भारतीय खानपान में अचार का एक विशेष स्थान है, और भोजन की थाली में हरी मिर्च का चटपटा अचार मौजूद हो तो साधारण दाल-चावल, पराठे या खिचड़ी का स्वाद भी कई गुना बढ़ जाता है। अधिकांश घरों में लोग बाजार से डिब्बाबंद मिर्च का अचार खरीदकर लाते हैं, क्योंकि घर पर बनाने के दौरान अक्सर नमी या गलत विधि के कारण अचार जल्दी खराब या फफूंदग्रस्त हो जाता है। अगर सही अनुपात में मसाले, तेल और मिर्च का उपयोग किया जाए, तो यह पारंपरिक तीखा अचार कुछ ही मिनटों की तैयारी में बन सकता है और महीनों तक बिना खराब हुए खाने योग्य बना रहता है। इस संपूर्ण विधि में मिर्च की सही किस्म चुनने से लेकर मसालों के संतुलन और भंडारण की बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है।
सही हरी मिर्च का चुनाव और जरूरी सावधानी
अचार की लंबी उम्र और उसका तीखापन पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस प्रकार की हरी मिर्च चुनी है। अचार तैयार करने के लिए हमेशा पतली और गहरे हरे रंग की ताजी मिर्च का ही चयन करना चाहिए। गहरे हरे रंग की मिर्च न केवल अधिक चटपटी और तीखी होती है, बल्कि इसका छिलका सख्त होने के कारण यह जल्दी गलती नहीं है और लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। इसके विपरीत, हल्के पीले या हल्के हरे रंग की मोटी मिर्च में तीखापन काफी कम होता है और पानी की अधिक मात्रा होने के कारण उसका अचार बहुत जल्दी सड़ जाता है या स्वाद खो देता है।
मिर्च को बाजार से लाने के बाद उसे दो से तीन बार साफ और ताजे पानी से अच्छी तरह धोना आवश्यक है। धोने के बाद प्रत्येक मिर्च को एक साफ सूती कपड़े से पोंछकर पूरी तरह सुखा लें। इसके बाद इसे थोड़ी देर पंखे की हवा में फैलाकर रखें ताकि उसके छिलके पर मौजूद नमी की आखिरी बूंद भी सूख जाए। अचार में फफूंद लगने का सबसे मुख्य कारण पानी या नमी की मौजूदगी ही होती है, इसलिए मिर्च का पूरी तरह सूखा होना अनिवार्य शर्त है। सूखने के बाद मिर्च के ऊपरी डंठल को तोड़कर अलग कर दें, क्योंकि डंठल वाले हिस्से में नमी जल्दी रुकती है और सड़न की शुरुआत वहीं से होती है। मिर्च काटते समय हाथों में जलन से बचने के लिए हथेलियों पर थोड़ा सा सरसों का तेल लगा लें या साफ दस्ताने पहन लें। फिर चाकू अथवा कैंची की सहायता से मिर्च को बीच से चीरा लगाकर दो टुकड़ों में काट लें, और यदि मिर्च की लंबाई बहुत अधिक हो तो उसे चार टुकड़ों में विभाजित किया जा सकता है।
मसालों की भुनाई और सुगंधित मिश्रण की तैयारी
हरी मिर्च के अचार को स्वादिष्ट और पाचक बनाने के लिए साबुत मसालों का सही संतुलन बहुत मायने रखता है। इसके लिए राई, सौंफ, मेथी दाना और एक चम्मच जीरा की आवश्यकता होती है। इन सभी साबुत खड़े मसालों को एक तवे पर धीमी आंच पर लगभग तीन से चार मिनट तक हल्का भून लें। मसालों को भूनने का मुख्य उद्देश्य उनकी प्राकृतिक नमी को पूरी तरह खत्म करना और उनके प्राकृतिक तेलों की सुगंध को सक्रिय करना होता है। भूनते समय ध्यान रखें कि मसाले जलने न पाएं, केवल हल्की खुशबू आने तक ही उन्हें गर्म करना है। इसके बाद भुने हुए मसालों को ठंडा करके मिक्सी में दरदरा पीस लें, क्योंकि दरदरा पिसा मसाला मिर्च के अंदर अच्छे से लिपटता है और खाने में बेहतरीन स्वाद देता है।
