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बघेलखंडी जायके के साथ घर पर तैयार करें कुरकुरी पालक कचौड़ीखानपान
2 नव॰ 2026, 7:25 am (1 घंटे पहले)· 0

बघेलखंडी जायके के साथ घर पर तैयार करें कुरकुरी पालक कचौड़ी

सर्दियों के मौसम में मेथी या मटर से हटकर कुछ नया चखना चाहते हैं, तो ताजी पालक की खस्ता कचौड़ी एक बेहतरीन देसी विकल्प है। घर की सामान्य रसोई सामग्री और टमाटर की चटनी के साथ यह आसानी से तैयार हो जाती है।

मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र में पारंपरिक खान-पान का अपना एक विशेष अंदाज रहा है, जहाँ मौसम बदलते ही थाली में ताजी हरी सब्जियों से सजे देसी व्यंजनों की रौनक बढ़ जाती है। सर्दियों के दिनों में अमूमन घरों में मेथी की पूड़ी, हरे मटर की कचौड़ी या गरमागरम आलू की कचौड़ी खूब चाव से खाई जाती है। लेकिन अगर आप इस बार अपने नाश्ते में कुछ अलग और खास जोड़ना चाहते हैं, तो पालक की खस्ता कचौड़ी एक शानदार विकल्प बनकर उभरती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे तैयार करने में न तो बहुत ज्यादा मेहनत लगती है और न ही किसी दुर्लभ सामग्री की आवश्यकता होती है। घर की रसोई में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली चीजों से ही यह स्वादिष्ट और कुरकुरी कचौड़ी झटपट तैयार की जा सकती है।

कचौड़ी बनाने के लिए जरूरी देसी सामग्री

सतना की स्थानीय निवासी अंजलि चतुर्वेदी के अनुसार, पालक की कचौड़ी या पूड़ी तैयार करने के लिए बहुत लंबी-चौड़ी सामग्री की सूची नहीं जुटानी पड़ती। इसके लिए मुख्य रूप से खेत या बाजार से लाई गई ताजी पालक, दो कप गेहूं का आटा, हरी मिर्च, अदरक का टुकड़ा और लहसुन की कलियों की दरकार होती है। इसके अतिरिक्त स्वाद बढ़ाने के लिए नमक, आधा चम्मच जीरा पाउडर और आटे में मोयन देने व तलने के लिए घी या तेल की जरूरत पड़ती है। इन चंद बुनियादी चीजों के सही तालमेल से ही बघेलखंडी स्वाद वाली लाजवाब कचौड़ी बनकर तैयार हो जाती है।

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इस तरह तैयार करें गाढ़ा और खुशबूदार हरा पेस्ट

पालक की कचौड़ी बनाने का प्रारंभिक और सबसे महत्वपूर्ण चरण पालक की पत्तियों का गाढ़ा पेस्ट तैयार करना है। इसके लिए ताजी हरी पालक को लेकर सबसे पहले उसकी डंडियों और खराब पत्तियों को छांटकर अलग कर लें। चूंकि पालक की पत्तियों में जमीन की धूल और मिट्टी चिपकी रहने की आशंका काफी ज्यादा होती है, इसलिए इसे दो से तीन बार साफ और ताजे पानी से अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है। धोने के उपरांत धुली हुई पत्तियों को किसी जालीदार छलनी में कुछ मिनटों के लिए रख दें, जिससे पत्तियों का सारा अतिरिक्त पानी धीरे-धीरे निथर जाए।

जब पालक से अतिरिक्त पानी निकल जाए, तब इन साफ हरी पत्तियों को मिक्सी के जार में डालें। इसी जार में तीखेपन के लिए हरी मिर्च, छिला हुआ अदरक और लहसुन की कलियां भी शामिल कर दें। अब मिक्सी चलाकर इन सभी चीजों को एकदम बारीक पीस लें। पीसते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि पानी का इस्तेमाल न के बराबर या बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही कुछ बूंदें किया जाए, ताकि मिश्रण पतला न पड़ने पाए। जब गहरा हरा, गाढ़ा और महीन पेस्ट बनकर तैयार हो जाए तो उसे एक कटोरी में अलग निकाल लें। यही गाढ़ा पेस्ट कचौड़ी को गहरा प्राकृतिक हरा रंग, ताजगी और सौंधी खुशबू प्रदान करता है।

