रात के समय शहरों की सड़कों पर सन्नाटा देखकर अक्सर वाहन चालक यह मान लेते हैं कि यातायात नियम शिथिल हो गए हैं। चौराहों पर लाल या हरी बत्ती के बजाय केवल पीली बत्ती ब्लिंक करती देखकर कई लोग बिना गति कम किए वाहन निकाल लेते हैं। हालांकि, गाजियाबाद में ट्रैफिक पुलिस ने ऐसे वाहन चालकों को सख्त चेतावनी दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सिग्नल का ब्लिंक करना नियमों से छूट की अनुमति नहीं देता है, बल्कि यह अधिक सावधानी बरतने का संकेत होता है। रात में बरती गई जरा सी लापरवाही न सिर्फ भयानक दुर्घटना का कारण बन सकती है, बल्कि स्वचालित ITMS कैमरों के जरिए भारी चालान भी कट सकता है।
रात में सिग्नल नियम और पीली बत्ती का सही मतलब
देर रात सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम होने के कारण गाजियाबाद के कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली को ब्लिंकिंग मोड पर डाल दिया जाता है। गाजियाबाद के ट्रैफिक पुलिस डीसीपी त्रिगुण बिसेन ने बताया कि जिन चौराहों पर रात के समय पीली बत्ती लगातार ब्लिंक करती है, वहां चालकों को अपने वाहन की स्पीड अनिवार्य रूप से धीमी करनी चाहिए। चौराहे में प्रवेश करने से पहले चालक को चारों दिशाओं में ध्यान से देखना चाहिए कि कोई अन्य वाहन तो नहीं आ रहा है। रात के समय दूर से आ रहे वाहनों की गति का सटीक अंदाजा लगाना कठिन होता है, इसलिए बिना गति घटाए चौराहा पार करना जानलेवा साबित हो सकता है।
इसके साथ ही, ट्रैफिक अधिकारियों ने बताया कि पीली बत्ती के ब्लिंक करने का उद्देश्य कम ट्रैफिक के दौरान वाहनों का आवागमन सुगम बनाना है। इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि सड़क सुरक्षा कानून निष्प्रभावी हो गए हैं। रात के समय भी सड़क पर चल रहे प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी चालक की अपनी होती है।
चौराहों पर 24 घंटे सक्रिय रहते हैं ITMS और स्पीड कैमरे
अक्सर लोग सोचते हैं कि रात में पुलिस की मौजूदगी न होने से वे बच निकलेंगे, परंतु आधुनिक तकनीक उन पर हर पल नजर रखती है। डीसीपी त्रिगुण बिसेन ने स्पष्ट किया कि गाजियाबाद के अनेक व्यस्त चौराहों पर रात के समय भी सामान्य ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली चालू रहती है। वहां लाल, पीली और हरी बत्ती अपने निर्धारित चक्र के अनुसार चलती हैं। ऐसे चौराहों पर सभी यातायात नियम पूरी तरह लागू रहते हैं। लाल बत्ती होने पर वाहन को रोकना अनिवार्य है, पीली बत्ती पर गति कम करके सावधानी बरतनी होती है और केवल हरी बत्ती होने पर ही चौराहा पार करने की अनुमति होती है। खाली सड़क पर रेड लाइट जंप करना गंभीर कानूनी उल्लंघन माना जाता है।
चौराहों और प्रमुख मार्गों पर स्थापित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के कैमरे रात में भी पूरी तरह सक्रिय रहते हैं। ये अत्याधुनिक कैमरे रेड लाइट जंप करने और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसे उल्लंघनों को तुरंत रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसके अलावा, कई प्रमुख सड़कों पर स्पीड कैमरे भी लगाए गए हैं। यदि कोई वाहन तय सीमा से अधिक रफ्तार से दौड़ता है, तो स्पीड कैमरे की मदद से उसका ई-चालान स्वतः जारी हो जाता है।
गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस की अपील और आवश्यक सावधानियां
रात के समय होने वाले हादसों पर अंकुश लगाने के लिए गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस ने सभी वाहन चालकों से सतर्कता बरतने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि खाली सड़क देखकर वाहन की रफ्तार अनियंत्रित न करें। चौराहे के निकट पहुंचते ही वाहन को धीमा करें और चारों तरफ देखकर ही आगे बढ़ें।
इसके अतिरिक्त, ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट किया कि सिग्नल बंद होने या पीली बत्ती ब्लिंक होने का यह मतलब नहीं है कि अन्य नियम समाप्त हो गए हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना, कार चालकों के लिए सीट बेल्ट लगाना, गलत दिशा में गाड़ी न चलाना और लेन अनुशासन बनाए रखना रात में भी उतना ही अनिवार्य है जितना कि दिन में। अपनी और दूसरों की जान-माल की रक्षा करना हर नागरिक का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है।



















