उत्तराखंड के दो प्रमुख शहरों देहरादून और हरिद्वार के बीच आवागमन करने वाले हजारों मुसाफिरों के लिए सफर जल्द ही तेज, बाधारहित और काफी सुरक्षित होने जा रहा है। इस व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर आए दिन लगने वाले भीषण जाम और बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं से मुक्ति दिलाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का काम तेज गति से जमीन पर उतारा जा रहा है। पूरे 36 किलोमीटर लंबे सड़क खंड पर सड़क सुरक्षा मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने और यातायात प्रवाह को व्यवस्थित करने के लिए 320 करोड़ रुपये का वृहद प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। निर्धारित कार्ययोजना के तहत अगले दो साल के भीतर निर्माण कार्य मुकम्मल करने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया गया है, जिसके धरातल पर उतरने के बाद दोनों शहरों की दूरी तय करने में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी।
मौसम साफ होते ही निर्माण कार्यों में तेजी और यूटिलिटी शिफ्टिंग
बीते दिनों क्षेत्र में लगातार हुई तेज मानसूनी बारिश के कारण धरातल पर निर्माण गतिविधियों की रफ्तार कुछ समय के लिए प्रभावित हुई थी। अब मौसम पूरी तरह साफ होने और बारिश का सिलसिला थमने के बाद परियोजना से जुड़े तमाम कार्यों को पूरी शक्ति से आगे बढ़ाने का खाका अमल में लाया जा रहा है। वर्तमान चरण में हाईवे के दोनों किनारों पर यूटिलिटी शिफ्टिंग का काम शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा रहा है। इसके तहत सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे बिजली के खंभे, हाईटेंशन तार, पेयजल आपूर्ति की बड़ी पाइपलाइनें और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी बुनियादी ढांचों को योजनाबद्ध तरीके से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। मार्ग में आने वाली इन सभी तकनीकी और ढांचागत रुकावटों के हटते ही मुख्य कंक्रीट संरचनाओं और पिलर्स के निर्माण में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिलेगी।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ सिंह के मुताबिक, मौजूदा समय में कार्यस्थल पर यूटिलिटी शिफ्टिंग को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बारिश थमने के बाद अब मैदानी स्तर पर बाकी बचे सभी कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित किया जाएगा ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी सुरक्षा इंतजाम और निर्माण कार्य बिना किसी देरी के पूरे किए जा सकें।
मियांवाला से नकरौंदा तक बनेगा 2.5 किमी का सबसे बड़ा एलिवेटेड मार्ग
इस पूरे 36 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में सबसे प्रमुख आकर्षण मियांवाला से नकरौंदा के बीच तैयार होने वाला विशाल एलिवेटेड कॉरिडोर है। करीब सवा दो किलोमीटर (2.5 किमी के दायरे में) लंबा यह एलिवेटेड मार्ग समूची परियोजना में स्वीकृत सभी 7 फ्लाईओवरों में सबसे बड़ा और तकनीकी दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण ढांचा होगा। इस एलिवेटेड हिस्से के बन जाने के बाद घनी आबादी वाले स्थानीय कस्बों की धीमी गति वाली गाड़ियों और मुख्य हाईवे पर दौड़ने वाले तेज रफ्तार अंतरराज्यीय ट्रैफिक को पूरी तरह अलग-अलग किया जा सकेगा। इससे मियांवाला चौराहे और आसपास के क्षेत्रों में वर्षों से लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह सुव्यवस्थित हो जाएगी।
चिह्नित 7 प्रमुख स्थानों पर तैयार होंगे आधुनिक फ्लाईओवर
हाईवे पर अत्यधिक ट्रैफिक दबाव, अंधाधुंध गति और खतरनाक तिराहों पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए 7 अलग-अलग प्रमुख स्थानों पर फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना निश्चित हुआ है। इन सभी फ्लाईओवरों को स्थानीय यातायात की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया गया है
- मियांवाला-नकरौंदा क्षेत्र: इस इलाके में करीब सवा दो किलोमीटर लंबा सबसे बड़ा एलिवेटेड फ्लाईओवर बनाया जाएगा जो लंबी दूरी के वाहनों को सीधा बाईपास प्रदान करेगा।
- जाखन पुल क्षेत्र: डेंटल कॉलेज के ठीक समीप एक नए फ्लाईओवर का निर्माण होगा, जिससे छात्रों और मरीजों को भी आवाजाही में सुरक्षा मिलेगी।
- जीवनगढ़ क्षेत्र: यहां यातायात के भारी दबाव को सुचारू रूप से विभाजित करने के लिए दो अलग-अलग फ्लाईओवर बनाए जाएंगे।
- छिद्दरवाला बाजार: मुख्य बाजार क्षेत्र और तिराहे पर वाहनों की भीड़ तथा जाम खत्म करने के लिए एक फ्लाईओवर स्थापित किया जाएगा।
- रायवाला क्षेत्र: पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के सबसे व्यस्त जंक्शन माने जाने वाले रायवाला में दो नए फ्लाईओवरों का निर्माण तय किया गया है।
44 किलोमीटर लंबी सर्विस लेन और दो नए फुट ओवरब्रिज
इस मेगा प्रोजेक्ट की रूपरेखा सिर्फ मुख्य कैरिजवे को चौड़ा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास बसी स्थानीय आबादी और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को भी केंद्र में रखा गया है। हाईवे के दोनों तरफ के हिस्सों को मिलाकर कुल 44 किलोमीटर लंबी आधुनिक सर्विस लेन तैयार की जाएगी। सर्विस लेन बन जाने से स्थानीय दोपहिया, तिपहिया और निजी वाहन मुख्य हाईवे पर आए बिना अपनी लेन में चल सकेंगे, जिससे मुख्य मार्ग पर अचानक स्थानीय वाहनों के आने से होने वाली भयानक टक्करों की आशंका नगण्य हो जाएगी। इसके साथ ही पैदल राहगीरों को चौड़ी सड़क को आर-पार सुरक्षित तरीके से पार कराने के लिए दो आधुनिक फुट ओवरब्रिज का निर्माण किया जाएगा, जिनकी सटीक लोकेशन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया वर्तमान में अंतिम चरण में चल रही है।
सड़क पर बार-बार होने वाले घातक हादसों को रोकने के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स को पूरी तरह खत्म करने की योजना भी तैयार है। इसके तहत माजरी, डेंटल कॉलेज और रायवाला से लेकर हरिद्वार तक फैले विभिन्न प्रमुख जंक्शनों को वैज्ञानिक इंजीनियरिंग सिद्धांतों के आधार पर दोबारा री-डिजाइन और विकसित किया जाएगा। अगले दो साल की तय समयावधि में यह समूचा आधुनिक कॉरिडोर बनकर तैयार होने के बाद देहरादून और हरिद्वार के बीच का सफर केवल समय की भारी बचत ही नहीं कराएगा, बल्कि यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप एक विश्वस्तरीय और निर्बाध हाईवे का सुखद अनुभव भी प्रदान करेगा।



















