भोजन की थाली में अगर एक स्वादिष्ट और तीखी चटनी शामिल हो जाए, तो साधारण खाने का स्वाद भी दोगुना हो जाता है। बिहार के मधुबनी क्षेत्र में चना दाल और इमली के अनोखे मेल से एक बेहद जायकेदार चटनी तैयार की जाती है, जो अपने खास खट्टेपन और सौंधे स्वाद के लिए जानी जाती है। इस रेसिपी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्याज और लहसुन का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाता। केवल 5 मिनट में बनकर तैयार होने वाली यह डिश उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो खट्टा और चटपटा खाना पसंद करते हैं।
स्वाद का जादू और जरूरी सामग्री
घर आए मेहमानों को परोसने के लिए यह चटनी एक नया और लाजवाब विकल्प साबित होती है। इसे एक बार चखने के बाद लोग इसका स्वाद भूल नहीं पाते और अक्सर इसकी रेसिपी पूछने लगते हैं। चटनी बनाने की सूची बेहद छोटी है और इसमें रसोई में नियमित इस्तेमाल होने वाली चीजें ही लगती हैं। इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से इमली और चना दाल की आवश्यकता होती है। इनके अलावा तड़के और फ्लेवर के लिए साबुत जीरा, सूखी लाल मिर्च, स्वादानुसार नमक और अंत में मिलाने के लिए कच्चा सरसों का तेल चाहिए होता है।
बनाने की आसान और पारंपरिक विधि
मधुबनी की रहने वाली अलका इस पारंपरिक चटनी को तैयार करने का सटीक तरीका साझा करती हैं। सबसे पहले चना दाल को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद बिना तेल डाले सूखे तवे पर दाल को धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि उसमें से सोंधी खुशबू न आने लगे। दूसरी तरफ इमली को कुछ देर के लिए हल्के गर्म पानी में भिगोकर रख दें ताकि उसका गूदा और पानी आसानी से अलग हो सके। इसके बाद तवे पर जीरा और सूखी लाल मिर्च को भी सूखा ही रोस्ट कर लें।
जब यह सारी सामग्री भुन जाए, तो इन्हें पीसने की तैयारी करें। भुनी हुई चना दाल, भीगी हुई इमली का पानी, भुना जीरा और सूखी लाल मिर्च को मिक्सी के जार में या पारंपरिक सिलबट्टे पर डालें। इसमें स्वादानुसार नमक मिलाएं और थोड़ा पानी डालते हुए महीन पीस लें। जब चटनी अच्छी तरह पिस जाए, तो इसे एक खुले बर्तन में निकाल लें। अब इसमें ऊपर से थोड़ा सा कच्चा तेल डालकर अच्छी तरह मिला दें। कच्चा तेल मिलते ही चटनी का पारंपरिक तीखापन और सौंधापन पूरी तरह निखर कर सामने आ जाता है।
सर्दियों के खानपान और स्टोरेज के टिप्स
ठंड का मौसम शुरू होते ही इस तरह की चटनियों की मांग घरों में काफी बढ़ जाती है। इसे आप सुबह के नाश्ते में गरमा-गरम पराठे या पूरी के साथ परोस सकते हैं, अथवा दोपहर के भोजन में दाल-चावल के साथ भी इसका आनंद लिया जा सकता है। क्योंकि इस रेसिपी में प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं होता, इसलिए यह जल्दी खराब नहीं होती। सामान्य तापमान पर इसे दो दिनों तक आसानी से खाया जा सकता है। वहीं यदि इसे किसी साफ डिब्बे में बंद करके फ्रिज में रख दिया जाए, तो यह पूरे एक सप्ताह तक एकदम ताजी और खाने योग्य बनी रहती है।



















