झारखंड की राजधानी रांची में कथित मवेशी तस्करी को लेकर भड़की हिंसा और वाहन में आगजनी के बाद अब पूरे राज्य में सियासी तकरार तेज हो गई है। कानून व्यवस्था और पुलिसिया जांच के बीच राजनीतिक दलों के बयानों ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। सात बार के बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने इस पूरी घटना के बाद सार्वजनिक तौर पर कई तीखे आरोप लगाए, जिससे विवाद और ज्यादा गहरा गया है। उन्होंने दावा किया कि राजधानी के मुस्लिम होटलों में बीफ बिरयानी परोसी जाती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब भी वह किसी मुस्लिम होटल के सामने से निकलते हैं तो अपनी गाड़ी के शीशे बंद कर लेते हैं। बीजेपी विधायक ने यह आरोप भी लगाया कि बकरीद के पर्व पर बकरे की जगह गायों की कुर्बानी दी जाती है। उन्होंने मांग की कि पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में गो हत्या के खिलाफ बनाए गए कड़े नियमों को राज्य भर में पूरी मुस्तैदी से अमल में लाया जाए।
पिस्का मोड़ पर वाहन फूंके जाने के बाद कैसे गरमाया माहौल
इस पूरे राजनीतिक विवाद की जड़ें दो दिन पहले रांची के पिस्का मोड़ क्षेत्र में घटी एक घटना से जुड़ी हैं। इलाके में कथित तौर पर मवेशियों की अवैध तस्करी की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए और उग्र भीड़ ने मवेशियों को ले जा रहे वाहन में आग लगा दी। इस मामले में पुलिस प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कार्रवाई शुरू की। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वाहन मालिक समेत नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि जब तक पुलिस बल मौके पर पहुंचता, तब तक वहां भारी जमावड़ा हो चुका था। इसी हिंसक घटना की पृष्ठभूमि में विधायक सीपी सिंह ने गोवंश संरक्षण, गोमांस की कथित बिक्री और खान-पान के ठिकानों को लेकर अपनी बात रखी, जिसने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी।
बीजेपी विधायक के दावों पर कांग्रेस का पलटवार और चंदे का आरोप
सीपी सिंह के बयानों पर मुख्य विपक्षी खेमे और सत्तारूढ़ गठबंधन की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता एम तौसीफ ने बीजेपी नेता के आरोपों को पूरी तरह तथ्यहीन करार दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी विधायक जमीनी हकीकत और धार्मिक परंपराओं की सही जानकारी के बिना बयानबाजी कर रहे हैं। तौसीफ ने स्पष्ट किया कि बकरीद के मौके पर केवल बकरों की ही कुर्बानी दी जाती है, गायों की नहीं। इसके साथ ही कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी पर ही सीधा हमला बोलते हुए गोमांस के वैश्विक कारोबार और राजनीतिक चंदे के कथित गठजोड़ का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि गोमांस निर्यात कारोबार से जुड़ी अलाना ग्रुप कंपनी की तरफ से बीजेपी को 30 करोड़ रुपये का चुनावी चंदा दिया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने चिंता जताई कि इस प्रकार की बयानबाजी से राजधानी के शांतिपूर्ण माहौल, आपसी विश्वास और सामाजिक सद्भाव को गहरा नुकसान पहुंच सकता है।
जेएमएम ने मांगा सबूत, पूछा- अगर जानकारी है तो पुलिस को क्यों नहीं बताते
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भी बीजेपी विधायक की बयानबाजी पर कड़ा ऐतराज जताया है और उनसे सीधे प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करने को कहा है। जेएमएम केंद्रीय समिति के सदस्य अंतु तिर्की ने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को प्रतिबंधित मांस की बिक्री या गो हत्या के ठिकानों की पुख्ता जानकारी है, तो उन्हें बयानबाजी करने के बजाय फौरन जिला प्रशासन और पुलिस को सूचित करना चाहिए। तिर्की ने याद दिलाया कि झारखंड में गोवंश की हत्या, मांस की बिक्री और अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए पहले से ही सख्त कानूनी प्रावधान लागू हैं। राज्य में वर्ष 2005 का कानून लागू है, जो गोवंश की हत्या को पूरी तरह गैरकानूनी ठहराता है। इस कानून के तहत गोमांस रखने, परिवहन करने और बेचने पर स्पष्ट पाबंदी है तथा नियमों की अनदेखी करने वालों के लिए कठोर कारावास और जुर्माने की सजा तय की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा सरकार को इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने लगाया सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप
धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इस पूरे प्रकरण पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। एदार ए शरिया के अध्यक्ष कुतुबुद्दीन रिजवी ने सीपी सिंह के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसे बयानों के जरिए सियासी लाभ हासिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि शहर के किसी हिस्से में अवैध मांस या गो हत्या की गतिविधि चल रही है, तो उसकी लिखित शिकायत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पूरे समाज के खान-पान के ठिकानों को एक चश्मे से देखना और 'मुस्लिम होटल' का नाम लेकर टिप्पणी करना सीधे तौर पर एक समुदाय को निशाना बनाने की साजिश है, जिससे शहर का भाईचारा दरक सकता है। कुतुबुद्दीन रिजवी ने बीफ निर्यात करने वाली बड़ी कंपनियों के अरबी नामों के संदर्भ में भी राजनीतिक जवाब देते हुए बीजेपी की मंशा पर सवाल खड़े किए। इसी तरह रातू मुस्लिम महापंचायत के सदर कमरुल हक रिजवी ने भी विधायक के बयान पर गहरी आपत्ति जताते हुए समाज में शांति बनाए रखने की अपील की।
कानून व्यवस्था और राजनीतिक विमर्श के दोराहे पर रांची
रांची में हालिया घटनाक्रम अब दो अलग-अलग स्तरों पर फैल चुका है। पहला स्तर पूरी तरह से प्रशासनिक और कानूनी है, जहां पिस्का मोड़ पर वाहन फूंके जाने और अवैध पशु परिवहन के आरोपों में पुलिस जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं दूसरा स्तर पूरी तरह राजनीतिक विमर्श का बन चुका है, जहां गो रक्षा, पुराने कानूनों के क्रियान्वयन, खाद्य संस्कृति और चुनावी ध्रुवीकरण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। आने वाले समय में रांची का माहौल इस बात पर निर्भर करेगा कि जिला प्रशासन मवेशी तस्करी और हिंसा पर क्या ठोस कदम उठाता है और सियासी दल इस संवेदनशील विषय को कितना आगे बढ़ाते हैं।























