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मोटे अनाज की खेती से बदली किस्मत, बिना सिंचाई और खाद के सांवा-रागी से अच्छी कमाई कर रहीं झंझरी की गिरिजा देवीसक्सेस स्टोरी
31 जुल॰ 2026, 9:58 pm (44 दिन पहले)· 0

मोटे अनाज की खेती से बदली किस्मत, बिना सिंचाई और खाद के सांवा-रागी से अच्छी कमाई कर रहीं झंझरी की गिरिजा देवी

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के झंझरी विकासखंड की महिला किसान गिरिजा देवी बिना अतिरिक्त सिंचाई और खाद के सांवा और रागी की बंपर पैदावार कर मिसाल पेश कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी में रहने वाली प्रगतिशील महिला किसान गिरिजा देवी ने पारंपरिक खेती के तरीकों को छोड़कर एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने खेतों में पारंपरिक फसलों के बजाय मोटे अनाज, यानी सांवा और रागी की बुवाई शुरू की है। वर्तमान में वे लगभग 1 बीघा जमीन पर इन पोषक अनाजों की खेती कर रही हैं और आने वाले समय में अपने इस कृषि क्षेत्र का विस्तार करने की योजना बना रही हैं। बिना किसी अतिरिक्त सिंचाई और रासायनिक उर्वरकों के, केवल प्राकृतिक वर्षा के पानी से तैयार होने वाली इन फसलों ने उनकी आमदनी को बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया है।

बिना पानी और रासायनिक खाद के शानदार उत्पादन

किसान गिरिजा देवी के अनुसार, सांवा और रागी की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें फसल की बुवाई के बाद न तो बार-बार पानी देने की आवश्यकता होती है और न ही महंगे रासायनिक खाद डालने पड़ते हैं। यह पूरी फसल वर्षा के जल पर ही निर्भर रहकर बेहतरीन तरीके से तैयार हो जाती है। बुवाई किए जाने के लगभग 4 महीने बाद यह कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है। इस वजह से खेती की कुल लागत में काफी गिरावट आती है और किसानों को कम खर्च में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण पैदावार प्राप्त होती है। यदि समय पर बुवाई की जाए और नियमित रूप से खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान दिया जाए, तो पैदावार का स्तर काफी ऊंचा रहता है।

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पोषक तत्वों की प्रचुरता और बाजार में बढ़ती मांग

रागी और सांवा दोनों ही सुपरफूड श्रेणी के मोटे अनाज में आते हैं, जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अत्यंत लाभदायक हैं। रागी में मुख्य रूप से कैल्शियम, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जबकि सांवा भी शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करने में सहायक माना जाता है। आजकल खान-पान के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता के कारण इन मोटे अनाजों से तैयार किए गए आटा, दलिया और विभिन्न खाद्य पदार्थों की बाजार में मांग काफी बढ़ रही है। उपभोक्ता स्वस्थ जीवनशैली के लिए इन विकल्पों को अपना रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर बाजार मूल्य मिल रहा है।

मौसम की अनिश्चितता में वरदान और अन्य किसानों को संदेश

जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम के दौर में जहां पारंपरिक फसलों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है, वहीं सांवा और रागी जैसी फसलें कम पानी और विपरीत परिस्थितियों में भी सुरक्षित रहती हैं। केंद्र और राज्य सरकारें भी मोटे अनाज (श्री अन्न) के उत्पादन को लगातार प्रोत्साहन दे रही हैं। गिरिजा देवी ने क्षेत्र के अन्य कृषकों से भी अपील की है कि वे पारंपरिक फसलों पर निर्भरता घटाकर सांवा और रागी जैसी कम लागत वाली फसलों को अपनाएं। उनकी यह सफलता यह सिद्ध करती है कि सही तकनीक, आधुनिक सोच और न्यूनतम संसाधन के साथ भी कृषि को एक लाभदायक व्यवसाय में बदला जा सकता है।

सवाल-जवाब

गोंडा की महिला किसान गिरिजा देवी किन अनाजों की खेती कर रही हैं?
गिरिजा देवी लगभग 1 बीघा जमीन पर सांवा (Barnyard Millet) और रागी (Finger Millet) जैसे मोटे अनाजों की खेती कर रही हैं।
सांवा और रागी की फसल कितने समय में तैयार हो जाती है?
बुवाई किए जाने के लगभग 4 महीने बाद सांवा और रागी की फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है।
क्या सांवा और रागी की खेती के लिए अतिरिक्त सिंचाई या खाद की जरूरत होती है?
नहीं, इन फसलों की बुवाई के बाद न तो अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ती है और न ही रासायनिक खाद की, यह मुख्य रूप से बरसात के पानी से तैयार हो जाती है।
रागी में कौन-कौन से प्रमुख पोषक तत्व पाए जाते हैं?
रागी में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन और फाइबर जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं।
मोटे अनाज की खेती में अच्छी पैदावार के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
सही समय पर बुवाई करना और नियमित रूप से खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान देना अच्छी पैदावार के लिए बहुत जरूरी है।
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