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अहम खनिजों की प्रोसेसिंग के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म करने के पक्ष में नरेंद्र मोदीनेता जी
4 नव॰ 2026, 5:41 pm (1 घंटे पहले)· 0

अहम खनिजों की प्रोसेसिंग के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म करने के पक्ष में नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर भारत के भविष्य के लिए जरूरी खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण पर जोर दिया है। उन्होंने लिथियम, निकेल और कोबाल्ट के परिष्कृत आयात पर निर्भरता घटाने का आह्वान किया।

भविष्य की आधुनिक तकनीकों को ऊर्जा देने वाले अहम खनिजों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर बड़ा विमर्श शुरू हो गया है। लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे संसाधन स्वच्छ ऊर्जा, बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रक्षा क्षेत्र की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में इन कच्चे और रिफाइंड खनिजों के घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण की क्षमता तैयार करना देश की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर क्या कहा

नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी बात रखते हुए देश की बाहरी निर्भरता पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या भारत को हमारे भविष्य को ताकत देने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से इस तरह की निर्भरता के कतई पक्ष में नहीं हैं।

उन्होंने रेखांकित किया कि लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा प्रणालियों के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके बावजूद मौजूदा समय में भारत रिफाइंड और प्रोसेस्ड खनिजों की आपूर्ति के लिए भारी मात्रा में बाहरी आयातों पर निर्भर बना हुआ है। इस स्थिति को बदलने और देश के भीतर ही इन खनिजों के रिफाइनिंग तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर उन्होंने बल दिया।

महत्वपूर्ण खनिजों का रणनीतिक महत्व

आधुनिक उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र में लिथियम, निकेल और कोबाल्ट का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए बैटरी निर्माण सबसे प्रमुख कड़ी है, जिसमें ये घटक अनिवार्य भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा संवेदनशील रक्षा उपकरणों और दैनिक उपयोग के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के उत्पादन में भी इनके परिष्कृत स्वरूप की भारी मांग रहती है। यदि घरेलू स्तर पर प्रोसेसिंग की सुविधाएं विकसित नहीं होती हैं, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी व्यवधान का सीधा असर राष्ट्रीय विनिर्माण पर पड़ सकता है।

जनता की प्रतिक्रिया

इस विचार पर आम नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने मिली-जुली राय जाहिर की। कई लोगों ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक जरूरी और दूरदर्शी कदम बताते हुए घरेलू क्षमता निर्माण का समर्थन किया, जबकि कुछ अन्य यूजर्स ने सवाल उठाया कि इस दिशा में जमीनी स्तर पर ठोस काम और तेजी से लागू होने वाली नीतियां कब देखने को मिलेंगी।

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सवाल-जवाब

नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर किस विषय पर विचार रखे?
उन्होंने भविष्य की तकनीकों को शक्ति देने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस विमर्श में किन प्रमुख खनिजों का उल्लेख किया गया है?
इसमें मुख्य रूप से लिथियम, निकेल और कोबाल्ट का जिक्र किया गया है, जो बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवश्यक हैं।
इन खनिजों का उपयोग किन प्रमुख क्षेत्रों में होता है?
इनका प्राथमिक उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, रिचार्जेबल बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों और रक्षा प्रणालियों में होता है।
वर्तमान में इन खनिजों को लेकर भारत की क्या स्थिति है?
वर्तमान में भारत इन महत्वपूर्ण खनिजों के परिष्कृत और प्रसंस्कृत स्वरूप के आयात पर काफी हद तक निर्भर है।
सोशल मीडिया पर जनता की ओर से कैसी प्रतिक्रिया आई?
लोगों ने आत्मनिर्भरता की दिशा में इसे जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ ने जमीनी स्तर पर ठोस नीति और त्वरित क्रियान्वयन की मांग की।
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