भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मामले में एक नया और अहम मोड़ सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल केस में मुख्य आरोपी और मृतका की सास गिरिबाला सिंह ने कानूनी राहत पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनके बचाव पक्ष के वकील की तरफ से भोपाल के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव की अदालत में एक विस्तृत जमानत याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई की उचित व्यवस्था बनाने के मकसद से, अदालत ने शुरुआत में इसे दो अलग-अलग महिला जजों की कोर्ट में ट्रांसफर किया था। हालांकि, कानूनी और प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए दोनों ही महिला न्यायाधीशों ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया और खुद को केस से पूरी तरह अलग कर लिया। इसी दौरान, अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को पूरे मामले की केस डायरी जमा करने का सख्त आदेश भी दिया था। इस निर्देश का तुरंत पालन करते हुए जांच एजेंसी ने अदालत के सामने सभी जरूरी दस्तावेज पेश कर दिए हैं।
सीबीआई विशेष अदालत में ट्रांसफर और नई तारीख
महिला जजों के इस महत्वपूर्ण केस से हटने के बाद, कानूनी प्रक्रिया में थोड़ा बदलाव देखने को मिला। जमानत याचिका को आगे की सुनवाई के लिए तुरंत विशेष सीबीआई अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया। लेकिन यहां भी आरोपी पक्ष को तत्काल कोई राहत नहीं मिल सकी और मामले में एक और रुकावट आ गई। दरअसल, जिस दिन मामले की सुनवाई होनी थी, उस दिन सीबीआई स्पेशल कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश छुट्टी पर थे। अदालत परिसर में पहले यह चर्चा थी कि आरोपी पक्ष की गुजारिश पर ड्यूटी जज उसी दिन इस महत्वपूर्ण जमानत याचिका पर सुनवाई कर सकते हैं और कोई बड़ा फैसला आ सकता है। लेकिन तकनीकी और कानूनी अड़चनों की वजह से ऐसा नहीं हो सका। अब अदालत ने इस बहुचर्चित जमानत याचिका पर विस्तार से सुनवाई के लिए 24 जुलाई की नई तारीख मुकर्रर की है।
बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को बनाया गया आधार
गिरिबाला सिंह की तरफ से अदालत में पेश की गई अर्जी में जमानत पाने के लिए कई अहम तर्क रखे गए हैं। बचाव पक्ष ने अपनी याचिका में मुख्य रूप से आरोपी की बढ़ती उम्र और लगातार खराब होते स्वास्थ्य का हवाला दिया है। इसके अलावा, अर्जी में यह भी विस्तार से बताया गया है कि बहू ट्विशा शर्मा और उनकी सास के बीच कभी कोई विवाद नहीं रहा और उनके आपसी संबंध हमेशा से बहुत ही मधुर और अच्छे थे। इन्हीं तमाम तर्कों को आधार बनाते हुए बचाव पक्ष ने अदालत से मानवीय आधार पर तुरंत राहत देने की पुरजोर मांग की है। वहीं दूसरी तरफ, मृतका ट्विशा के परिजनों ने इस जमानत याचिका का अदालत में बहुत कड़ा विरोध किया है। मायके वालों का स्पष्ट कहना है कि आरोपियों को किसी भी सूरत में जमानत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि मामला बेहद गंभीर है।
संदिग्ध मौत और पोस्टमार्टम पर भारी विवाद
यह पूरा कानूनी और पारिवारिक विवाद 12 मई 2026 की उस घटना से जुड़ा हुआ है, जब ट्विशा शर्मा की बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के तुरंत बाद, ससुराल वालों ने इसे आत्महत्या करार दिया था और पुलिस को इसी आधार पर जानकारी दी थी। लेकिन मृतका के माता-पिता और अन्य परिजनों ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सुनियोजित हत्या बताया था। विवाद तब और गहरा गया जब परिवार ने भोपाल में हुए शुरुआती पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए और उसे मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया। बढ़ते दबाव और कानूनी दखल के बाद, अदालत ने दखल देते हुए ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम करवाने का आदेश दिया था। पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर सख्त कार्रवाई करते हुए ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया था।
मुख्यमंत्री का अहम दखल और क्राइम सीन रिक्रिएशन
इस हाई-प्रोफाइल केस की गंभीरता और परिवार के लगातार विरोध को देखते हुए ट्विशा के परिजनों ने राज्य के मुख्यमंत्री से भी सीधी मुलाकात की थी। इस अहम दखल के बाद ही मामले की पूरी जांच राज्य पुलिस से लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को ट्रांसफर कर दी गई थी। जांच एजेंसी बदलने और कई दिनों की लंबी कानूनी खींचतान के बाद ही परिजनों ने ट्विशा का अंतिम संस्कार किया था। यह पूरा मामला पुलिस और आम जनता के लिए इसलिए भी सबसे ज्यादा सुर्खियों में बना हुआ है क्योंकि आरोपी सास गिरिबाला सिंह खुद कानून की अच्छी जानकार और एक रिटायर्ड जज हैं, जबकि उनका बेटा समर्थ शहर का एक बहुत ही प्रसिद्ध क्राइम वकील है। हाल ही में सीबीआई की टीम ने अपनी तहकीकात को आगे बढ़ाते हुए आरोपियों के घर पर पूरा घटनाक्रम फिर से दोहराया था। जांच अधिकारियों ने मौके पर एक डमी पुतला बनाया था और उसे फांसी पर लटकाकर यह समझने का प्रयास किया था कि असल में मौत कैसे हुई होगी। फिलहाल, अदालत के सख्त आदेश पर दोनों ही आरोपी 28 जुलाई तक न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद हैं।




















