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घरेलू वर्कशॉप से ग्लोबल मार्केट तक मनीष शर्मा के इको फ्रेंडली जूट स्टार्टअप ने सैकड़ों महिलाओं की बदली तकदीरसक्सेस स्टोरी
26 अग॰ 2026, 11:43 am (18 दिन पहले)· 2

घरेलू वर्कशॉप से ग्लोबल मार्केट तक मनीष शर्मा के इको फ्रेंडली जूट स्टार्टअप ने सैकड़ों महिलाओं की बदली तकदीर

जयपुर में घर के एक छोटे कमरे से शुरू हुआ जूट का कारोबार आज अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है। मनीष शर्मा और उनकी पत्नी की इस अनूठी पहल ने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सैकड़ों स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार प्रदान किया है।

राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जयपुर हमेशा से अपनी बेमिसाल हस्तकला, पारंपरिक कारीगरी और हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध रही है। इसी समृद्ध कलात्मक विरासत से प्रेरणा लेते हुए जयपुर के रहने वाले उद्यमी मनीष शर्मा और उनकी धर्मपत्नी ने अपने घर के एक छोटे से कमरे से जूट के फैंसी उत्पादों का निर्माण शुरू किया। एक बेहद साधारण विचार से शुरू हुआ यह घरेलू उपक्रम आज एक स्थापित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले ई-कॉमर्स ब्रांड का रूप धारण कर चुका है। इनके द्वारा तैयार किए गए पर्यावरण-अनुकूल और कलात्मक जूट उत्पादों की मांग न केवल स्थानीय भारतीय बाजारों में लगातार बढ़ रही है, बल्कि विदेशों में भी इनकी भारी मांग देखी जा रही है।

पारंपरिक पैकेजिंग से आगे: इको-फ्रेंडली जूट की नई पहचान

भारत में जूट का इतिहास काफी पुराना रहा है, जहां इसका इस्तेमाल परंपरागत रूप से मुख्य रूप से बोरियां, खाद्यान्न की पैकेजिंग, खुरदरे टाट और मजबूत रस्सियां बनाने तक ही सीमित था। हालांकि, बदलते दौर के साथ उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है। आज के जागरूक ग्राहक सुंदरता और उपयोगिता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली को प्राथमिकता दे रहे हैं। मनीष शर्मा ने इस बदलती सोच को समझा और जूट की प्राकृतिक खूबियों को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ा। जूट एक शत-प्रतिशत यानी 100% जैव अपघटनीय (Biodegradable) प्राकृतिक रेशा है। इसके बने उत्पाद पूरी तरह गैर-विषाक्त (Non-toxic), अत्यधिक टिकाऊ, बजट के अनुकूल और बेहद आकर्षक होते हैं।

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उत्पादों की गुणवत्ता को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए यह स्टार्टअप कच्चे माल के चयन में विशेष सावधानी बरतता है। मनीष शर्मा अपने उत्पादों के लिए पश्चिम बंगाल के कोलकाता और देश के अन्य प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से विशेष 'कॉर्कोरस' (Corchorus) प्रजाति के प्रीमियम गुणवत्ता वाले जूट के रेशे मंगवाते हैं। इस उच्च स्तरीय कच्चे माल की मदद से उनकी टीम आधुनिक सौंदर्यशास्त्र के अनुरूप बेहतरीन और फैशनेबल सजावटी सामान तैयार करती है।

सजावटी सामान की विविधता और 60 रुपये से 4 हजार तक की कीमत श्रेणी

यद्यपि बाजार में मशीन से बने कई सिंथेटिक और प्लास्टिक के विकल्प प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, परंतु हाथ से बने प्राकृतिक जूट हस्तशिल्प का आकर्षण और उसकी मजबूती बेजोड़ है। पारंपरिक बोरी और रस्सियों से बिल्कुल अलग हटकर मनीष शर्मा की टीम ने आधुनिक होम डेकोर और लाइफस्टाइल एक्सेसरीज पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया है। उनके वर्तमान उत्पाद संग्रह में रोजमर्रा के इस्तेमाल और सजावट की विस्तृत श्रृंखला शामिल है। इनमें टेबल पेन स्टैंड, कलात्मक फ्लावर पॉट, कपड़ों और सामान के लिए वॉश बास्केट, सुंदर वॉल हैंगिंग, डाइनिंग टेबल और कुर्सी के लिए चटाइयां (मैट्स), टी-कोस्टर्स और युवाओं के लिए ट्रेंडी जूट बैग्स प्रमुख रूप से शामिल हैं।

