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त्रिपुरा में बढ़ेगा दूध का उत्पादन, गोमती सहकारी मिल्क यूनियन जोड़ेगी 10,000 किसानत्रिपुरा
1 अक्तू॰ 2026, 4:59 pm (26 दिन पहले)· 0

त्रिपुरा में बढ़ेगा दूध का उत्पादन, गोमती सहकारी मिल्क यूनियन जोड़ेगी 10,000 किसान

त्रिपुरा सरकार राज्य में दूध की किल्लत दूर करने और सप्लाई चेन सुधारने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की तकनीकी मदद ले रही है। गोमती सहकारी मिल्क यूनियन से 10,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

त्रिपुरा में स्थानीय दुग्ध उत्पादन को नई गति देने और बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए राज्य प्रशासन ने एक व्यापक रणनीति पर काम शुरू किया है। वर्तमान में राज्य के भीतर दूध का उत्पादन उपभोक्ताओं की कुल जरूरतों से कम है, जिसके चलते डेयरी बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर उन्नत करने की योजना बनाई गई है। पशु संसाधन विकास विभाग (एआरडीडी) के मंत्री सुधांशु दास ने गोमती सहकारी मिल्क यूनियन की बोर्ड बैठक के दौरान इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी, जहां दुग्ध आपूर्ति और प्रसंस्कृत उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड देगा तकनीकी सहयोग

राज्य सरकार ने दुग्ध प्रसंस्करण, संग्रह और आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक बनाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) से तकनीकी सहायता मांगी है। इस पहल को संस्थागत रूप देने के लिए कुछ महीने पहले एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता त्रिपुरा सरकार के पशु संसाधन विकास विभाग, गोमती सहकारी मिल्क यूनियन और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच हुआ है। इस साझेदारी के माध्यम से वैज्ञानिक तरीकों से डेयरी प्रबंधन और दूध संकलन की क्षमता को विस्तार दिया जा रहा है।

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मंत्री सुधांशु दास ने इस रणनीति पर जोर देते हुए कहा कि त्रिपुरा में दूध और उससे जुड़े उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना मुख्य उद्देश्य है क्योंकि राज्य में खपत मौजूदा उत्पादन से काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से मिलने वाली मदद और एनडीडीबी जैसी विशेषज्ञ तकनीकी संस्थाओं का मार्गदर्शन इस क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एनडीडीबी द्वारा उन्नत तकनीक, बुनियादी ढांचे और वितरण नेटवर्क के लिए संस्थागत मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। हितधारकों से प्राप्त सभी महत्वपूर्ण सुझावों को मिलाकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है ताकि पूरे राज्य में दूध की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।

गोमती यूनियन का नेटवर्क होगा 10,000 किसानों तक विस्तृत

दुग्ध आपूर्ति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए गोमती सहकारी मिल्क यूनियन ने अपने संगठनात्मक ढांचे को बड़ा करने की योजना बनाई है। गोमती सहकारी मिल्क यूनियन के अध्यक्ष रतन घोष ने बताया कि वर्तमान में 6,642 दुग्ध उत्पादक किसान यूनियन से सीधे जुड़े हुए हैं। संस्था ने इस संख्या को बढ़ाकर 10,000 किसानों तक पहुंचाने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है।

ग्रामीण स्तर पर दूध संकलन तंत्र को मजबूत करने के लिए बोर्ड 52 अतिरिक्त दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया पर भी विचार कर रहा है। रतन घोष के अनुसार, यूनियन का प्राथमिक ध्यान केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर है। इन योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों और डेयरी किसानों को वित्तीय व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर उनकी आजीविका को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

सवाल-जवाब

त्रिपुरा सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किसकी मदद ले रही है?
त्रिपुरा सरकार ने दुग्ध उत्पादन, प्रसंस्करण और आपूर्ति श्रृंखला को सुधारने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) से तकनीकी सहायता मांगी है।
डेयरी विकास के लिए किस त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं?
यह समझौता त्रिपुरा सरकार के पशु संसाधन विकास विभाग, गोमती सहकारी मिल्क यूनियन और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच हुआ है।
गोमती सहकारी मिल्क यूनियन में वर्तमान में कितने किसान जुड़े हैं?
यूनियन के अध्यक्ष रतन घोष के अनुसार, वर्तमान में 6,642 दुग्ध उत्पादक किसान इससे जुड़े हुए हैं।
गोमती मिल्क यूनियन ने किसानों को जोड़ने का क्या लक्ष्य तय किया है?
यूनियन ने अपने साथ जुड़े किसानों की संख्या को बढ़ाकर 10,000 करने का लक्ष्य रखा है।
राज्य में कितनी नई दुग्ध सहकारी समितियां बनाने की योजना है?
गोमती सहकारी मिल्क यूनियन के बोर्ड में 52 अतिरिक्त दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के गठन पर चर्चा की जा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·25 दिन पहले

दस हजार किसानों को जोड़ने का लक्ष्य वाकई बड़ा है, उम्मीद है जमीनी स्तर पर फायदा दिखेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·25 दिन पहले

डेयरी सेक्टर में कोऑपरेटिव्स का बढ़ना और किसानों को जोड़ना बढ़िया कदम है, इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के मौके बनेंगे और दूध की कमी भी दूर होगी।

Meera Joshi@meera-joshi·25 दिन पहले

बिल्कुल अर्जुन, जब किसानों को सही मदद मिलती है तो ग्रामीण आजीविका और मेंटल पीस दोनों बेहतर होती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·25 दिन पहले

6,642 किसानों से सीधे 10,000 तक पहुँचना अच्छा कदम है, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वाकई बल मिलेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·25 दिन पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं अगरतला गया था, तो स्थानीय डेयरी किसानों से मिलकर उनकी मेहनत और संसाधनों की कमी दोनों को बहुत करीब से महसूस किया था।

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