सीमावर्ती बाड़मेर क्षेत्र में इस बार रक्षाबंधन पर्व को एक बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक तरीके से मनाया गया। भाई-बहन के अटूट स्नेह, भरोसे और सुरक्षा के पारंपरिक प्रतीक इस त्योहार को यहाँ के युवाओं ने एक व्यापक सामाजिक दायित्व के साथ जोड़ दिया। परंपरागत रूप से जहाँ बहनें केवल अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधती हैं, वहीं इस बार बाड़मेर के मॉर्डन स्कूल परिसर में खुशियों की डोर पर्यावरण की रक्षा के संकल्प तक विस्तृत हो गई। छात्रों ने इस सांस्कृतिक अवसर का उपयोग प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी रेखांकित करने के लिए किया।
वृक्षों को बनाया जीवन का साथी और बाँधा रक्षासूत्र
विद्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बहनों ने अपने भाइयों को राखी बाँधते समय आपसी संबंधों को सहेजने और हर परिस्थिति में एक-दूसरे के प्रति किए गए वादों को निभाने का वचन लिया। इसके तुरंत बाद छात्रों ने परिसर में स्थित पेड़-पौधों के तनों और शाखाओं पर रक्षासूत्र बाँधे। विद्यार्थियों ने इन वृक्षों को अपने सच्चे साथी के रूप में स्वीकार करते हुए उनकी सुरक्षा और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उठाने की घोषणा की।
इस अनोखी गतिविधि पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मॉर्डन स्कूल की छात्रा हर्षिता ने बताया कि पेड़-पौधों को राखी बाँधने का मूल उद्देश्य इंसान और प्रकृति के रिश्ते को सम्मान देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार एक भाई जीवन भर अपनी बहन की रक्षा का संकल्प उठाता है, ठीक उसी तरह प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह प्रकृति, पर्यावरण और हरियाली की रक्षा के लिए तत्पर रहे। प्रकृति की सुरक्षा के बिना मानव जीवन की रक्षा अधूरी मानी जाएगी।
शिक्षकों से पढ़ाई और अनुशासन का अनूठा संकल्प
इस वर्ष का आयोजन केवल पारंपरिक अनुष्ठानों और हरियाली तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें शैक्षणिक अनुशासन का भाव भी समाहित था। रक्षाबंधन के इस पावन मंच पर छात्रों ने अपने गुरुजनों और शिक्षकों से भी कई महत्त्वपूर्ण वादे किए। विद्यार्थियों ने अपनी कक्षाओं में लगन से अध्ययन करने, परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए टॉप करने और विद्यालय परिसर में अनुशासित आचरण बनाए रखने का संकल्प दोहराया।
स्कूल की छात्रा अदिति खत्री ने इस संदर्भ में जानकारी साझा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों को भरोसा दिलाया है कि वे न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर मुकाम हासिल करेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। भाइयों की कलाई पर बँधी राखी जहाँ पारिवारिक मजबूती की याद दिला रही थी, वहीं पौधों पर बँधा धागा कुदरत के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का बोध करा रहा था।
त्योहार को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की पहल
स्कूल के प्रिंसिपल नवनीत पंचोरी ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि रक्षाबंधन जैसे महान पर्व को केवल व्यक्तिगत या पारिवारिक सीमाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों को जब सामाजिक चेतना, प्रकृति की देखभाल और दायित्वबोध से जोड़ा जाता है, तो उनका महत्त्व कई गुना बढ़ जाता है। बाड़मेर में छात्रों द्वारा उठाई गई यह 'वादों वाली राखी' की पहल न केवल हरियाली की सुरक्षा को बढ़ावा देगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी में अनुशासन और प्रकृति-प्रेम के संस्कारों को भी सिंचित करेगी।





