आम जनता से लेकर कला प्रेमियों तक की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इन उत्पादों की मूल्य सीमा बेहद संतुलित रखी गई है। इनके फैंसी होम डेकोर सामानों की शुरुआती कीमत 60 रुपये से आरंभ होती है और प्रीमियम सजावटी वस्तुओं के लिए यह 3 से 4 हजार रुपये तक जाती है। अपने इस हरित व्यवसाय का विस्तार करने और आम लोगों को पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से यह ब्रांड अपने उत्पादों की बिक्री विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से करता है। इसके अतिरिक्त राजस्थान और देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित होने वाले बड़े व्यापारिक मेलों, हस्तशिल्प प्रदर्शनियों और एग्जिबिशन में भी अपने संग्रह का लाइव प्रदर्शन करता है।

स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सैकड़ों महिलाओं का सशक्तिकरण

इस व्यवसाय की सबसे बड़ी सफलता केवल इसका बढ़ता वित्तीय टर्नओवर या विदेशी ऑर्डर नहीं हैं, बल्कि इसका मजबूत सामाजिक प्रभाव है। मनीष शर्मा का यह स्टार्टअप महज एक व्यावसायिक इकाई न रहकर महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में जूट के फैंसी सामानों की बढ़ती मांग को समय पर पूरा करने के लिए इन्होंने कई स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) और ग्रामीण लघु उद्योगों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को अपने साथ जोड़ा है।

इस पहल के तहत इन महिलाओं को जरूरी प्रशिक्षण और कच्चा माल मुहैया कराया जाता है, जिससे वे अपने घरों में रहकर ही इन खूबसूरत उत्पादों का निर्माण कर पाती हैं। घर बैठे सम्मानजनक काम मिलने से सैकड़ों महिलाओं को नियमित आय प्राप्त हो रही है और वे आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह मॉडल न केवल ग्रामीण और शहरी महिलाओं की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव ला रहा है, बल्कि प्लास्टिक के इस्तेमाल को घटाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

सवाल-जवाब

जयपुर के इस जूट स्टार्टअप की शुरुआत किसने और कैसे की?
इसकी शुरुआत जयपुर निवासी मनीष शर्मा और उनकी पत्नी ने घर के एक छोटे कमरे से जूट के फैंसी उत्पाद बनाकर की थी।
स्टार्टअप अपने उत्पादों के लिए कच्चा माल कहां से मंगवाता है?
यह स्टार्टअप पश्चिम बंगाल के कोलकाता और देश के अन्य प्रमुख शहरों से कॉर्कोरस प्रजाति का उच्च गुणवत्ता वाला जूट मंगवाता है।
जूट से बने उत्पादों की कीमत सीमा क्या है?
इन हस्तनिर्मित जूट होम डेकोर और लाइफस्टाइल उत्पादों की कीमतें 60 रुपये से शुरू होकर 3,000 से 4,000 रुपये तक जाती हैं।
इस स्टार्टअप के मुख्य उत्पाद कौन-कौन से हैं?
इनके संग्रह में पेन स्टैंड, फ्लावर पॉट, वॉश बास्केट, वॉल हैंगिंग, टेबल और चेयर मैट्स, टी-कोस्टर्स और ट्रेंडी जूट बैग्स शामिल हैं।
इस पहल से स्थानीय महिलाओं को किस प्रकार सहायता मिल रही है?
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को घर बैठे उत्पादन का काम दिया जाता है, जिससे उन्हें नियमित आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता मिलती है।
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