सड़क पर चलते वक्त अचानक वाहन का टायर पंचर हो जाना या बीच सफर में इंजन का बंद पड़ जाना किसी भी व्यक्ति को भारी तनाव में डाल देता है। इसी तरह घर में बिजली गुल होने, पानी की पाइपलाइन फटने अथवा भीषण गर्मी में एयर कंडीशनर व फ्रिज के काम बंद करने पर तुरंत किसी भरोसेमंद कारीगर को ढूंढना एक गंभीर चुनौती बन जाता है। आम जनता की इसी दैनिक उलझन का तकनीकी समाधान ढूंढते हुए राजस्थान के कोटा शहर के युवा आर्यन सिंह और उनकी टीम ने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इस नए सिस्टम को ‘मेरा साथी’ नाम दिया गया है, जिसका मुख्य लक्ष्य विपरीत और आपात परिस्थितियों में आम नागरिकों को उनके सबसे नजदीकी सेवा प्रदाताओं से सीधे संपर्क कराना है।
रोजमर्रा की तकनीकी खराबी और आपात जरूरतों का एक स्थान पर समाधान
अक्सर देखा जाता है कि जब भी किसी व्यक्ति की गाड़ी सुनसान या अनजान मार्ग पर खराब होती है, तो उसे आसपास किसी पंचर वाले या ऑटो मैकेनिक की खोज में लंबा सफर तय करना पड़ता है अथवा अनजान लोगों से मदद मांगनी पड़ती है। ‘मेरा साथी’ इसी भागदौड़ को समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए लोग अपने मोबाइल फोन की मदद से ही चंद मिनटों में पता लगा सकेंगे कि उनके इलाके में कौन सा तकनीशियन उपलब्ध है।
शुरुआती योजना के तहत इस मंच पर सड़क किनारे सेवा देने वाले मैकेनिक, टायर पंचर सुधारने वाले कारीगर, घरों के इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, और रेफ्रिजरेटर व एयर कंडीशनर सुधारने वाले तकनीशियनों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। इसके साथ ही घर-परिवार और दफ्तरों से जुड़ी अन्य सेवाओं का भी विस्तार किया जाएगा। इसमें वाटर प्यूरीफायर यानी आरओ रिपेयर, मोबाइल फोन एवं कंप्यूटर मरम्मत, बढ़ई, पेंटर, वेल्डर, पेशेवर ड्राइवर और घरेलू साफ-सफाई जैसी विविध श्रेणियों को भी एक ही जगह उपलब्ध कराने की रूपरेखा तैयार की गई है।
स्थानीय हुनरमंद कामगारों को डिजिटल पहचान और सीधा रोजगार
इस व्यवस्था की शुरुआत करने वाले आर्यन सिंह का मानना है कि यह पहल केवल उपभोक्ताओं की परेशानी दूर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर काम की तलाश कर रहे हुनरमंद युवाओं के लिए भी एक बड़ा संबल बनेगी। छोटे शहरों और बस्तियों में ऐसे अनेक कुशल पेंटर, वेल्डर, कारपेंटर और इलेक्ट्रीशियन मौजूद हैं जो अपने काम में माहिर हैं, परंतु व्यापक प्रचार अथवा स्थायी दुकान न होने के कारण उन तक ग्राहक नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते।
‘मेरा साथी’ ऐसे सभी असंगठित कामगारों को एक संगठित मंच पर लाएगा। प्लेटफॉर्म पर प्रत्येक कामगार का विवरण दर्ज रहेगा, जिसमें उनका संपर्क नंबर, कार्य क्षेत्र, लोकेशन और विभिन्न कार्यों के लिए तय प्रस्तावित शुल्क की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होगी। इससे काम ढूंढ रहे युवाओं को नियमित ग्राहक मिल सकेंगे और आम उपभोक्ताओं को मनमाने दाम चुकाने की आशंका से भी राहत मिलेगी।
पारदर्शिता के लिए रेटिंग और फीडबैक की व्यवस्था
सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस डिजिटल सिस्टम में ग्राहकों के फीडबैक और रेटिंग का विशेष विकल्प भी शामिल किया गया है। जब कोई उपभोक्ता किसी कारीगर या मैकेनिक से कार्य करवाएगा, तो वह कार्य समाप्त होने के बाद अपना अनुभव साझा कर सकेगा। इस रेटिंग प्रणाली से अच्छे और ईमानदार कारीगरों की एक मजबूत डिजिटल पहचान बन सकेगी। नए उपभोक्ताओं को भी रेटिंग देखकर सर्वश्रेष्ठ सेवा प्रदाता चुनने में मदद मिलेगी, जिससे धोखाधड़ी या खराब कार्य की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी।
कोटा से शुरुआत कर पूरे देश में विस्तार की योजना
फिलहाल आर्यन सिंह और उनकी सहयोगी टीम ‘मेरा साथी’ के संचालन का परीक्षण कोटा शहर से शुरू करने की पूरी तैयारी में जुटी हुई है। कोटा में प्रारंभिक सफलता और व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर इस मॉडल को राजस्थान के अन्य प्रमुख शहरों में ले जाया जाएगा। इसके बाद टीम का दीर्घकालिक लक्ष्य इस डिजिटल नेटवर्क को पूरे देश के विभिन्न राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू करना है। सड़क पर अचानक आई खराबी से लेकर घरेलू उपकरणों की तकनीकी गड़बड़ी तक, यह पहल जरूरतमंद लोगों और जमीनी स्तर के तकनीशियनों के बीच की दूरी को डिजिटल तकनीक के सहारे हमेशा के लिए मिटाने की दिशा में अग्रसर है।


















