वैश्विक मुद्रा बाजारों में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटेन के पाउंड में अपने प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले नरमी दर्ज की गई। मुद्रास्फीति के ताजा आधिकारिक आंकड़ों के बाजार के पूर्व अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप सामने आने के बाद ब्रिटिश पाउंड पर दबाव देखा गया। इस घटनाक्रम के बीच EUR/GBP मुद्रा जोड़ी संभलते हुए 0.8570 के दायरे तक पहुंच गई, हालांकि यह अभी भी पिछले हफ्ते के 0.8600 के ऊपरी स्तर से नीचे ही बनी हुई है। बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा गुरुवार को होने वाली अपनी महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही यथावत रखने की व्यापक संभावना है, जिससे बाजार प्रतिभागी नई दिशा तलाश रहे हैं।
ब्रिटेन में उपभोक्ता और उत्पादक महंगाई के आंकड़े
ब्रिटेन में बुधवार को जारी आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर अगस्त के महीने में सालाना आधार पर 3.1 प्रतिशत दर्ज की गई, जो जुलाई में 2.9 प्रतिशत रही थी। इसके अलावा, कोर मुद्रास्फीति समीक्षाधीन अवधि में 2.6 प्रतिशत पर स्थिर रही, जो कि पिछले महीने के स्तर के बराबर ही है। ये दोनों ही प्रमुख आंकड़े वित्तीय बाजारों के आम अनुमानों के बिल्कुल अनुसार रहे हैं, जिसके कारण पाउंड को कोई नई दिशा या अप्रत्याशित मजबूती नहीं मिल सकी।
दूसरी ओर, थोक या उत्पादक स्तर पर महंगाई के आंकड़ों ने विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। उत्पादक मूल्य सूचकांक इनपुट सालाना आधार पर जुलाई के 4.9 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 6.1 प्रतिशत पर पहुंच गया, जबकि बाजार का सर्वसम्मत अनुमान 5.4 प्रतिशत रहने का था। इसी दिशा में, आउटपुट स्तर पर उत्पादक मूल्य सूचकांक में भी तेजी दर्ज की गई और यह पिछले महीने के 3.1 प्रतिशत से उछलकर सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गया। यह आंकड़ा भी वित्तीय विश्लेषकों द्वारा अनुमानित 3.3 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी अधिक रहा है।
कच्चा तेल और यूरो पर भू-राजनीतिक दबाव
ब्रिटिश पाउंड में कमजोरी दिखने के बावजूद यूरो को इसका कोई बहुत बड़ा फायदा नहीं मिल पा रहा है। व्यापक वित्तीय बाजारों में मध्यम जोखिम से बचने का माहौल बना हुआ है, साथ ही ऊर्जा की ऊंची लागत यूरो की रफ्तार पर अंकुश लगा रही है। मध्य पूर्व के क्षेत्र में बढ़ती जटिलताओं और अनिश्चितताओं के बीच ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर मजबूती से टिकी हुई हैं। कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों का बड़े पैमाने पर आयात करने वाली यूरोजोन की अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह स्थिति एक गंभीर आर्थिक चुनौती पेश कर रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा सीमित बना हुआ है।
आईएनजी ने अपने एक विश्लेषण नोट में रेखांकित किया है कि इस मौजूदा स्तर से EUR/GBP में बहुत अधिक गिरावट आने की संभावना कम दिखती है। संस्था ने आगाह किया है कि आने वाले हफ्तों में ज्यादातर जोखिम तेजी की ओर ही नजर आ रहे हैं। इसके पीछे मौजूदा मौद्रिक नीति परिदृश्य के साथ-साथ अक्टूबर के अंत में पेश होने वाले बजट से पहले संभावित राजकोषीय सुर्खियों का असर है। इसके अलावा, डाउनिंग स्ट्रीट पर स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में स्वतंत्रता जनमत संग्रह की अनुमति देने को लेकर बढ़ता दबाव भी ब्रिटेन की मुद्रा के लिए राजनीतिक अनिश्चितता पैदा कर रहा है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और महंगाई का गणित
बैंक ऑफ इंग्लैंड की प्राथमिक जिम्मेदारी देश में मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के लक्षित स्तर के आसपास बनाए रखने की है। यही मुख्य कारण है कि मासिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के जारी होने को मुद्रा और बॉन्ड बाजारों में अत्यधिक गंभीरता से देखा जाता है। जब महंगाई में अप्रत्याशित उछाल आता है, तो केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को तेजी से और पहले बढ़ाने या बॉन्ड खरीद कार्यक्रम में कटौती करने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे बाजार में पाउंड की कुल आपूर्ति सीमित होती है। इसके विपरीत, जब कीमतों में वृद्धि की गति धीमी होती है, तो यह ढीली मौद्रिक नीति की ओर इशारा करता है। आम तौर पर जब मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक आती है, तो पाउंड में मजबूती देखने को मिलती है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक आंकड़ों ने पाउंड को सहारा नहीं दिया।
डॉलर का दबदबा और वैश्विक मुद्राओं की स्थिति
अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख के चलते अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी दबाव साफ दिखाई दे रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार तीसरे दिन गिरावट के दायरे में रहा और 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए अपने मासिक निचले स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में संभावित बढ़ोतरी और तेल की कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर को सहारा मिल रहा है, जबकि जोखिम वाली ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पिछड़ रही है।
इसी तरह, डॉलर इंडेक्स में तेजी के बीच जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर 155.00 के पार निकल गया। ऊर्जा कीमतों से प्रेरित महंगाई की आशंकाओं और अमेरिकी दरों में वृद्धि की उम्मीदों ने डॉलर को बढ़त दी है। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर की स्थिति को और मजबूती दी है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले और बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले निवेशक आक्रामक दांव लगाने से हिचक रहे हैं, जिससे यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे बनी हुई है।
सोने में सुस्ती और केंद्रीय बैंकों का रुख
यूरोपीय व्यापारिक सत्र में सोने की कीमतों में भी सीमित हलचल देखी गई। पीली धातु इंट्राडे की हल्की बढ़त को आगे बढ़ाने में संघर्ष करती दिखी और 4,350 डॉलर के स्तर से नीचे ही बनी रही। अमेरिकी डॉलर के दो सप्ताह के उच्चतम स्तर को छूने के बाद थोड़ी सुस्ती दिखाने से सोने को आंशिक सहारा मिला, लेकिन फेडरल रिजर्व के बड़े नीतिगत निर्णय से पहले निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
अमेरिकी बाजार में अगस्त के रोजगार आंकड़ों ने काफी दम दिखाया था, जिसने शुरुआत में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की उम्मीदें बढ़ाई थीं। हालांकि, हालिया अगस्त उपभोक्ता महंगाई आंकड़ों का असर नीति निर्माताओं और निवेशकों पर अधिक महत्वपूर्ण रहा है। दूसरी ओर, जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। अब जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को कड़ा करने के संकेत मिल रहे हैं, यह वैश्विक पूंजी प्रवाह एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है, खासकर तब जब बाकी दुनिया पहले ही ब्याज दरें बढ़ा चुकी है और जापान अकेला अपवाद बना हुआ था।



















