं, जो आज के समय में लोगों का ध्यान खींचने के लिए बेहद स्वाभाविक प्रक्रिया बन चुकी है।
प्रशासन की ऑनलाइन रणनीति और विवादित फैसले
डिजिटल दर्शकों को आकर्षित करने की इस रणनीति पर पियर्सन ने स्पष्ट किया कि आज का प्रशासन लगातार इंटरनेट पर सक्रिय रहने वाला तंत्र है। जब लोगों का ध्यान लगाने का समय बहुत घट चुका है, तो संदेश को रोचक बनाना मजबूरी बन जाता है। हालांकि दक्षिणपंथी खेमे में भी हर फैसले का समर्थन नहीं हुआ। पियर्सन ने खुद माना कि पिछले साल एपस्टीन से जुड़ी फाइलों के कुछ अंश 15 दक्षिणपंथी रचनाकारों को बांटने का प्रशासन का फैसला एक बड़ी चूक थी।
दूसरी ओर, कैट अबूघजालेह इस रुख को संवाद के लिए बेहद खतरनाक मानती हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग द्वारा हैरी पॉटर के संदर्भ से जुड़ी मल्फॉइड मीम के प्रचार का उदाहरण दिया, जिसे उनके अनुसार ऑनलाइन इनसेल समुदाय को लुभाने के लिए इस्तेमाल किया गया। अबूघजालेह ने यह भी रेखांकित किया कि आईसीई की कार्रवाइयों के विज्ञापनों में जिस तरह की हिंसा और क्रूरता को सामग्री बनाकर पेश किया गया, वह जनता को सूचना देने के बजाय लोगों का ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश है।
वैचारिक टकराव और साझा चिंता का बिंदु
इस परिचर्चा के दौरान दोनों वक्ताओं के बीच कई मुद्दों पर तीखे मतभेद भी उभरे। आईसीई हिरासत केंद्रों को एकाग्रता शिविर कहे जाने पर लंबी तकरार हुई। अबूघजालेह, जिन्हें पिछले साल एक आईसीई केंद्र के बाहर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था और बाद में ग्रैंड जूरी के समक्ष अभियोजकों की अनियमितता की शिकायतों के कारण आरोप हटा लिए गए थे, इस शब्दावली का समर्थन करती रहीं। वहीं एलन मस्क द्वारा एक्स को अभिव्यक्ति की आजादी का केंद्र बनाए जाने के दावे पर भी दोनों में मतभेद रहे।
इन तमाम राजनीतिक और वैचारिक दूरियों के बावजूद दोनों वक्ता एक गंभीर बिंदु पर पूरी तरह सहमत दिखे। जब आंकड़ों को केवल जेन जी पीढ़ी के संदर्भ में देखा जाता है, तो यह आंकड़ा 77 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। दोनों ने स्वीकार किया कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम युवाओं को अपनी-अपनी पसंद के बंद घेरों यानी इको चैंबर में कैद कर रहे हैं। पियर्सन ने कहा कि एल्गोरिदम वही दिखाते हैं जो उपयोगकर्ता देखना चाहता है, जिससे लोकतंत्र और समाज पर गंभीर असर पड़ता है। इसी बात का समर्थन करते हुए अबूघजालेह ने जोर देकर कहा कि आज समाज में लोगों के बीच कोई साझा यथार्थ बाकी नहीं रह गया है।


















