अंटार्कटिका में सर्दियों के बीच पिघल गई फ्रांस जितनी बर्फ, पारा 20 डिग्री उछला — क्या समंदर निगल जाएगा तटीय शहर?दुनिया
2 घंटे पहले· 1

अंटार्कटिका में सर्दियों के बीच पिघल गई फ्रांस जितनी बर्फ, पारा 20 डिग्री उछला — क्या समंदर निगल जाएगा तटीय शहर?

अंटार्कटिका के बेलिंग्सहाउसेन सी इलाके से सर्दियों के मौसम में ही करीब 6.5 लाख वर्ग किलोमीटर बर्फ गायब हो गई, जो फ्रांस के बराबर है। तापमान सामान्य से 20 डिग्री ज्यादा पहुंचने से ग्लेशियर, पेंगुइन और दुनिया के तटीय शहरों पर खतरा गहरा गया है।

दुनिया के सबसे ठंडे महाद्वीप अंटार्कटिका से इस बार जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने मौसम वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है। जिस मौसम में यहां बर्फ की मोटी चादर बिछ जानी चाहिए, ठीक उसी दौरान पश्चिमी तट का एक बहुत बड़ा हिस्सा बर्फ से बिल्कुल खाली पड़ा है। सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें बता रही हैं कि बेलिंग्सहाउसेन सी का जो इलाका इन दिनों जमी हुई बर्फ से ढका रहना चाहिए था, वहां अब समुद्र खुला नजर आ रहा है। यह नजारा ग्लोबल वॉर्मिंग की रफ्तार पर एक नई और डरावनी चेतावनी है।

सर्दियों में ही फ्रांस के बराबर बर्फ कहां चली गई?

अंटार्कटिका में अभी सर्दियों का मौसम चल रहा है। आमतौर पर इन्हीं महीनों में हर तरफ बर्फ की परत तेजी से मोटी होती जाती है और सितंबर तक यह अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाती है। लेकिन इस साल जून में ही जो आंकड़े वैज्ञानिकों के हाथ लगे, उन्होंने सबको चौंका दिया। बेलिंग्सहाउसेन सी का पूरा क्षेत्र इस वक्त लगभग बर्फमुक्त दिख रहा है।

रिसर्च के मुताबिक इस इलाके से करीब 6 लाख 50 हजार वर्ग किलोमीटर बर्फ गायब हो चुकी है। आकार के लिहाज से यह यूरोप के बड़े देश फ्रांस के कुल क्षेत्रफल के बराबर है। यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के बर्फ विशेषज्ञ डॉ. विल हॉब्स इस हालात से बेहद चिंतित हैं। उनका कहना है, ‘जून के महीने में यहां बर्फ का न होना बेहद परेशान करने वाला है।’

हैरानी की बात यह है कि बीते चार वर्षों में यह तीसरा मौका है जब बर्फ का स्तर इतना नीचे दर्ज किया गया है। जानकारों को आशंका है कि अब इस इलाके में बर्फ का दोबारा उतनी आसानी से जमना मुश्किल है, और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह समुद्र के पानी का बढ़ता तापमान माना जा रहा है।

क्या ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ टूटने की कगार पर है?

समुद्र पर तैरने वाली बर्फ की ये चादरें असल में नीचे मौजूद विशाल ग्लेशियरों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती हैं। जब यह कवच लंबे समय तक गायब रहता है, तो ग्लेशियरों के तेजी से टूटने का खतरा बढ़ जाता है। बेलिंग्सहाउसेन सी के ठीक पश्चिम में पाइन आइलैंड और थवाइट्स ग्लेशियर मौजूद हैं।

थवाइट्स ग्लेशियर को पूरी दुनिया में ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ के नाम से जाना जाता है और इसे अंटार्कटिका में सबसे तेजी से पिघलने वाले बर्फीले पहाड़ों में गिना जाता है। ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मीटियोरोलॉजी के डॉ. फिल रीड का कहना है कि तटीय इलाकों से बर्फ खत्म होने पर ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है।

इसका सीधा असर दुनिया भर के समुद्रों के जलस्तर पर पड़ेगा। पानी का स्तर तेजी से ऊपर उठने से दुनिया के कई बड़े और अहम तटीय शहरों के डूबने का खतरा गहरा जाएगा, और इस एक बदलाव की चपेट में करोड़ों लोगों का जीवन आ सकता है।

पेंगुइन और समुद्री जीवों पर क्यों मंडरा रहा मौत का साया?

