पारंपरिक खानपान में अक्सर मीठे के साथ किसी तीखे और चटपटे स्वाद की तलाश रहती है। जब थाली में चूड़ा और दही परोसा जाता है, तब मिठास के संतुलन के लिए तीखे नमकीन का मेल बेहद पसंद किया जाता है। मिथिलांचल के इलाकों में ऐसे मौके पर काले तिल की विशेष चटनी बनाई जाती है। यह देहाती व्यंजन स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ लंबे समय तक सुरक्षित भी रहता है। यदि इसे सिलबट्टे पर ताजा पीसा जाए तो यह 5 से 7 दिनों तक चलती है, जबकि ओखली या मूसल में कूटकर सूखी बनाई गई चटनी पूरे एक महीने तक खराब नहीं होती है।
दादी-नानी के दौर का स्वाद और तैयारी
मिथिला क्षेत्र में चूड़ा और दही का सेवन दैनिक भोजन और खास पर्वों दोनों में बहुत चाव से किया जाता है, जिसके साथ काले तिल की यह चटनी अनिवार्य मानी जाती है। पारंपरिक रसोई में दादी-नानी के जमाने से चले आ रहे इस तरीके को वीणा देवी ने विस्तार से साझा किया है। उनके अनुसार तिल की चटनी तैयार करने की मुख्य रूप से दो विधियां हैं। पहली विधि सिलबट्टे अथवा मिक्सी में पानी या नमी के साथ पीसने की है, जबकि दूसरी विधि सूखा भूनकर कूटने की होती है। इन दोनों ही प्रक्रियाओं में सबसे बुनियादी कदम तिल को सही ढंग से भूनना होता है।
सिलबट्टे और मिक्सी वाली गीली चटनी की विधि
ताजी चटनी बनाने के लिए सबसे पहले काले तिल को कड़ाही में डालकर अच्छी तरह रोस्ट किया जाता है। तिल के भीतर प्राकृतिक रूप से तेल की भरपूर मात्रा पाई जाती है, इसलिए भूनते समय किसी अतिरिक्त तेल की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि बेहतर स्वाद के शौकीन लोग ऊपर से एक चम्मच सरसों का तेल मिलाना पसंद करते हैं। काले तिल का यह मिश्रण हड्डियों और संपूर्ण शरीर के लिए अत्यंत गुणकारी माना जाता है। भूनने के बाद तिल को सामान्य तापमान पर ठंडा किया जाता है।
यदि चटनी को 4 से 5 दिनों के भीतर खाकर समाप्त करना हो, तो भुने हुए तिल को मिक्सर जार या सिलबट्टे पर रखा जाता है। इसमें ताजी हरी मिर्च, छीला हुआ लहसुन, अदरक का छोटा टुकड़ा और स्वादानुसार सादा नमक मिलाया जाता है। इन सभी सामग्रियों को एक साथ महीन पीस लिया जाता है। पिसाई पूरी होने के बाद इसमें आधा चम्मच कच्चा सरसों का तेल मिलाया जाता है। पारंपरिक सिलबट्टे की पिसाई और आधुनिक मिक्सी के स्वाद में थोड़ा अंतर अवश्य महसूस होता है, लेकिन सुविधा के अनुसार किसी भी साधन का उपयोग किया जा सकता है।
महीने भर चलने वाली सूखी चटनी या अचार
लंबे समय तक भंडारण के लिए सूखी चटनी तैयार करने का नियम बिल्कुल अलग होता है। यह सूखा मिश्रण अथवा देहाती अचार 20 दिनों से लेकर एक महीने तक सुरक्षित रहता है। इसे बनाने के लिए भुने हुए तिल को मूसल या मिक्सर में केवल नमक, हरी मिर्च और अदरक के साथ सूखा ही पीसा जाता है। इसमें पानी की एक बूंद भी नहीं डाली जाती। पिसने के बाद इसमें थोड़ा सा सरसों का तेल अच्छी तरह मिला दिया जाता है। इस तैयार मिश्रण को साफ और सूखे कांच के जार में भरकर 15 दिन, 20 दिन या एक महीने तक आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान देने योग्य सबसे अहम बात यह है कि यदि इसमें लहसुन डाल दिया जाए, तो यह नमी पकड़ लेती है और केवल दो से तीन दिनों तक ही टिक पाती है।



















