तेलंगाना के समृद्ध पाक इतिहास में कई ऐसे पारंपरिक व्यंजन हैं, जिनका जायका सदियों से लोगों के दिलों पर छाया हुआ है। इसी समृद्ध परंपरा का एक प्रमुख हिस्सा है 'बेल्लम जीडीलु', जिसे आम बोलचाल में गुड़ और तिल से तैयार की जाने वाली देसी टॉफी या कैंडी माना जाता है। किसी समय में यह केवल ग्रामीण इलाकों, गांव के मेलों, लोक जातरों और छोटे त्योहारों तक ही सीमित रहती थी। हालांकि, बदलते वक्त के साथ इस प्रामाणिक मिठाई ने बड़े शहरों का रुख कर लिया है और अब हैदराबाद समेत पूरे तेलंगाना के बड़े शादी-समारोहों तथा भव्य सांस्कृतिक आयोजनों में यह आकर्षण का केंद्र बन चुकी है।
हाथों की अनोखी कारीगरी और जटिल निर्माण प्रक्रिया
बेल्लम जीडीलु को तैयार करने की विधि जितनी प्राचीन है, इसे आंखों के सामने बनते देखना उतना ही दिलचस्प और अद्भुत अनुभव होता है। इस खास मिठाई को बनाने के लिए किसी आधुनिक मशीन का प्रयोग नहीं किया जाता, बल्कि यह पूरी तरह से कुशल कारीगरों के हाथों के अनुभव और सधे हुए हुनर पर निर्भर करती है। इसकी निर्माण प्रक्रिया की शुरुआत उत्तम गुणवत्ता वाले शुद्ध गुड़ को पानी के साथ बड़ी कड़ाही में रखकर उबालने से होती है। गुड़ के घोल को तब तक आँच पर पकाया जाता है जब तक कि यह एक विशेष रूप से कड़क और गाढ़ी चाशनी का रूप धारण न कर ले। इस चाशनी के सही तापमान और गाढ़ेपन की सटीक पहचान ही मिठाई के बेहतरीन स्वाद और बनावट की असली नींव होती है।
जब चाशनी पककर तैयार हो जाती है और हल्की ठंडी होकर लचीली अवस्था में आती है, तब इसे एक मजबूत लोहे के हुक पर टांग दिया जाता है। इसके बाद कारीगर अपनी दोनों भुजाओं का जोर लगाकर इसे बार-बार खींचते, घुमाते और मोड़ते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान गुड़ की चाशनी लगातार हवा के संपर्क में आती है। इसके परिणामस्वरूप, गहरे भूरे रंग का गुड़ धीरे-धीरे अपना रंग बदलकर एक रेशमी चमक वाले सुनहरे धागों जैसे लचीले ढांचे में परिवर्तित हो जाता है। इसके पश्चात, इस सुनहरे रोल को बेलनाकार रूप देकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। कटाई के तुरंत बाद इन गरम टुकड़ों पर भुने हुए सफेद तिल की एक मोटी परत लपेटी जाती है। तिल की यह कोटिंग न केवल इन कैंडी के टुकड़ों को आपस में चिपकने से रोकती है, बल्कि हर निवाले में एक अद्भुत कुरकुरापन भी जोड़ती है।
सेहत के लिए वरदान: बिना केमिकल की शुद्ध देसी एनर्जी
आज के दौर में बाजार में मिलने वाली कृत्रिम मिठास, सिंथेटिक टॉफियों और केमिकलयुक्त मिठाइयों की तुलना में बेल्लम जीडीलु पूरी तरह से प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। इस मिठाई को तैयार करने में किसी भी प्रकार के प्रिजर्वेटिव या कृत्रिम रंग का इस्तेमाल नहीं होता; इसमें केवल शुद्ध गुड़ और भुने हुए तिल शामिल होते हैं। पोषण के दृष्टिकोण से, गुड़ और तिल का यह मिश्रण शरीर को प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक आयरन, कैल्शियम और तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग भी इसे बिना किसी हििचक के पसंद कर रहे हैं।
शादियों में लाइव स्टॉल का नया सांस्कृतिक ट्रेंड
आजकल तेलंगाना और हैदराबाद में आयोजित होने वाले पारंपरिक थीम आधारित विवाह समारोहों और सांस्कृतिक मेलों में बेल्लम जीडीलु के लाइव स्टॉल लगाना एक नया और तेजी से लोकप्रिय होता ट्रेंड बन चुका है। मेहमानों के सामने ही कारीगरों द्वारा गर्म चाशनी को हुक पर खींचकर ताजी कैंडी तैयार करने का यह नज़ारा बेहद आकर्षक लगता है। यह जीवंत प्रदर्शन न केवल शादी में आए अतिथियों का मनोरंजन करता है, बल्कि शहरी माहौल में पली-बढ़ी नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक खान-पान की जड़ों से दोबारा जोड़ने का एक बेहतरीन माध्यम भी साबित हो रहा है।



















