जयपुर जिले के ग्रामीण अंचल से पशुपालकों की चिंता बढ़ाने वाला मामला सामने आया है। चाकसू क्षेत्र के तहत आने वाली कोथून ग्राम पंचायत के बृजपुरा गांव में लम्पी वायरस जैसे गंभीर लक्षणों से पीड़ित मवेशी खुले में घूमते और चारा चरते देखे गए हैं। इस स्थिति के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों के बीच गहरा डर फैल गया है, क्योंकि पूर्व में इस बीमारी ने राजस्थान भर में पशुधन को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचाया था।
सरकारी स्कूल के नजदीक बीमार गोवंश की मौजूदगी से अभिभावक परेशान
बृजपुरा गांव में हालात उस वक्त अधिक गंभीर नजर आने लगे जब इन बीमार मवेशियों को गांव के राजकीय विद्यालय के बिल्कुल पास देखा गया। स्कूल के आसपास छात्र-छात्राओं की निरंतर आवाजाही बनी रहती है। सार्वजनिक रास्ते और शिक्षण संस्थान के करीब अस्वस्थ पशुओं के स्वच्छंद विचरण से बच्चों के अभिभावक भी उनकी सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद हो गए हैं।
स्वस्थ पशुओं में संक्रमण फैलने का गहराया संकट
स्थानीय बाशिंदों का कहना है कि संक्रमित बताए जा रहे मवेशी आम रास्तों और स्कूल परिसर के आसपास खुले में घूम रहे हैं, जिससे अन्य तंदुरुस्त पशुओं के भी इस वायरस की चपेट में आने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। ग्रामीणों को इस बात की आशंका सता रही है कि यदि अस्वस्थ गोवंश को समय रहते अलग नहीं किया गया, तो यह संक्रामक बीमारी पूरे इलाके के पशुधन को अपनी गिरफ्त में ले सकती है। पशुपालकों के अनुसार पूर्व में इस महामारी ने जिस तरह तबाही मचाई थी, उसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए फौरी कदम उठाना बेहद जरूरी है।
पशु चिकित्सा विभाग से तत्काल दखल और जांच की गुहार
खतरे की गंभीरता को देखते हुए बृजपुरा के ग्रामीणों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से त्वरित कार्रवाई की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने मांग रखी है कि विभाग की विशेषज्ञ टीमें फौरन गांव का दौरा करें और लम्पी जैसे लक्षणों से ग्रस्त पशुओं को चिह्नित कर उन्हें तुरंत प्रभाव से आइसोलेट करें। इसके साथ ही घर-घर और बाड़ों में मौजूद पशुओं का व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए ताकि बीमारी के फैलाव की कड़ी को शुरू में ही तोड़ा जा सके।
टीकाकरण और स्वच्छता से ही रुकेगा फैलाव
मवेशियों में फैलने वाले इस किस्म के वायरल प्रकोप की रोकथाम के लिए समय पर टीकाकरण और बाड़ों में स्वच्छता बनाए रखना सबसे अहम कदम माने जाते हैं। स्थानीय लोगों ने आगाह किया है कि अगर प्रशासनिक स्तर पर ढिलाई बरती गई और पुख्ता इंतजाम नहीं हुए, तो यह स्थिति बेकाबू होकर महामारी का रूप ले सकती है। इससे पशुपालकों को न केवल भावनात्मक आघात पहुंचेगा, बल्कि भारी आर्थिक क्षति भी झेलनी पड़ सकती है।


