इसके बाद अन्य सूखे मसालों को तैयार किया जाता है। एक अलग बर्तन में दो चम्मच नमक, एक छोटा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर, आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, एक छोटा चम्मच कलौंजी (मंगरैल) और एक छोटा चम्मच राई दाल निकाल लें। ध्यान देने योग्य बात यह है कि कलौंजी को कभी भी तवे पर भूना या मिक्सी में पीसा नहीं जाता, इसे हमेशा साबुत ही कच्चे रूप में ऊपर से मिलाया जाता है। अचार की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में नमक एक प्राकृतिक संरक्षक के रूप में काम करता है, इसलिए अचार बनाते समय नमक की मात्रा सामान्य भोजन की तुलना में थोड़ी अधिक ही रखनी चाहिए, जिससे बैक्टीरिया नहीं पनपते।
तेल पकाने की विधि और सभी सामग्रियों का संयोजन
यदि आप 250 ग्राम हरी मिर्च का अचार बना रहे हैं, तो इसके लिए एक कड़ाही में आधा कप यानी लगभग 120 मिलीलीटर शुद्ध सरसों का तेल गर्म करने के लिए रखें। सरसों के तेल को तब तक तेज आंच पर गर्म करना चाहिए जब तक कि उसमें से हल्का धुआं न निकलने लगे और तेल का तीखापन व पीला रंग थोड़ा हल्का न हो जाए। तेल से धुआं उठने के तुरंत बाद गैस बंद कर दें और तेल को पूरी तरह से सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें। गर्म तेल को सीधे मिर्च या मसालों पर डालने से मिर्च का कुरकुरापन खत्म हो जाता है और मसाले जल सकते हैं।
अब एक बड़े और सूखे बर्तन में कटी हुई हरी मिर्च लें और उसमें मिक्सी में तैयार किया गया दरदरा मसाला पाउडर डालें। इसके साथ ही हल्दी, कलौंजी, कश्मीरी लाल मिर्च, राई दाल, नमक और चुटकी भर हींग अच्छी तरह मिलाएं। मसालों के बाद इसमें पांच चम्मच सफेद सिरका (व्हाइट विनेगर) डालें। सफेद सिरका अचार को खट्टा और चटपटा स्वाद देने के साथ-साथ मिर्च के अत्यधिक तीखेपन को संतुलित करता है और प्रिजर्वेटिव का काम करके फंगस से बचाता है। यदि घर पर सिरका उपलब्ध न हो, तो इसके विकल्प के रूप में चार ताजे नीबू का रस निचोड़कर मिलाया जा सकता है। अंत में ठंडा किया हुआ सरसों का तेल डालकर चम्मच की सहायता से सभी सामग्रियों को आपस में तब तक मिलाएं जब तक कि प्रत्येक मिर्च के टुकड़े पर मसालों और तेल की एक समान परत न चढ़ जाए।
लंबे समय तक सुरक्षित रखने और भंडारण के विशेष नियम
मसालों और तेल को मिलाने के बाद अचार को दो से तीन दिन तक किसी जालीदार कपड़े से ढककर हल्की धूप दिखाएं। धूप में रखने से तेल और मसाले मिर्च के रेशों के भीतर अच्छी तरह समा जाते हैं और अचार का स्वाद निखर जाता है। अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसे हमेशा साफ कांच के जार में ही रखना चाहिए, क्योंकि प्लास्टिक या धातु के बर्तनों में सिरके और खटास के कारण रासायनिक प्रतिक्रिया होने का डर रहता है। जार का उपयोग करने से पहले उसे उबलते गर्म पानी से धोकर धूप में अच्छी तरह सुखा लें, ताकि उसमें नमी का लेशमात्र भी न रहे।
अचार को सालोंसाल सुरक्षित रखने और उसमें एक पारंपरिक सोंधी खुशबू पैदा करने के लिए एक प्राचीन घरेलू उपाय अपनाया जा सकता है। इसके लिए लकड़ी के कोयले के एक छोटे टुकड़े को गैस की आंच पर रखकर तब तक सुलगाएं जब तक वह लाल न हो जाए। इसके बाद उस दहकते कोयले को एक सूखी प्लेट पर रखें और उसके ऊपर थोड़ी सी हींग छिड़क दें। जैसे ही हींग से गाढ़ा धुआं उठने लगे, कांच के सूखे जार को तुरंत उस धुएं के ऊपर उल्टा करके रख दें। कुछ ही पलों में पूरा जार हींग के सुगंधित धुएं से भर जाएगा और पूरी तरह विसंक्रमित हो जाएगा। इसके बाद जार को सीधा करके उसमें तैयार हरी मिर्च का अचार भर दें और ढक्कन कसकर बंद कर दें। इस विधि से तैयार किया गया अचार न केवल बेहद जायकेदार बनता है, बल्कि सालोंसाल खराब हुए बिना अपनी ताजगी बनाए रखता है।



















