जीवन में कभी-कभी अचानक आने वाली परेशानियां पूरे बने-बनाए ढर्रे को बदल देती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो किसी भी मोड़ से नई शुरुआत की जा सकती है। महाराष्ट्र के पुणे शहर में सालों तक अपने दक्षिण भारतीय व्यंजनों का डंका बजाने वाले एक दंपती के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वर्षों की कड़ी मेहनत से स्थापित किया गया कारोबार जब एक झटके में बंद करना पड़ा, तो उन्होंने निराश बैठने के बजाय अपने गृह क्षेत्र लौटकर नए सिरे से जिंदगी की शुरुआत करने की ठानी। मध्य प्रदेश के खंडवा में अब यह जोड़ी बेहद किफायती दरों पर लोगों को प्रामाणिक दक्षिण भारतीय भोजन का स्वाद चखा रही है और उनकी यह जुझारू कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है।
पुणे में चलता था शानदार काम, रोजाना 22 हजार की थी बिक्री
संजय सोनी और उनकी पत्नी खुशबू सोनी खान-पान के व्यवसाय में कोई नौसिखिए नहीं हैं। महाराष्ट्र के पुणे में वे पिछले करीब 8 वर्षों से दक्षिण भारतीय खाने का स्टॉल सफलतापूर्वक चला रहे थे। उनके हाथ के बने पारंपरिक डोसा, इडली, सांभर और अन्य व्यंजनों की मांग इतनी अधिक थी कि ग्राहकों की कतारें लगी रहती थीं। आर्थिक रूप से यह व्यवसाय बेहद मजबूत स्थिति में था, जहां प्रतिदिन की कुल बिक्री लगभग 20 हजार से 22 हजार रुपये तक पहुंच जाती थी। सालों की लगन से उन्होंने पुणे के खान-पान बाजार में अपनी एक मजबूत साख कायम कर ली थी और सब कुछ बेहद सुचारू रूप से चल रहा था।
मेट्रो निर्माण परियोजना के कारण समेटना पड़ा जमा-जमाया काम
पुणे में इतना शानदार व्यवसाय चलने के बाद भी हालात ने अचानक अप्रत्याशित करवट ली। शहर में बड़े पैमाने पर मेट्रो रेल का निर्माण कार्य शुरू हुआ, जिसकी जद में वह इलाका भी आ गया जहां संजय सोनी का फूड आउटलेट मौजूद था। विकास कार्यों और सड़क चौड़ीकरण के चलते प्रशासन द्वारा उस पूरे क्षेत्र से दुकानें और स्टॉल हटा दिए गए। इस अचानक आई रुकावट से उनका रोजमर्रा का चलता हुआ काम पूरी तरह ठप हो गया। कई हफ्तों और महीनों की अनिश्चितता के बाद जब वहां दोबारा काम शुरू होने की कोई गुंजाइश नहीं बची, तो मजबूरी में उन्हें पुणे का पूरा सेटअप समेटना पड़ा और वहां से वापस लौटने का एक बेहद कठिन फैसला लेना पड़ा।
अपनों के बीच खंडवा आकर नई राह बनाने का फैसला
पुणे का कारोबार बंद होने के बाद परिवार ने खंडवा की राह पकड़ी। खुशबू सोनी मूल रूप से खंडवा की ही रहने वाली हैं और उनका मायका इसी शहर में है। इसके अलावा संजय सोनी के अपने परिवार के सदस्य और रिश्तेदार भी यहीं रहते हैं। संजय के मन में पिछले करीब चार वर्षों से यह विचार चल रहा था कि अपने शहर और अपनों के बीच रहकर कोई उद्यम शुरू किया जाए। जब पुणे का काम प्रभावित हुआ, तो उन्होंने इसे एक अवसर के रूप में देखा और परिवार के निकट रहकर अपनी नई कामकाजी पारी की रूपरेखा तैयार की।
नौकरी छोड़ पति के साथ खड़ी हुईं खुशबू, खुला नया आउटलेट
संजय जब खंडवा में जमीन से जुड़कर नए काम की तैयारी कर रहे थे, तो उनकी पत्नी खुशबू ने भी एक बड़ा फैसला लिया। खुशबू पहले एक जगह नौकरी करती थीं, लेकिन पति के नए सफर को गति देने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर मेहनत करने का संकल्प लिया। करीब एक सप्ताह पहले उन्होंने खंडवा के व्यस्त इंदिरा चौक पर ‘साउथ तड़का महाराष्ट्र’ नाम से अपने नए फूड आउटलेट का शुभारंभ किया।
रसोई और प्रबंधन का बेहतरीन तालमेल
इस नए आउटलेट पर दोनों पति-पत्नी के बीच जिम्मेदारियों का बहुत ही व्यवस्थित बंटवारा दिखता है। संजय सोनी पूरी तरह से रसोई की कमान संभालते हैं। वे गर्म तवे पर पारंपरिक दक्षिण भारतीय मसालों के साथ डोसा, इडली और सांभर तैयार करते हैं। दूसरी तरफ, खुशबू सोनी ग्राहकों के स्वागत, ऑर्डर लेने, बिलिंग और आउटलेट के संपूर्ण प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालती हैं। दोनों की यह साझा मेहनत और आपसी तालमेल बाजार में आने वाले हर शख्स को आकर्षित कर रहा है और स्थानीय स्तर पर उनके समर्पण की सराहना हो रही है।
40 रुपये में सादा डोसा और 50 रुपये में मसाला डोसा
‘साउथ तड़का महाराष्ट्र’ की सबसे बड़ी खासियत इसका उम्दा स्वाद और आम आदमी की जेब के अनुकूल तय की गई कीमतें हैं। महंगाई के इस दौर में भी यहां सादा डोसा केवल 40 रुपये में परोसा जा रहा है, जबकि मसाला डोसा की कीमत मात्र 50 रुपये रखी गई है। संजय सोनी का कहना है कि वे अपने 8 साल के पुणे वाले अनुभव का पूरा लाभ खंडवा के लोगों को दे रहे हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ डोसा बेचना नहीं, बल्कि एक ही छत के नीचे इडली, सांभर और डोसा जैसे पारंपरिक व्यंजनों की शुद्धता और असली स्वाद बेहद किफायती दामों में उपलब्ध कराना है ताकि ग्राहक स्वाद के दम पर बार-बार खिंचे चले आएं।


