बर्फ के इस तरह गायब होने की सबसे दर्दनाक कीमत वहां के वन्यजीव चुका रहे हैं। बेलिंग्सहाउसेन सी का तट पेंगुइनों के रहने का एक बड़ा ठिकाना माना जाता है। साल 2022 के आखिर में यहां एक बड़ी त्रासदी हुई थी, जब बर्फ के समय से पहले पिघल जाने के कारण सम्राट पेंगुइन के हजारों बच्चों की मौत हो गई थी।

ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के डॉ. पीटर फ्रेटवेल इस गिरावट पर लगातार शोध कर रहे हैं। उनके मुताबिक, ‘बर्फ का देर से बनना और जल्दी टूटना पेंगुइन के लिए गंभीर समस्या है।’ इसी वजह से पेंगुइन के बच्चों के जीवित रहने और प्रजनन की कामयाबी की दर बहुत नीचे गिर चुकी है। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र के सलाहकारों ने सम्राट पेंगुइन को अंतरराष्ट्रीय संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में ‘एंडेंजर्ड’ श्रेणी में डाल दिया है।

संकट सिर्फ सम्राट पेंगुइन तक सीमित नहीं है। एडेल पेंगुइन की संख्या भी तेजी से घट रही है। गर्मियों में सुरक्षित ठिकाने की तलाश में सील मछलियों को दूसरी जगहों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। वहीं क्रिल मछलियों के छिपने की जगहें भी पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं — और यही क्रिल अंटार्कटिका के पूरे फूड वेब की सबसे अहम कड़ी मानी जाती हैं।

सर्दियों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का राज क्या है?

बर्फ के गायब होने के साथ-साथ इस इलाके में तापमान ने भी खतरनाक रिकॉर्ड बनाया है। अर्जेंटीना के एस्पेरांजा बेस पर 5 और 6 जून को असामान्य गर्मी महसूस की गई, जब अधिकतम तापमान क्रमशः 15.4 डिग्री और 13.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

हैरान करने वाली बात यह है कि जून के महीने में इस क्षेत्र का सामान्य औसत तापमान माइनस 6.2 डिग्री सेल्सियस रहता है। यानी पारा सामान्य से 20 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर चला गया। इससे पहले साल 1998 में जून का रिकॉर्ड तापमान 13.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जिसे इस बार पीछे छोड़ दिया गया।

आंकड़ों की जुबानी, बदलते महाद्वीप की कहानी

अंटार्कटिका की मौजूदा हालत कुछ अहम आंकड़ों में साफ झलकती है, जो बताते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग किस रफ्तार से आगे बढ़ रही है।

  • गायब बर्फ का क्षेत्रफल: करीब 6,50,000 वर्ग किलोमीटर, यानी फ्रांस देश के बराबर बड़ा इलाका।
  • रिकॉर्ड तापमान: जून 2026 में एस्पेरांजा बेस पर 15.4 डिग्री सेल्सियस।
  • सामान्य औसत तापमान: जून में इस इलाके का सामान्य तापमान माइनस 6.2 डिग्री सेल्सियस।
  • कुल समुद्री बर्फ की कमी: 10 जून को पूरे महाद्वीप पर 11.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर बर्फ थी, जबकि ऐतिहासिक औसत 12.6 मिलियन होना चाहिए था।
  • जीवों पर असर: सम्राट पेंगुइन की प्रजाति अब अंतरराष्ट्रीय संकटग्रस्त सूची में ‘एंडेंजर्ड’ घोषित हो चुकी है।

ये सारे संकेत एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं — दुनिया के सबसे ठंडे महाद्वीप पर आ रहा यह बदलाव सिर्फ अंटार्कटिका की समस्या नहीं, बल्कि पूरी धरती के लिए एक चेतावनी है।

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