रसोई में भोजन तैयार करते समय कई बार अंदाज चूक जाने से दाल, सब्जी या तरीदार व्यंजनों में मिर्च की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है। ऐसी स्थिति में तैयार भोजन इतना तीखा हो जाता है कि उसका सामान्य रूप से सेवन करना लगभग नामुमकिन लगने लगता है। खाने का जायका बिगड़ने पर पूरी मेहनत बेकार लगने लगती है, लेकिन परेशान होने के बजाय रसोई में मौजूद रोजमर्रा की चीजों का सही इस्तेमाल करके इस तीखेपन को बेहद सरलता से संतुलित किया जा सकता है। कुछ बुनियादी और आज़माए हुए तरीके भोजन के असली स्वाद को नुकसान पहुँचाए बिना उसकी तीक्ष्णता को सामान्य स्तर पर ले आते हैं।
डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल कर कम करें तीखापन
अगर तरी वाली सब्जी, दाल या किसी ग्रेवी में मिर्च का तीखापन बहुत तेज हो चुका है, तो उसमें थोड़ी मात्रा में ताजा दही, फेंटा हुआ मलाई या फ्रेश क्रीम शामिल कर दें। दूध से बने उत्पाद तीखेपन के तीखे असर को शांत करने और स्वाद का संतुलन बैठाने में बेहद असरदार साबित होते हैं। इन चीजों को मिलाने से व्यंजन को एक रिच और मखमली क्रीमी टेक्सचर भी मिल जाता है, जिससे खाने का स्वाद पहले से भी अधिक लजीज लगने लगता है।
उबले आलू से सोखें अतिरिक्त मिर्च और मसाले
आलू किसी भी डिश में मौजूद अतिरिक्त तीखेपन और मसालों के भारी असर को तेजी से खींचने की स्वाभाविक क्षमता रखता है। ग्रेवी में मिर्च अधिक होने की दशा में उसमें एक या दो साबुत उबले आलू डालकर धीमी आंच पर कुछ मिनटों के लिए पकने दें। जब आलू अतिरिक्त तीखापन अपने भीतर सोख लें, तब आप चाहें तो उन्हें बाहर निकाल सकते हैं या फिर ग्रेवी को गाढ़ा बनाने के लिए उसी में अच्छी तरह मैश कर सकते हैं।
मिठास और खटास के सही तालमेल से लाएं संतुलन
ज्यादा मिर्च वाले खाने में चुटकी भर चीनी, थोड़ा सा गुड़ या शहद की कुछ बूंदें मिला देने से तीखे स्वाद का भारीपन तुरंत दब जाता है। मिठास मिलाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उसकी मात्रा बहुत कम रहे, ताकि खाना मीठा न बन जाए बल्कि सिर्फ मिर्च का तीखापन संतुलित हो सके। इसी तरह थोड़ा सा ताजा नींबू का रस मिलाना भी काफी फायदेमंद रहता है। नींबू की प्राकृतिक खटास मिर्च के तेज असर को काटती है और व्यंजन को एक ताजगी भरा स्वाद देती है।
टमाटर की प्यूरी या भुने प्याज से बढ़ाएं ग्रेवी
अगर ग्रेवी वाली रेसिपी में मिर्च का अनुपात बिगड़ गया है, तो उसमें भुने हुए प्याज का पेस्ट या अतिरिक्त टमाटर की प्यूरी पकाकर मिलाई जा सकती है। ऐसा करने से ग्रेवी की कुल मात्रा बढ़ जाती है, जिससे प्रति सर्विंग मिर्च का फैलाव हल्का पड़ जाता है और भोजन खाते समय तीखापन काफी कम महसूस होता है।
नारियल का दूध और पेस्ट आएगा काम
दक्षिण भारतीय पकवानों, स्ट्यू या खास तरह की करी में यदि मिर्च जरूरत से ज्यादा तेज हो जाए, तो नारियल का दूध या नारियल का बारीक पेस्ट मिलाना सबसे मुफीद उपाय माना जाता है। नारियल की प्राकृतिक हल्की मिठास और गाढ़ा क्रीमी टेक्सचर मिर्च की तेजी को आसानी से शांत कर देता है और व्यंजन की बनावट को भी निखारता है।
देसी घी, मक्खन और सादी ग्रेवी का अचूक उपाय
दाल या करी में मिर्च तेज होने पर अंत में थोड़ा सा देसी घी या ताजा मक्खन डालना बेहद असरदार तरीका है। घी और मक्खन चिकनाई पैदा करके मिर्च की चुभन को दबाते हैं और भोजन की खुशबू को भी बढ़ा देते हैं। यदि संभव हो, तो उसी व्यंजन की बिना किसी मिर्च वाली थोड़ी अतिरिक्त ग्रेवी अलग से तैयार करके मुख्य डिश में मिला दें। यह मिर्च की अधिकता को पूरी तरह सामान्य करने का सबसे प्रभावी और अचूक तरीका साबित होता है, जिससे डिश का मूल स्वाद बिल्कुल सुरक्षित रहता है।



















