मेवाड़ में झाड़ोल और गोगुंदा हाईवे को जोड़ने की तैयारी, केंद्र से मिली वन भूमि उपयोग की सैद्धांतिक मंजूरीईरान संकट पर अमेरिकी चुनाव बाद सैन्य एक्शन चाहते हैं नेतन्याहू, कूटनीति के बीच ट्रंप की दोहरी रणनीतिअमेरिकी मध्यावधि चुनाव में संसद की जंग, जानिए ट्रंप की कुर्सी और सरकार पर क्या पड़ेगा असरश्री संकट मोचन मंदिर के गर्भगृह में घुसा शातिर, चांदी के मुकुट, सोने की नथ और दानपात्र की नकदी समेटकर फरारदिवाली पर जयपुर में स्लीपर बसों का प्रवेश प्रतिबंधित, शहर से 20 किमी दूर बने चार नए बस स्टैंडहाजीपुर के तनिष्क शोरूम में 17 लाख के गहनों की हेराफेरी, फर्जी पेमेंट दिखाने वाला कैशियर गिरफ्तारफतेहपुर में कबूतर का पीछा करते समय 200 फीट गहरे कुएं में गिरा 10 साल का मासूम, 13 घंटे के अभियान के बाद निकाला गया शवमुंबई में शाहरुख खान के 61वें जन्मदिन पर जुटी भारी भीड़, मन्नत पर कड़ा पहरा और नई फिल्म का तोहफासमय पर सुनवाई के बिना अंतिम फैसला बेमानी, सीजेआई सूर्यकांत ने उच्च न्यायालयों की भूमिका पर दिया जोरअयोध्या दीपोत्सव में टूटेगा नया वर्ल्ड रिकॉर्ड, 30 एमएल दीपों और लेजर-ड्रोन शो की तैयारियां शुरू
दक्षिण भारतीय जायके के मुरीदों के लिए राजधानी में मुफीद ठिकाना बना नैवेद्यमखानपान
2 नव॰ 2026, 9:23 am (1 घंटे पहले)· 0

दक्षिण भारतीय जायके के मुरीदों के लिए राजधानी में मुफीद ठिकाना बना नैवेद्यम

दिल्ली के प्रमुख इलाकों में स्थित नैवेद्यम रेस्तरां अपने पारंपरिक साउथ इंडियन व्यंजनों, किफायती दामों और प्रामाणिक स्वाद की बदौलत लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।

देश की राजधानी में प्रामाणिक दक्षिण भारतीय भोजन की तलाश करने वालों को अक्सर वही पारंपरिक स्वाद नहीं मिल पाता, जिसका अनुभव दक्षिण भारत के राज्यों में मिलता है। इडली और सांभर जैसे लोकप्रिय व्यंजनों में जब तक असली मसालों और पारंपरिक विधि का मेल न हो, तब तक खाने का वास्तविक आनंद अधूरा रहता है। राजधानी दिल्ली में खानपान के शौकीनों के लिए नैवेद्यम एक ऐसा लोकप्रिय ठिकाना बनकर उभरा है, जहां पर असली दक्षिण भारतीय पाक कला का अनुभव मिलता है। यही कारण है कि यहां आने वाले ग्राहकों को प्रामाणिक स्वाद का बेजोड़ संगम मिलता है और भोजन प्रेमियों का तांता लगा रहता है।

लंच और डिनर में सीट के लिए करनी पड़ती है प्रतीक्षा

इस रेस्तरां की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली में इसकी छह शाखाएं संचालित हो रही हैं, और हर जगह ग्राहकों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। दोपहर के भोजन यानी लंच और रात के खाने यानी डिनर के समय यहां इतनी भीड़ जुटती है कि खाली मेज मिलना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। लोग इडली, डोसा, सांभर के अलावा विशेष रूप से तैयार उपमा का स्वाद लेने के लिए धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते हैं। माहौल और स्वाद का ऐसा तालमेल अन्य जगहों पर कम ही देखने को मिलता है।

