नागरिकता का सबूत क्या होना चाहिए, इस सवाल पर देश में जारी अस्पष्टता को लेकर शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बेबाक राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब तक यह स्पष्ट नहीं होता कि नागरिकता का वैध प्रमाण क्या माना जाएगा, तब तक देश के नागरिकों को इस अनिश्चितता में नहीं रहना चाहिए।
थरूर की पोस्ट में क्या था
थरूर ने X पर लिखा:
"Our country deserves better than to be in limbo on what constitutes a proof of citizenship. Our hearts, our mirrors, tell us we're Indian, but our government maddeningly does not! Here's a simple way out of this situation:"
उन्होंने जोर देकर कहा कि हर भारतीय नागरिक अपने दिल से जानता है कि वह इस देश का है और उसका आईना भी यही बताता है। लेकिन सरकार उसे यह मान्यता नहीं देती, जो बेहद निराशाजनक है। उन्होंने इस उलझन से निकलने का एक सरल उपाय भी सुझाया और उसका लिंक अपनी पोस्ट में जोड़ा।
पृष्ठभूमि
खबरों के मुताबिक नागरिकता और राष्ट्रीय पहचान को लेकर बहस केवल भारत तक सीमित नहीं है। हाल के समय में कई लोकतंत्रों में यह सवाल उठा है कि क्या देश अपने संस्थापक आदर्शों के प्रति वफादार हैं और क्या नागरिकों को उनके मूल अधिकार सरल तथा स्पष्ट तरीके से मिल रहे हैं। यह पृष्ठभूमि थरूर की चिंता को और अधिक प्रासंगिक बनाती है।
जनता की प्रतिक्रिया
थरूर के इस पोस्ट पर लोगों की व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां कई लोगों ने स्पष्टता की जरूरत से सहमति जताई और सुझाव दिया कि पासपोर्ट नवीनीकरण के समय एक अलग नागरिकता प्रमाणपत्र का विकल्प दिया जाए, वहीं दूसरों ने सवाल उठाया कि करोड़ों भारतीयों को बार-बार अपनी नागरिकता साबित करनी पड़े, यह व्यवस्था की कमी को दर्शाता है। कुछ लोगों ने चेतावनी भी दी कि समाज में पहले से मौजूद भरोसे की कमी और नागरिकता प्रमाण को लेकर फैला भ्रम मिलकर एक गंभीर संकट की स्थिति बना सकते हैं।





















