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त्रिपुरा में पुलिस ने पकड़ी 40 करोड़ रुपये की अवैध याबा टैबलेट, एक आरोपी गिरफ्तारत्रिपुरा
16 सित॰ 2026, 9:53 pm (41 दिन पहले)· 3

त्रिपुरा में पुलिस ने पकड़ी 40 करोड़ रुपये की अवैध याबा टैबलेट, एक आरोपी गिरफ्तार

त्रिपुरा पुलिस ने उत्तर त्रिपुरा जिले में एक बड़े अभियान के दौरान लगभग 50 किलोग्राम याबा टैबलेट जब्त की हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपये आंकी गई है और इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

त्रिपुरा पुलिस ने मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए गए एक बड़े अभियान के तहत लगभग 50 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद की हैं, जिन्हें आमतौर पर याबा के नाम से जाना जाता है। इस जब्ती का कुल बाजार मूल्य करीब 40 करोड़ रुपये आंका गया है। पुलिस ने इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

तलाशी अभियान और जब्ती

यह बड़ी कार्रवाई बुधवार को उत्तर त्रिपुरा में पानीसागर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा एक विशेष अभियान के दौरान की गई। अधिकारियों ने पुख्ता सूचना के आधार पर यह कदम उठाया, जिससे मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।

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मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

राज्य के मुख्यमंत्री माणिक साहा, जिनके पास गृह विभाग का जिम्मा भी है, ने इस कार्रवाई को राज्य में अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार के लिए एक बड़ा झटका करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता है और यह पुलिस तथा सुरक्षा बलों के प्रयासों को दर्शाता है जो युवाओं की रक्षा करने में जुटे हैं।

मादक पदार्थों का रूट और तस्करी

पुलिस के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, यह खेप म्यांमार में तैयार हुई थी और मिजोरम के रास्ते त्रिपुरा पहुंचाई गई थी। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इस खेप को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके बांग्लादेश में तस्करी के जरिए भेजा जाना था। त्रिपुरा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि राज्य की 109 किलोमीटर लंबी सीमा मिजोरम से मिलती है और बांग्लादेश के साथ इसकी 856 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जिस वजह से यह इलाका नशीली दवाओं की तस्करी के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट रूट बन जाता है।

याबा टैबलेट और क्षेत्रीय चिंताएं

याबा टैबलेट में मुख्य रूप से मेथामफेटामाइन और कैफीन जैसे तत्व पाए जाते हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में इनका अवैध व्यापार और सेवन बड़े पैमाने पर होता है, जिसमें बांग्लादेश और भारत भी शामिल हैं। यह ताजा जब्ती ऐसे समय में सामने आई है जब पूर्वोत्तर क्षेत्र को म्यांमार से आने वाले या वहां से गुजरने वाले नशीले पदार्थों के गलियारे के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर लगातार चिंताएं बनी हुई हैं। मिजोरम और मणिपुर की म्यांमार के साथ लंबी और ज्यादातर बिना बाड़ वाली सीमाएं हैं, जिन्हें तथाकथित गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र से तस्करी के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है।

सरकार की नीतियां और नशा मुक्ति केंद्र

मुख्यमंत्री माणिक साहा पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी सरकार मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और उन्होंने अवैध कारोबार के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों को और कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने त्रिपुरा के सभी आठ जिलों में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने की योजना का ऐलान किया है, जिसके तहत प्रत्येक सुविधा केंद्र के लिए 20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास केंद्रीय मंत्रालय ने सि Sepahijala जिले के बिश्रामगंज में एक विशेष नशा मुक्ति केंद्र के लिए 198 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है।

आगे की जांच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद की गई इस खेप और गिरफ्तार किए गए आरोपी के तस्करी नेटवर्क के साथ संभावित संबंधों का पता लगाने के लिए आगे की जांच तेजी से जारी है।

सवाल-जवाब

त्रिपुरा में पुलिस ने कुल कितने मूल्य की याबा टैबलेट पकड़ी हैं?
पुलिस ने लगभग 50 किलोग्राम याबा टैबलेट पकड़ी हैं, जिनका अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित मूल्य 40 करोड़ रुपये है।
यह जब्ती त्रिपुरा में किस स्थान पर की गई?
यह जब्ती उत्तर त्रिपुरा जिले में पानीसागर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में की गई।
इस मामले में कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है?
इस मामले में पुलिस ने अब तक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ की जा रही है।
याबा टैबलेट्स का मूल स्रोत कहां माना जा रहा है?
पुलिस के अनुसार ये टैबलेट्स म्यांमार में उत्पन्न हुई थीं और मिजोरम के रास्ते त्रिपुरा लाई गई थीं।
त्रिपुरा सरकार ने नशा मुक्ति केंद्रों के लिए क्या योजना बनाई है?
राज्य सरकार ने सभी आठ जिलों में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है और प्रत्येक सुविधा के लिए 20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·40 दिन पहले

यह जब्ती पूर्वोत्तर में म्यांमार से बांग्लादेश जाने वाले नशीले पदार्थों के ट्रांजिट रूट की संवेदनशीलता को उजागर करती है। त्रिपुरा की भौगोलिक स्थिति और सीमाई इलाकों की सुरक्षा को देखते हुए, ड्रग्स के इस बड़े नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए केवल जब्ती नहीं, बल्कि वित्तीय जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण के जरिए सप्लायरों तक पहुंचना बेहद जरूरी होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·40 दिन पहले

यह मामला केवल एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय अवैध सिंडिकेट्स की गहरी जड़ों को दर्शाता है। जब्ती के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इस करोड़ों के नशीले कारोबार के वित्तीय नेटवर्क और हवाला चैनल्स को बेनकाब करने की है। यदि इन आपूर्तिकर्ताओं की फंडिंग और डिजिटल या पारंपरिक मनी ट्रेल की गहराई से जांच नहीं की गई, तो ऐसे नेटवर्क दूसरे रास्तों से अपनी गतिविधियां जारी रख सकते हैं। इस आर्थिक रीढ़ को तोड़े बिना इस अवैध व्यापार पर पूरी तरह लगाम लगाना असंभव होगा।

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