ये भी पढ़ें

मेनू में पारंपरिक व्यंजनों और मिठाइयों की विस्तृत श्रृंखला

खानपान की विविधता की बात करें तो नैवेद्यम की थाली में दक्षिण भारत का समृद्ध जायका सजा मिलता है। यहां सामान्य मसाला डोसा के अलावा मैसूर मसाला डोसा और पेपर मसाला डोसा परोसा जाता है। इसके साथ ही कुरकुरा मेदु वड़ा, मुलायम इडली, उत्तपम, गरमा-गरम सांभर और ताजे नारियल की चटनी ग्राहकों को बेहद पसंद आती है। जो लोग संपूर्ण भोजन की तलाश में होते हैं, उनके लिए विशेष दक्षिण भारतीय थाली, रसम, बिसी बेले भात, लेमन राइस और कर्ड राइस का शानदार विकल्प मौजूद रहता है। भोजन के अंत में परोसी जाने वाली पारंपरिक फिल्टर कॉफी, मैसूर पाक और विभिन्न मिठाइयां भोजन के अनुभव को संपूर्ण बनाती हैं। इसके अलावा भोजन के बाद पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए खास दक्षिण भारतीय पान दिया जाता है, जबकि काउंटर से लोग पारंपरिक लड्डू व मिठाइयां घर ले जाने के लिए भी खरीदते हैं।

पारंपरिक परिवेश और किफायती दामों का बेहतरीन संतुलन

इस रेस्तरां की एक बड़ी खासियत इसकी बेहद किफायती दरें हैं, जिससे सामान्य बजट में भी स्वादिष्ट भोजन का लुत्फ उठाया जा सकता है। सौ रुपये के भीतर कई तरह के व्यंजन उपलब्ध हो जाते हैं, और यदि किसी व्यक्ति की जेब में केवल दो सौ रुपये हों तो वह भरपेट प्रामाणिक भोजन का आनंद ले सकता है। इसके साथ ही रेस्तरां का परिवेश पूरी तरह दक्षिण भारतीय संस्कृति में ढला हुआ है, जहां पारंपरिक तौर-तरीकों के अनुसार स्टील के बर्तनों में भोजन परोसा जाता है। दिल्ली में इसकी पहली शाखा हौज खास में खुली थी, जिसके बाद इसका विस्तार ईस्ट पटेल नगर, आईआईटी दिल्ली परिसर, सुभाष नगर, कनॉट प्लेस और कालकाजी जैसे प्रमुख इलाकों में हुआ।

सवाल-जवाब

दिल्ली में नैवेद्यम की कुल कितनी शाखाएं संचालित हो रही हैं?
दिल्ली में इस रेस्तरां की कुल छह शाखाएं विभिन्न प्रमुख इलाकों में संचालित हो रही हैं।
नैवेद्यम की पहली शाखा किस इलाके में शुरू हुई थी?
इस रेस्तरां की सबसे पहली शाखा दिल्ली के हौज खास इलाके में खोली गई थी।
दिल्ली में नैवेद्यम की शाखाएं किन-किन स्थानों पर मौजूद हैं?
यह रेस्तरां हौज खास, ईस्ट पटेल नगर, आईआईटी दिल्ली, सुभाष नगर, कनॉट प्लेस और कालकाजी में स्थित है।
नैवेद्यम में भरपेट भोजन करने के लिए कितना खर्च आता है?
यहां सौ रुपये के भीतर कई व्यंजन मिल जाते हैं, और दो सौ रुपये में कोई भी व्यक्ति भरपेट भोजन कर सकता है।
नैवेद्यम के मेनू में कौन-कौन से प्रमुख डोसा उपलब्ध हैं?
मेनू में सामान्य मसाला डोसा के अलावा मैसूर मसाला डोसा और पेपर मसाला डोसा शामिल हैं।
चावल और मुख्य भोजन के कौन से विकल्प यहां परोसे जाते हैं?
यहां दक्षिण भारतीय थाली, रसम, बिसी बेले भात, लेमन राइस और कर्ड राइस परोसे जाते हैं।
क्या भोजन के बाद पाचन के लिए भी कोई विशेष व्यवस्था है?
हां, भोजन के बाद पाचन को बेहतर रखने के लिए यहां खास दक्षिण भारतीय पान परोसा जाता है।
रेस्तरां में भोजन किस प्रकार के बर्तनों में दिया जाता है?
पारंपरिक दक्षिण भारतीय शैली का पालन करते हुए भोजन स्टील के बर्तनों में परोसा जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp