देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने और अनुचित साधनों के प्रयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 को पारित कर दिया है। इस नए कानून के माध्यम से परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वाले तत्वों और संगठित गिरोहों पर नकेल कसने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं, ताकि देश भर के लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और उनके भविष्य को सुरक्षा प्रदान की जा सके।
कड़े प्रावधानों से परीक्षा तंत्र को मिलेगी मजबूती
इस विधेयक के संसद से पास होने पर गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच X पर देश के अभ्यर्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह कानून सख्त प्रावधानों के माध्यम से दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई तय करता है और युवाओं के सपनों तथा आकांक्षाओं की रक्षा करता है। इसके साथ ही असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस विधायी कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश की समूची परीक्षा प्रणाली को मजबूती मिलेगी और निष्पक्ष परीक्षाएं सुनिश्चित होंगी। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी विधेयक के पारित होने को युवाओं के हित में एक बड़ा कदम बताया।
संसद में तीखी बहस और राजनीतिक हंगामा
विधेयक पर चर्चा के दौरान निचले सदन में भारी हंगामा और राजनीतिक गतिरोध भी देखने को मिला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव हुआ, जहां भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने माफी की मांग उठाई। इस पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी स्थिति में माफी नहीं मांगेंगे। इस भारी शोर-शराबे और गहमागहमी के बीच ही लोकसभा ने संशोधन विधेयक को मंजूरी दी।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस नए कानून को लेकर आम नागरिकों और अभ्यर्थियों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अनेक लोगों ने पेपर लीक की रोकथाम के लिए बनाए गए कड़े नियमों का स्वागत किया, वहीं कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षाओं के समय पर आयोजन और नियमों के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर अपनी चिंताएं जताईं।



























