जिंदगी में अचानक आने वाले गंभीर हादसे अक्सर इंसान का हौसला तोड़ देते हैं, लेकिन कुछ लोग मुश्किल हालात के आगे घुटने टेकने के बजाय संघर्ष का नया रास्ता चुनते हैं। सुमित के साथ भी कुछ समय पहले एक ऐसी ही अनहोनी घटी, जिसने उनकी पूरी दिनचर्या और भविष्य को पूरी तरह बदलकर रख दिया। एक दो मंजिला इमारत से नीचे गिर जाने के कारण वह गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए। इस हादसे का सीधा असर उनकी कमर से नीचे के हिस्से पर पड़ा, जिसके चलते उनके दोनों पैर पूरी तरह पैरालाइज्ड हो गए। अचानक आई इस शारीरिक लाचारी की वजह से उनका चलना फिरना और रोजमर्रा के सामान्य काम करना बेहद कठिन हो गया था।
शारीरिक लाचारी और आजीविका की दोहरी चुनौती
बारहवीं कक्षा यानी इंटर तक पढ़ाई पूरी करने वाले सुमित के सामने हादसे के बाद रोजी रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया। शरीर के निचले हिस्से में आए लकवे के कारण आम नौकरियां पाना उनके लिए लगभग नामुमकिन सा लगने लगा था। एक ओर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और शारीरिक सीमाएं थीं, तो दूसरी ओर अपने और अपने परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने की भारी चिंता उन्हें सता रही थी। ऐसी विकट परिस्थितियों में भी सुमित ने अपनी मानसिक ताकत बनाए रखी और खुद को असहाय मानकर बैठने के बजाय आजीविका के साधन तलाशने का दृढ़ संकल्प लिया।
रंजीत का सहयोग और नई शुरुआत
इस संकट भरे दौर में सुमित के जीवन में रंजीत का सहयोग बेहद निर्णायक साबित हुआ। रंजीत ने उन्हें जोमैटो प्लेटफॉर्म से जुड़ने की राह दिखाई और फूड डिलीवरी का काम शुरू करने में उनकी मदद की। इस सहयोग के बाद सुमित ने नई उम्मीद के साथ मैदान में कदम रखा और धीरे धीरे डिलीवरी के इस काम को अपनी नियमित दिनचर्या में ढाल लिया। इस माध्यम से उन्हें अपनी खुद की मेहनत के दम पर सम्मानपूर्वक कमाई करने का एक व्यावहारिक रास्ता मिल गया।
10 महीने से लगातार जारी है आत्मनिर्भरता का सफर
सुमित पिछले करीब 10 महीने से शहर में निरंतर फूड डिलीवरी का काम संभाल रहे हैं। कमर से नीचे का हिस्सा काम न करने के बावजूद वह रोजाना सड़कों पर उतरते हैं और अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। उनके लिए यह डिलीवरी कार्य महज आर्थिक कमाई का साधन नहीं है, बल्कि अपनी जरूरतों को खुद पूरा करने और समाज में आत्मनिर्भर बने रहने का सबसे बड़ा सहारा भी है।
कठिन हालात में हिम्मत और मेहनत का संदेश
गंभीर दुर्घटना के बाद जीवन को शून्य से दोबारा शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन सुमित ने अपनी शारीरिक कमजोरी को कभी अपनी लाचारी नहीं बनने दिया। उनका यह सफर उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल है जो जीवन में किसी बड़ी मुसीबत या आघात के बाद खुद को असहाय महसूस करने लगते हैं। सुमित का स्पष्ट मानना है कि जीवन में परेशानी चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, इंसान को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और निरंतर मेहनत करते रहना चाहिए।



















