धरती से विलुप्त हो चुके जीवों को दोबारा जीवित करने के वादे से चर्चा में आई बायोटेक कंपनी कोलोसल बायोसाइंसेज अब लुप्तप्राय वन्यजीवों के डीएनए नमूने जुटाने की बड़ी मुहिम में जुटी है। इस पहल के लिए कंपनी ने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन का सहयोग जुटाया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बेन लैम ने एक सार्वजनिक मंच पर बताया कि जैव विविधता के सामने गंभीर संकट है और ऐसे वक्त में सत्ता से मुंह मोड़कर चार साल तक हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा जा सकता।
संरक्षणवादियों की आलोचना और सहयोग की वजह
ट्रंप प्रशासन का पिछला रुख जमीन और वन्यजीव संरक्षण को लेकर बहुत सकारात्मक नहीं माना गया है, इसके बावजूद कोलोसल ने जैव विविधता के नमूनों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार को तैयार किया। हालांकि कई पर्यावरणविदों और संरक्षणवादियों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का मानना है कि भविष्य में विलुप्त प्रजातियों को फिर से जिंदा करने का वादा वर्तमान में संकटग्रस्त जीवों को बचाने के प्रयासों को कमजोर कर सकता है। अगर नीति निर्माताओं को लगेगा कि खत्म हो चुकी प्रजातियों को दोबारा प्रयोगशाला में बनाया जा सकता है, तो वे आज के संरक्षण बजट और नियमों में ढिलाई बरत सकते हैं। इन सवालों के जवाब में बेन लैम ने स्पष्ट किया कि जब वन्यजीवों पर भारी खतरा मंडरा रहा हो, तब चार साल तक आंखें मूंदे रहना कोई विकल्प नहीं है।
फंडिंग, वैल्यूएशन और अन्य कारोबारी उपक्रम
कोलोसल ने पिछले साल अपनी सीरीज सी फंडिंग में 230 मिलियन डॉलर जुटाए थे, जिसके बाद कंपनी का वैल्यूएशन 10.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। अब यह स्टार्टअप एक और नया निवेश राउंड जुटाने की तैयारी में है, जिसमें कंपनी का संभावित मूल्यांकन 20 अरब डॉलर से 30 अरब डॉलर के बीच आंका जा रहा है। कंपनी केवल जीव विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने कई सहायक कंपनियां भी शुरू की हैं। इनमें से एक ऐसा उपक्रम भी शामिल है जो प्लास्टिक को नष्ट करने के लिए सूक्ष्मजीवों का उपयोग करता है। इसके अलावा कोलोसल की हिस्सेदारी वॉरहाउंड नामक स्टार्टअप में भी है। इस उद्यम को बेन लैम ने एंडुरिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पामर लकी के साथ मिलकर शुरू किया है, जिसका मकसद सेना, पुलिस बल और आपातकालीन सेवा कर्मियों के लिए जेनेटिक रूप से संवर्धित कुत्ते तैयार करना है। लैम का कहना है कि वॉरहाउंड के पीछे एक बड़ा उद्देश्य यूरोप में काम करने वाले कुत्तों के लिए चलने वाले पपी मिल्स पर निर्भरता घटाना है।
मैमथ की 2028 डेडलाइन और डायर वुल्फ पर उठे सवाल
कोलोसल ने वूली मैमथ को पुनर्जीवित करने के बड़े अभियान के तहत डायर वुल्फ को वापस लाने और जीन एडिटिंग के जरिए वूली चूहे बनाने के दावों से खूब सुर्खियां बटोरी हैं। आलोचकों का आरोप है कि कंपनी अपने परिणामों को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती है और इसमें काम से ज्यादा दिखावा है। उदाहरण के लिए, कंपनी द्वारा तैयार किए गए डायर वुल्फ का जीनोम काफी हद तक सामान्य ग्रे भेड़ियों के समान है। क्लेमसन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड जैकोव्स्की ने प्रजातियों की परिभाषा को लेकर कहा था कि किसी प्रजाति को तय करने में स्वाभाविक रूप से कुछ व्यक्तिपरकता होती है। लैम ने कहा कि अगर कोई उनकी रचनाओं को जीन-संशोधित ग्रे भेड़िये कहे या भविष्य के मैमथ को बालदार हाथी कहे, तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि वूली मैमथ तैयार करने की शुरुआती 2028 की समयसीमा चूक जाएगी, हालांकि कंपनी मैमथ के जीन में 130 संपादन करने में सफल रही है।
मेगालोडॉन पर काम करने से साफ इनकार
बेन लैम का दावा है कि कंपनी ने कई बड़े ऐलान किए हैं, लेकिन इसके बावजूद अपने जीन-एडिटिंग प्रयासों को बहुत सीमित रूप में पेश किया है और आने वाले समय में दुनिया के सामने और भी आश्चर्यजनक उपलब्धियां आएंगी। हालांकि उन्होंने एक बात पूरी तरह साफ कर दी कि कंपनी महासागरों के प्राचीन विशाल शिकारी मेगालोडॉन जैसे जीवों पर कभी काम नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि लोगों की ओर से मेगालोडॉन को लेकर काफी दिलचस्पी दिखाई गई थी, लेकिन यह संभव नहीं है क्योंकि समुद्र पहले से ही काफी डरावना है।



















