सावन के पावन महीने में राजस्थान के पाली जिले में स्थित फालना कस्बे की सड़कों पर भक्ति और आस्था का एक अनूठा दृश्य देखने को मिला। इस क्षेत्र में आयोजित विशाल कावड़ यात्रा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, लेकिन पूरी यात्रा के दौरान मुख्य आकर्षण 100 से अधिक नन्हे बालक-बालिकाएं रहे। भीषण गर्मी, कड़ी धूप और ऊबड़-खाबड़ रास्तों की परवाह किए बिना इन मासूम कांवड़ियों ने 12 किलोमीटर की कठिन दूरी पैदल तय की। हाथ में कावड़ थामे और मुख पर भोलेनाथ के नाम का जप करते हुए बच्चों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और अपनी अटूट भक्ति से सभी को अचंभित कर दिया।
गंगवेरी मंदिर से शुरू होकर प्रमुख मार्गों से गुजरी यात्रा
इस पावन कावड़ यात्रा का शुभारंभ फालना के प्रसिद्ध गंगवेरी महादेव मंदिर से हुआ। यहां से कांवड़ में पवित्र जल भरकर कांवड़ियों का समूह अनुशासित रूप से आगे बढ़ा। यात्रा मुख्य मार्ग से होती हुई टोल नाका, निंबेश्वर महादेव मंदिर, नाथ जी की धूनी और सांडेराव मुख्य मार्ग तक पहुंची। इसके पश्चात कांवड़ियों का यह जत्था फालना पुलिस थाना, बैंक ऑफ बड़ौदा और काली मूर्ति चौक से होकर गुजरा। अंत में सभी श्रद्धालु खारेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे, जहां वैदिक रीति-रिवाज से शिवलिंग पर पवित्र जल, बेलपत्र और ताजे फूल चढ़ाए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से समूचे फालना क्षेत्र और देश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
भगवामय हुआ शहर, छतों और जेसीबी से हुई पुष्प वर्षा
कावड़ यात्रा को लेकर फालना शहर में अद्भुत धार्मिक माहौल देखने को मिला। पूरे शहर के प्रमुख रास्तों और चौराहों को आकर्षक बैनरों, होर्डिंग्स और भगवा ध्वजों से सजाया गया था। यात्रा के रास्ते में अनेक स्थानों पर स्थानीय भामाशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धालुओं के लिए ठंडे जल, शरबत और फलाहार की व्यापक व्यवस्था की गई थी। जैसे ही नन्हे कांवड़ियों का समूह शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरा, ग्रामीणों और शहरवासियों ने अपने घरों की छतों पर खड़े होकर उन पर पुष्प वर्षा की। कई स्थानों पर जेसीबी मशीनों को खड़ा करके उनके जरिए कांवड़ियों पर फूलों की बौछार की गई, जिसने इस आयोजन को बेहद भव्य और यादगार बना दिया।



















