पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में वायुमंडलीय दबाव और मौसमी प्रणाली में आए बदलाव के कारण समूचे क्षेत्र में ठंड की दस्तक तेज हो गई है। 15 अक्टूबर से शुरू हुए इस नए मौसमी दौर में राज्य के पहाड़ी जिलों के साथ मैदानी भूभागों में भी बादल छाए हुए हैं। ऊंचाई वाले हिमालयी शिखरों पर ताजा हिमपात की परिस्थितियां बन रही हैं, जबकि तलहटी और घाटी वाले इलाकों में हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा दर्ज की जा रही है। इस मौसमी हलचल से समूचे प्रदेश के तापमान में भारी गिरावट दर्ज होने लगी है और वातावरण में ठिठुरन बढ़ गई है।
कुमाऊं और गढ़वाल के ऊंचे शिखरों पर बर्फबारी की शुरुआत
मौसम विज्ञानियों के आकलन के अनुसार, 15 और 16 अक्टूबर के दौरान इस मौसमी तंत्र का सर्वाधिक प्रभाव कुमाऊं मंडल और गढ़वाल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा। 3500 से 3800 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले शिखरों पर इस शरद ऋतु का नया हिमपात देखने को मिल रहा है। इस हिमपात के कारण राज्य के उच्च पर्वतीय दर्रों और घाटियों में न्यूनतम तापमान शून्य के करीब पहुंचने की संभावना है।
कुमाऊं मंडल के जिलों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। वहीं 16 अक्टूबर को नैनीताल, अल्मोड़ा, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चम्पावत, उधम सिंह नगर और सीमांत पिथौरागढ़ जिलों के अनेक हिस्सों में वर्षा और उच्च चोटियों पर बर्फबारी की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इन इलाकों में लगातार नमी आने से पारे में तेजी से गिरावट आ रही है।
देहरादून, हरिद्वार और उत्तरकाशी में आंधी और बिजली गिरने का अंदेशा
राजधानी देहरादून, उत्तरकाशी और धर्मनगरी हरिद्वार के तराई तथा मैदानी हिस्सों के लिए मौसम विज्ञान केंद्र ने विशेष चेतावनी जारी की है। इन जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने तथा बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ आकाशीय बिजली चमकने की प्रबल संभावना है। 15 अक्टूबर को दिनभर बादलों की आवाजाही के बीच कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने का अनुमान लगाया गया है।
देहरादून शहर में शाम ढलते ही सर्द हवाओं के थपेड़ों के साथ बूंदाबांदी का दौर बनने से आम दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर हरिद्वार में घने बादलों के जमावड़े के चलते अधिकतम और न्यूनतम तापमान में तीखी गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे दोपहर के समय महसूस होने वाली उमस पूरी तरह गायब हो जाएगी और सुबह-शाम के वक्त गर्म कपड़ों की जरूरत महसूस होने लगेगी।
नैनीताल, हल्द्वानी और उधम सिंह नगर में पारा लुढ़का
कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी तथा निकटवर्ती उधम सिंह नगर जनपद के विस्तृत मैदानी भागों में सुबह के वक्त से ही घने बादलों का पहरा देखा गया। मैदानी बस्तियों में इस वायुमंडलीय बदलाव का असर सीधे तौर पर न्यूनतम तापमान में गिरावट के रूप में सामने आया है। पंतनगर, रुद्रपुर और आसपास के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बारिश की बूंदें पड़ने और ठंडी बयार चलने से रात का पारा काफी नीचे आ गया है।
नैनीताल के प्रसिद्ध झील क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा होने के कारण ठंड का प्रकोप अचानक बढ़ गया है। पहाड़ों की ओर से बहने वाली ठंडी हवाएं जब मैदानी भागों में पहुंच रही हैं, तो स्थानीय नागरिकों और स्कूली बच्चों को हल्के ऊनी वस्त्र निकालने पर विवश होना पड़ रहा है। मौसम में आए इस तीखे बदलाव से मौसमी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है।
चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी के तीर्थस्थलों में गिरा तापमान
गढ़वाल मंडल के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्रों और पर्वतीय भूभाग वाले जनपदों चमोली, रुद्रप्रयाग तथा टिहरी में 15 अक्टूबर की देर शाम से मौसमी मिजाज और अधिक कड़ा होने की संभावना है। इन तीनों जिलों के 3500 से 3800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित शिखरों पर बर्फ की चादर बिछने के आसार बने हुए हैं। पर्वतीय शिखरों पर बर्फ गिरने और निचली घाटियों में बारिश होने से इन जनपदों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
इसके साथ ही 17 और 18 अक्टूबर को भी चमोली जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में छिटपुट जगहों पर बहुत हल्की वर्षा और बर्फबारी का क्रम जारी रह सकता है। इस लंबी मौसमी सक्रियता के कारण गढ़वाल के इन जिलों में सर्दी का असर गहराएगा और स्थानीय बाजारों में भी गर्म कपड़ों की मांग में अचानक इजाफा देखने को मिलेगा।
पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा में ओलावृष्टि की चेतावनी और वैज्ञानिकों के निर्देश
पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा जनपदों में मेघगर्जन के साथ आकाशीय बिजली गिरने और कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की गंभीर चेतावनी दी गई है। तेज हवाओं और ओलों के कारण खड़ी फसलों और बागवानी को नुकसान पहुंचने की आशंका से किसान चिंतित हैं।
पंतनगर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एएस नैन ने पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करने वाले तीर्थयात्रियों और सैलानियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉ. एएस नैन के मुताबिक, ऊंचाई वाले मार्गों पर ताजा बर्फबारी और वर्षा के चलते सड़कों पर भारी फिसलन पैदा हो सकती है, जिससे वाहनों के फिसलने और यातायात बाधित होने का खतरा बना रहेगा। आम जनमानस को आधिकारिक मौसम बुलेटिन और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की हिदायत दी गई है। पूरे राज्य में 19 और 20 अक्टूबर से मौसम पूरी तरह शुष्क होने की संभावना जताई गई है।
