आटे में मोयन और गूंथने का सही तरीका

पेस्ट तैयार करने के बाद कचौड़ी का आटा लगाने की बारी आती है। इसके लिए एक चौड़े मुंह वाली बड़ी परात या गहरे बर्तन में दो कप गेहूं का आटा निकाल लें। इस सूखे आटे में स्वादानुसार सादा नमक और आधा चम्मच जीरा पाउडर बुरक दें। कचौड़ी को अंदर से खस्ता और बाहर से करारी बनाने के लिए इसमें दो चम्मच घी या तेल का मोयन डालें। अब दोनों हाथों से आटे को अच्छी तरह मसलते हुए मिलाएं, ताकि घी या तेल पूरे आटे के एक-एक कण में समान रूप से समा जाए।

मोयन अच्छी तरह मिल जाने के बाद तैयार किया गया हरा पालक का पेस्ट धीरे-धीरे परात में डालें और आटे को गूंथना शुरू करें। चूंकि पिसे हुए पालक के पेस्ट में पहले से ही भरपूर प्राकृतिक नमी मौजूद रहती है, इसलिए शुरुआत में ऊपर से अलग से पानी बिल्कुल न मिलाएं। उसी हरे पेस्ट की मदद से पूरे आटे को समेटते हुए गूंथें। कचौड़ी का आटा सामान्य रोटी के आटे की तुलना में थोड़ा सख्त और पूरी तरह चिकना होना चाहिए। सख्त आटा गूंथने से कचौड़ी बेलते समय फटती नहीं है और गर्म तेल में जाते ही अच्छी तरह फूलकर एकदम करारी बनती है। जब आटा बढ़िया बंध जाए, तो उसे किसी कपड़े या ढक्कन से ढककर लगभग 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इस आराम से आटे में मौजूद ग्लूटेन सेट हो जाता है और लोइयां बेलने में काफी सहूलियत रहती है।

लोइयां तैयार करना और बेलने की विधि

तय समय यानी 10 से 15 मिनट बाद ढक्कन हटाएं और सेट हो चुके आटे को हथेलियों से एक बार फिर हल्का सा मसलकर एकसार कर लें। इसके बाद आटे से नींबू के आकार की छोटी-छोटी लोइयां तोड़कर गोल पेड़े बना लें। अब चकले और बेलन पर हल्का सा तेल या घी लगाएं, ताकि बेलते समय आटा चिपके नहीं। लोई को चकले पर रखकर हल्के हाथों से गोल आकार में बेलना शुरू करें।

यदि आपका मन पतली पूड़ी जैसा नाश्ता खाने का है, तो इसे थोड़ा पतला बेला जा सकता है। लेकिन अगर आप पारंपरिक बघेलखंडी कचौड़ी का पूरा आनंद लेना चाहते हैं, तो इसकी मोटाई सामान्य पूड़ी से थोड़ी अधिक रखें। बेलते वक्त किनारों पर ज्यादा दबाव न डालें, जिससे कचौड़ी का घेरा एकसमान रहे और वह कहीं से भी कटे-फटे नहीं। सभी लोइयों को इसी तरीके से एक-एक करके बेल लें और किसी साफ थाली में फैलाकर रख लें, ताकि वे आपस में चिपकें नहीं।

कढ़ाई में तलने की आंच और तरीका

अब गैस चूल्हे पर एक भारी तले वाली कढ़ाई चढ़ाएं और उसमें तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें। तेल जब समुचित रूप से गर्म हो जाए, तब आंच को मीडियम से तेज के बीच रखें और बेली हुई कचौड़ियों को एक-एक करके सावधानी से कढ़ाई में छोड़ें। कचौड़ी जैसे ही तेल की सतह पर तैरने लगे, कलछी से हल्का सा दबाएं ताकि वह पूरी तरह फूल जाए।

