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जयपुर के पुरोहितजी के कटले में भीषण आग, तीन मंजिला इमारत में फैली लपटेंराजस्थान
17 सित॰ 2026, 11:41 am (7 घंटे पहले)· 0

जयपुर के पुरोहितजी के कटले में भीषण आग, तीन मंजिला इमारत में फैली लपटें

जयपुर के चारदीवारी इलाके में स्थित पुरोहितजी के कटले की एक तीन मंजिला इमारत में सुबह के वक्त भीषण आग लग गई। तंग गलियों और घनी दुकानों के बीच हुए इस हादसे के बाद मौके पर दमकल की गाड़ियां और पुलिस बल पहुंच गया है।

जयपुर शहर में सुबह के समय एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहां ऐतिहासिक चारदीवारी क्षेत्र के भीतर स्थित पुरोहितजी के कटले में भयंकर आग भड़क उठी। इस अचानक हुई दुर्घटना की खबर मिलते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह आग एक तीन मंजिला कमर्शियल इमारत के अंदर लगी है, जिससे पूरे क्षेत्र में काले धुएं का गुब्बार आसमान में छा गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग की कम से कम आधा दर्जन गाड़ियां तुरंत घटनास्थल पर रवाना की गईं, जबकि स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर हालात का जायजा लेने पहुंच गए।

घनी आबादी और तंग गलियों में राहत कार्य की चुनौती

यह पूरी घटना बड़ी चौपड़ के पास स्थित पुरोहितजी के कटले में सुबह लगभग आठ बजे के आसपास घटी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरा परिसर कपड़ों के बड़े थोक और खुदरा बाजार के रूप में जाना जाता है, जहां एक साथ दर्जनों दुकानें संचालित होती हैं। इस बाजार की सबसे बड़ी समस्या इसकी पुरानी संरचना और अत्यधिक संकरी गलियां हैं, जहाँ पैदल निकलना भी जोखिम भरा होता है। बाजार खुला होने के बावजूद अंदरूनी रास्ते इतने सकरे हैं कि आम दिनों में भी लोग कंधे से कंधे टकराते हुए निकलते हैं। ऐसे में दमकल के भारी-भरकम वाहनों का सीधे घटनास्थल तक पहुंच पाना असंभव साबित हो रहा है, जिससे आग बुझाने के अभियान में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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सुबह के वक्त दुकानें बंद होने से टला बड़ा हादसा

घटना की खबर मिलते ही दमकल और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में आधा दर्जन से ज्यादा गाड़ियां मौके पर मुस्तैद कर दी गई। कटले से आसमान छूती लपटें और उठता घना धुआं देखकर आसपास के लोगों का भारी हुजूम वहां जमा हो गया। हालांकि, इस बीच राहत की बात यह रही कि सुबह का समय होने के कारण ज्यादातर दुकानें अभी बंद थीं, वरना बाजार के खुले होने पर भारी भगदड़ मच सकती थी और स्थिति बेकाबू हो सकती थी। घटना के दो घंटे बीत जाने के बावजूद दमकल कर्मियों की तमाम कोशिशों के बाद भी आग पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं पाया जा सका है और यह लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही है।

मेट्रो स्टेशन के पास सबसे व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्र

आग की लपटें तेजी से आसपास की अन्य दुकानों को भी अपनी चपेट में ले रही हैं, जिससे नुकसान का दायरा बढ़ता जा रहा है। अपनी दुकानों के जलने की आशंका से सहमे कई दुकानदार दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे और स्थिति देखकर उनकी सांसें अटक गईं। संकरे रास्तों के कारण दमकल कर्मियों को पानी की बौछार करने के लिए लंबी पाइपलाइनों का सहारा लेना पड़ रहा है और काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। हालांकि, आग लगने के असली कारणों का अभी तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं हो पाया है और जांच जारी है। गौरतलब है कि यह स्थान बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशन के ठीक नजदीक है और राजधानी के सबसे अधिक व्यस्त तथा संवेदनशील व्यापारिक केंद्रों में गिना जाता है।

सवाल-जवाब

जयपुर में आग कहां लगी है?
यह आग शहर के चारदीवारी इलाके में बड़ी चौपड़ के पास स्थित पुरोहितजी के कटले की एक तीन मंजिला इमारत में लगी है।
घटना के समय बाजार में क्या स्थिति थी?
सुबह का समय होने के कारण अधिकांश दुकानें बंद थीं, जिससे किसी बड़े जननुकसान या भगदड़ से बचाव हो गया।
दमकल गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में क्यों परेशानी हुई?
कटले की गलियां अत्यधिक तंग और संकरी होने के कारण दमकल वाहन सीधे घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके।
आग लगने का कारण क्या पता चला है?
आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी तक कोई खुलासा नहीं हो पाया है और जाँच जारी है।
घटनास्थल के पास कौन सा प्रमुख परिवहन केंद्र है?
बड़ी चौपड़ पर ही मेट्रो ट्रेन का स्टेशन स्थित है, जो इस क्षेत्र को अत्यधिक व्यस्त बनाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 घंटे पहले

ऐतिहासिक और घनी आबादी वाले व्यापारिक क्षेत्रों में आग की घटनाएं सार्वजनिक सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी को उजागर करती हैं। संकरी गलियों में व्यावसायिक गतिविधियों का अनियंत्रित विस्तार आपातकालीन सेवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होता है। आग बुझने के बाद प्रशासन को केवल आर्थिक नुकसान का आकलन नहीं करना चाहिए, बल्कि यह जांचना भी जरूरी है कि इमारत में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा था या नहीं। फोरेंसिक जांच के जरिए आग के कारणों और संभावित लापरवाही की कानूनी जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि ऐसे संवेदनशील बाजारों में भविष्य के खतरों को कम करने के लिए कड़े कदम उठाए जा सकें।

Rohan Verma@rohan-verma·5 घंटे पहले

करण की बात को आगे बढ़ाते हुए, ऐतिहासिक और संकरे व्यापारिक बाजारों में केवल कागजी सुरक्षा जांच की बजाय विशेष नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है। पुरानी इमारतों में इलेक्ट्रिकल वायरिंग का अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट, तंग गलियों के लिए मिनी-दमकल गाड़ियों की तैनाती और स्थानीय स्तर पर हाई-प्रेशर हाइड्रेंट नेटवर्क बनाना बेहद जरूरी है। जब तक नगर निगम और शासन स्तर पर इन विरासत व्यापारिक केंद्रों में बुनियादी ढांचागत बदलाव और प्रशासनिक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना असंभव रहेगा।

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