जयपुर सेंट्रल जेल के भीतर सुरक्षा इंतजामात को धता बताकर प्रतिबंधित सामान पहुंचने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में चलाए गए एक आकस्मिक तलाशी अभियान के दौरान जेल के वार्ड नंबर एक स्थित बैरक नंबर तीन से एक चालू हालत वाला एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किया गया। यह फोन किसी सामान्य जगह पर रखने के बजाय दीवार में लगे बिजली बोर्ड के भीतर बेहद शातिर तरीके से छिपाया गया था। तलाशी दल ने फोन के साथ एक सक्रिय सिम कार्ड और चार्जिंग के काम आने वाली डाटा केबल भी बरामद की है। सलाखों के पीछे इस तरह इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिलने की खबर सामने आते ही जेल प्रबंधन और सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया। कारागार प्रशासन ने सारा सामान फौरन अपनी कस्टडी में लेकर अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया है।
बिजली बोर्ड के भीतर छुपा था फोन, औचक निरीक्षण में पकड़ा गया खेल
जेल परिसर में यह जब्ती उस वक्त हुई जब सुरक्षा कर्मियों का एक दल वार्ड नंबर एक की बैरक नंबर तीन में औचक जांच कर रहा था। निरीक्षण के दौरान तलाशी ले रहे सुरक्षाकर्मियों की निगाहें दीवार पर फिट बिजली के स्विच बोर्ड पर टिक गईं। बोर्ड के आसपास कुछ असामान्य गतिविधि और संदिग्ध ढांचा दिखने पर प्रहरियों ने उसे खोलकर गहराई से पड़ताल करने का फैसला किया। जैसे ही बिजली बोर्ड को खोला गया, उसके अंदर छिपाकर रखा गया एंड्रॉयड स्मार्टफोन बाहर निकल आया। मौके पर जब बोर्ड के खाली हिस्से की बारीकी से जांच की गई तो उसमें फोन के अतिरिक्त एक सिम कार्ड और एक डाटा केबल भी सुरक्षित रखी हुई पाई गई। सुरक्षा दल ने बिना किसी देरी के इस पूरे साजो-सामान को सीज कर उच्च अधिकारियों को सूचित किया।
जेल प्रहरी मंजू मीणा की शिकायत पर लालकोठी थाने में मामला दर्ज
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने तुरंत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जेल प्रहरी मंजू मीणा ने इस घटना को लेकर जयपुर के लालकोठी पुलिस थाने में एक आधिकारिक प्राथमिकी दर्ज कराई है। तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित कानूनी धाराओं में प्रकरण दर्ज कर औपचारिक तफ्तीश शुरू कर दी है। जांच अधिकारी अब इस मुख्य पहलू पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि जेल की बहुस्तरीय सुरक्षा और कड़े पहरे के बावजूद यह फोन परिसर की चारदीवारी पार करके बैरक तक आखिर कैसे पहुंचा। इस बिंदु पर भी पड़ताल केंद्रित है कि बिजली बोर्ड को काटकर या खोलकर उसमें गैजेट छिपाने की योजना किसकी थी और इसमें किसी बंदी, ड्यूटी पर तैनात जेलकर्मी या बाहर से मिलने आने वाले किसी व्यक्ति की मिलीभगत तो नहीं रही है।
कॉल रिकॉर्ड्स और तकनीकी साक्ष्यों से खुलेगी नेटवर्क की परतें
पुलिस अब जब्त किए गए एंड्रॉयड डिवाइस और सिम कार्ड की तकनीकी पड़ताल के जरिए सारा सच सामने लाने की तैयारी कर रही है। साइबर और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाया जाएगा कि इस फोन का इस्तेमाल जेल के अंदर कब-कब किया गया और इसके जरिए बाहर किन-किन नंबरों पर बातचीत की गई थी। सिम कार्ड की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और इंटरनेट उपयोग के डेटा को खंगाला जा रहा है ताकि कैदियों के बाहरी संपर्कों का कच्चा चिट्ठा तैयार किया जा सके। जयपुर सेंट्रल जेल में विभिन्न बैरकों से मोबाइल फोन मिलने का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पूर्व में भी कई मर्तबा ऐसे उपकरण बरामद हो चुके हैं। बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने जेल के निगरानी तंत्र और प्रवेश द्वारों पर होने वाली फ्रिस्किंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस अनुसंधान पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि जेल के भीतर इस अवैध संचार तंत्र को संचालित करने वाले मुख्य चेहरे कौन हैं।





