कचौड़ी को बीच-बीच में पलटते रहें ताकि दोनों सतहें एक बराबर सिक सकें। जब कचौड़ी दोनों तरफ से हल्की सुनहरी दिखने लगे और उसकी ऊपरी परत खस्ता होकर कुरकुरी हो जाए, तब उसे जालीदार कलछी की मदद से तेल से बाहर निकाल लें। तली हुई कचौड़ियों को किसी जालीदार छलनी या सोख्ता कागज बिछी प्लेट में रखें, जिससे उसका फालतू तेल आसानी से अलग हो जाए। इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बची हुई सभी कचौड़ियों को भी तल लें। इस प्रकार आपकी गरमागरम, हरी-भरी और खस्ता पालक कचौड़ी परोसने के लिए तैयार हो जाएगी।

चटपटी टमाटर की चटनी के साथ करें पेश

पालक की इस कुरकुरी कचौड़ी का असली लुत्फ तभी आता है जब इसे चूल्हे से उतारकर एकदम गरमागरम परोसा जाए। बघेलखंडी खान-पान की परंपरा के अनुसार इसे घर पर बनी तीखी-खट्टी टमाटर की चटनी के साथ खाना सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इसके अलावा स्वाद के शौकीन इसे ताजी हरी मिर्च की तीखी चटनी या रसेदार देसी आलू की सब्जी के साथ भी मजे से खा सकते हैं।

यह नाश्ता सुबह की शुरुआत के लिए जितना मुफीद है, शाम की चाय के साथ भी उतना ही लाजवाब साबित होता है। रोजाना बनने वाली गेहूं की सादी पूड़ी की तुलना में इसका स्वाद एकदम जुदा और ताजगी भरा होता है, जिससे घर के छोटे बच्चे और बुजुर्ग दोनों इसे बेहद पसंद करते हैं। साथ ही आटे में सीधे पालक मिलने से परिवार के भोजन में हरी सब्जियों का पोषण भी चुपके से शामिल हो जाता है। अगर आप भी रसोई में कम वक्त बिताकर कुछ नया, करारा और पारंपरिक देसी स्वाद चखना चाहते हैं, तो इस बार मेथी की जगह पालक की खस्ता कचौड़ी जरूर बनाएं।

सवाल-जवाब

पालक की कचौड़ी बनाने के लिए किन बुनियादी चीजों की जरूरत होती है?
इसके लिए ताजी पालक, दो कप गेहूं का आटा, हरी मिर्च, अदरक, लहसुन, नमक, आधा चम्मच जीरा पाउडर और मोयन व तलने के लिए घी या तेल चाहिए।
पालक का पेस्ट बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पालक को दो-तीन बार साफ पानी से धोकर अतिरिक्त पानी निकाल लें और मिक्सी में मिर्च, अदरक व लहसुन के साथ बिना अतिरिक्त पानी मिलाए गाढ़ा पीसें।
कचौड़ी के आटे में अलग से पानी डालने की जरूरत क्यों नहीं पड़ती?
पालक के पिसे हुए पेस्ट में पहले से पर्याप्त नमी होती है, इसलिए उसी पेस्ट की मदद से आटा आसानी से सख्त और चिकना गूंथ लिया जाता है।
आटा गूंथने के बाद उसे कितनी देर ढककर रखना चाहिए?
आटे को अच्छी तरह गूंथने के बाद लगभग 10 से 15 मिनट के लिए ढककर रखना चाहिए ताकि वह सेट हो जाए और बेलते समय टूटे नहीं।
पालक की कचौड़ी को किस आंच पर तलना चाहिए?
कढ़ाई में तेल गर्म करने के बाद कचौड़ियों को मीडियम से तेज आंच पर हल्का सुनहरा और करारा होने तक तलना चाहिए।
इस कचौड़ी को किस चीज के साथ परोसना सबसे अच्छा माना जाता है?
इसे गरमागरम टमाटर की चटनी, हरी मिर्च की चटनी या आलू की सब्जी के साथ परोसना सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है।
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टिप्पणियाँ 2

Divya Reddy@divya-reddy·44 मिनट पहले

पालक पीसते वक़्त पानी न मिलाने की बात तो ठीक है, पर मिक्सी बिना पानी के चलती ही कहाँ है! थोड़ा सा तो डालना ही पड़ेगा, वरना पेस्ट बनेगा कैसे।

Kavya Nair@kavya-nair·44 मिनट पहले

दिव्या जी, सही कह रही हैं आप! बिना पानी के मिक्सी का जार घूमता ही नहीं है, बस थोड़ा सा छिड़काव ही काफ़ी होता है।

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