राजस्थान के झीलों के शहर में रहने वाले एक छह साल के बच्चे ने खेल जगत को अपनी अद्भुत शारीरिक क्षमता से स्तब्ध कर दिया है। महज साढ़े 17 किलोग्राम शारीरिक भार वाले नन्हे विराज शर्मा ने लोहे की भारी छड़ों पर 47 किलोग्राम का वजन साधकर हर किसी को अचरज में डाल दिया है। शारीरिक भार के अनुपात में करीब ढाई गुना अधिक वजन उठाने की इस विलक्षण उपलब्धि के साथ उन्होंने वेटलिफ्टिंग और पावरलिफ्टिंग दोनों विधाओं में कुल सात राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कीर्तिमान अपने नाम दर्ज करा लिए हैं।
शुरुआती सफर और रिकॉर्ड्स का नया सिलसिला
विराज वर्तमान में सेंट पॉल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की एचकेजी कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं। अपनी इस असाधारण प्रतिभा को तराशने के लिए वह लवकुश इंडोर स्टेडियम परिसर स्थित व्यायामशाला में नियमित पसीना बहाते हैं, जहां उन्हें कनिष्ठ प्रशिक्षक ओमप्रकाश पटेल मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण दे रहे हैं। खेल के प्रति उनका समर्पण ऐसा है कि खेल के मैदान पर उतरने के कुछ ही समय के भीतर उन्होंने पुराने सारे मानक पीछे छोड़ दिए।
नन्हे खिलाड़ी के पिता वैभव शर्मा ने बताया कि विराज ने पहली बार इतिहास तब रचा था जब उनकी आयु 5 वर्ष 11 माह थी। उस शुरुआती प्रयास में बालक ने 35 किलोग्राम की लोहे की प्लेटें उठाकर अपनी पहली आधिकारिक पहचान दर्ज कराई थी। इसके बाद प्रगति की रफ्तार बेहद तेज रही। महज पांच से दस दिनों के छोटे अंतराल पर अपनी ही सीमाओं को लांघते हुए उन्होंने पहले 42 किलोग्राम और अंततः 47 किलोग्राम की भारी बारबेल उठाकर अपने पूर्व कीर्तिमानों को स्वयं ही ध्वस्त कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान और विशेष उपाधियां
विराज की इस अद्वितीय शक्ति को कई प्रतिष्ठित रिकॉर्ड पुस्तिकाओं ने मान्यता दी है। उन्हें नेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ-साथ इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, इन्फ्लुएंसर्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड तथा इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से विशेष सम्मान प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ इंडिया सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
पिता वैभव शर्मा के अनुसार, इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने आधिकारिक तौर पर विराज को दोनों विधाओं में विश्व का सबसे कम उम्र का बालक घोषित किया है। केंद्र के स्तर पर भी उनकी इस चमक को सराहा गया है, जहां भारत सरकार द्वारा बालक को सुपर टैलेंटेड किड-वन इन ए मिलियन के राष्ट्रीय खिताब से सम्मानित किया गया है।
राज्य नेतृत्व से सराहना और भावी राष्ट्रीय मंच
नन्हे एथलीट की यह दुर्लभ उपलब्धि कई शीर्ष स्तर के राजनेताओं के ध्यान में भी आई है। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने सार्वजनिक रूप से उनकी इस मेहनत और क्षमता की प्रशंसा की है। वहीं पिता के अनुसार राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बालक के इस शानदार कारनामे से प्रभावित होकर उन्हें विशेष मुलाकात के लिए जयपुर आमंत्रित किया है।
भविष्य की योजनाओं में एक और बड़ा अवसर सामने नजर आ रहा है। आगामी वर्ष में देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले खेलो इंडिया प्रतियोगिता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में विराज के भारोत्तोलन कौशल का विशेष प्रदर्शन आयोजित करने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। सामान्यतः जिस छोटी उम्र में बच्चे बुनियादी खेल गतिविधियों में रमे रहते हैं, उस पड़ाव पर विराज भारी वजन उठाकर खेल की दुनिया में अपनी अनोखी और मजबूत पहचान बना चुके हैं।




















