बिहार के सीवान जिले में हाल ही में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल द्वारा छात्रों के सामने एके-47 राइफल तानने की घटना पर सियासी घमासान छिड़ गया है। इस पूरे घटनाक्रम के तूल पकड़ने के बाद अब सत्ताधारी गठबंधन के भीतर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सहयोगी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) की सांसद शांभवी चौधरी खुलकर छात्रों के पक्ष में उतर आई हैं। उन्होंने सोमवार को मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में युवा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करना और विरोध के दौरान एके-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल करना पूरी तरह से गलत है, और वे इस प्रकार की पुलिसिया कार्रवाई के सख्त खिलाफ हैं।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार
संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए सांसद शांभवी चौधरी ने भारतीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे लोकतांत्रिक ढांचे की सबसे बड़ी खूबी यही है कि हर नागरिक को बिना किसी डर के शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की पूरी आजादी मिलती है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का हमेशा स्वागत किया जाना चाहिए और देश के युवाओं के पास यह पूरा अधिकार है कि वे लोकतांत्रिक दायरे में रहकर अपनी आवाज बुलंद करें और अपने हक के लिए खड़े हों।
हिंसा और असामाजिक तत्वों पर बयान
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सांसद ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ मामलों में प्रदर्शन स्थलों पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखना जरूरी हो जाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ताओं ने भी पहले यह बात स्वीकार की है कि कई आयोजनों और प्रदर्शनों के दौरान कुछ असामाजिक तत्व घुस आते हैं, जिसके बाद वहां कानून-व्यवस्था कायम रखने के लिए कदम उठाने पड़ते हैं। हालांकि, इसके बावजूद बल प्रयोग के तरीकों को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सीवान की घटना और निलंबन की कार्रवाई
यह पूरा विवाद शनिवार को बिहार के सीवान जिले में भड़का था, जब नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में छात्र सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा एके-47 राइफल का इस्तेमाल किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इस मामले में पुलिस अधीक्षक (SP) पूरण कुमार झा ने स्पष्ट किया था कि इस गोलीबारी की घटना में कोई भी छात्र घायल नहीं हुआ था। वहीं दूसरी ओर, इस झड़प के दौरान एक अन्य जवान द्वारा चलाई गई गोली से तीन छात्र घायल हो गए थे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाएं भी शाम तक बंद करनी पड़ी थीं। बवाल के दौरान एसपी समेत कुल 30 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित पुलिसकर्मी को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अब यह पूरा मामला संसद भवन तक गूंजने लगा है, जहां राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।



















