राजस्थान में पीटीआई भर्ती परीक्षा 2022 से जुड़े फर्जी डिग्री और डिप्लोमा मामले में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने अपना शिकंजा और कस दिया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने की कोशिश करने वाले अभ्यर्थियों से लेकर दलालों और गैर-सरकारी विश्वविद्यालयों के जिम्मेदार अधिकारियों तक जांच की आंच पहुंच चुकी है। इसी कड़ी में एसओजी ने फर्जी डिग्री और डिप्लोमा उपलब्ध कराने के आरोपी दलाल दीपक शर्मा को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई चूरू स्थित ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से जुड़े फर्जीवाड़े में दलाल सुभाष पूनियां के खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 13/2024 के तहत की गई है। एसओजी की इस ताजा धरपकड़ से फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के कई बड़े चेहरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
डिकॉय ऑपरेशन के जरिए हत्थे चढ़ा दलाल दीपक शर्मा
एसओजी की जांच के अनुसार, फर्जी डिग्री गिरोह की कार्यप्रणाली का भंडाफोड़ करने के लिए जांच एजेंसी ने एक विशेष डिकॉय ऑपरेशन चलाया था। इस अंडरकवर ऑपरेशन के दौरान फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की पुख्ता जानकारी जुटाई गई थी, जिसमें दलाल दीपक शर्मा की भूमिका उजागर हुई थी। डिकॉय ऑपरेशन के बाद से ही वह वांछित चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब एसओजी की टीम आरोपी से सघन पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी का मुख्य ध्यान अब इस बात पर केंद्रित है कि दीपक शर्मा ने अब तक कितने अभ्यर्थियों को एक लाख या अन्य रकम लेकर फर्जी बीपीएड डिग्री या डिप्लोमा दिलवाए हैं। इसके साथ ही इस धंधे में शामिल उसके अन्य साथियों और फर्जी कागजात तैयार करने वाले गिरोह के मुख्य सरगनाओं के बारे में भी सुराग जुटाए जा रहे हैं।
श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी के कुलपति और परीक्षा नियंत्रक गिरफ्तार
फर्जी डिग्री मामले में एसओजी की दूसरी बड़ी कार्रवाई मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंस से जुड़ी हुई है। इस मामले में जांच एजेंसी ने पहले ही विश्वविद्यालय के कुलपति मुकेश तिवारी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौड़ और कंप्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा को सलाखों के पीछे भेज दिया है। यह पूरी कार्रवाई अभ्यर्थी भारमल राम के खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 80/2024 की जांच के दौरान सामने आई। जांच में भारमल राम के शैक्षणिक दस्तावेज पूरी तरह फर्जी पाए गए थे।
मामले की तफ्तीश में यह अजीबोगरीब बात सामने आई कि अभ्यर्थी भारमल राम ने पीटीआई भर्ती 2022 का आवेदन फॉर्म भरते समय चूरू की ओपीजेएस यूनिवर्सिटी का नाम दर्ज किया था, लेकिन जब दस्तावेज जमा करने की बारी आई तो उसने श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंस के अंकपत्र और डिग्री लगा दिए। आवेदन पत्र और जमा कराए गए कागजातों के बीच इस बड़े अंतर ने एसओजी का ध्यान खींचा। जब दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो वे फर्जी निकले। इसके बाद जांच के तार सीधे मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित यूनिवर्सिटी के प्रबंधन से जुड़ गए, जिसके बाद कुलपति, परीक्षा नियंत्रक और कंप्यूटर ऑपरेटर की सीधी संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
एक लाख रुपये में बेची जा रही थी बीपीएड की फर्जी डिग्री
एसओजी के खुलासे में यह तथ्य भी सामने आया है कि पीटीआई भर्ती परीक्षा 2022 में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को एक लाख रुपये की दर से बीपीएड की फर्जी डिग्री बेची जा रही थी। कई अभ्यर्थियों ने इन फर्जी डिग्रियों और प्रमाणपत्रों के दम पर भर्ती प्रक्रिया में अंतिम चयन पाने का प्रयास किया था। यही वजह है कि एसओजी की तफ्तीश अब महज अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि फर्जी कागजात छापने, फर्जी मुहरें लगाने, मध्यस्थता करने और पैसे का लेन-देन करने वाले पूरे सिंडिकेट पर केंद्रित है।
कानूनी कार्रवाई के तहत श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों कुलपति मुकेश तिवारी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौड़ और कंप्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा को पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद पुन: अदालत में पेश किया जाएगा। वहीं, दलाल दीपक शर्मा की गिरफ्तारी के बाद चूरू की ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से जुड़े फर्जीवाड़ा मामले की जांच में भी तेजी आ गई है। एसओजी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फर्जी डिग्री का यह नेटवर्क कितने राज्यों में फैला हुआ था और इसके जरिए कितने अयोग्य अभ्यर्थियों ने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में सेंध लगाने की कोशिश की है।



















