चुनावी प्रक्रियाओं और मतों की कथित हेराफेरी को लेकर विपक्ष के हमलों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक जवाबी रणनीति अपना ली है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा खड़े किए जा रहे सवालों के प्रत्युत्तर में सत्ताधारी दल ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' शीर्षक से व्यापक आंदोलन छेड़ा है। राष्ट्रीय राजधानी से लेकर दक्षिण भारत तक पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी सड़कों पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।
तेलंगाना में अमित शाह संभालेंगे कमान
हैदराबाद के प्रमुख इलाकों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं इस जन अभियान की अगुवाई करने पहुंचे हैं। तय योजनानुसार, दोपहर 3 बजे निज़ाम कॉलेज परिसर में स्थापित बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा के समक्ष से पदयात्रा आरंभ होगी। यह पैदल मार्च मोजमजाही चौराहे पर जाकर समाप्त होगा, जहां गृह मंत्री उपस्थित जनसमूह को संबोधित करेंगे। प्रदेश इकाई एसआईआर व्यवस्था पर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने का दावा कर रही है। इस कार्यक्रम में अधिवक्ताओं, चिकित्सकों, प्रबुद्ध नागरिकों और हजारों कार्यकर्ताओं की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।
बिहार और पश्चिम बंगाल में नितिन नवीन के कार्यक्रम
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पूर्वी भारत के दो राज्यों में मोर्चा संभाल रहे हैं। उनका पहला कार्यक्रम बिहार के भागलपुर शहर में रखा गया है, जिसके पश्चात वे पश्चिम बंगाल पहुंचेंगे। दोपहर के समय कोलकाता में कॉलेज स्ट्रीट से धर्मतला के बीच 2 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पैदल मार्च निकाला जाएगा। इस विशाल प्रदर्शन में नितिन नवीन के साथ सीएम शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य भी कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे।
मुंबई और दिल्ली में भी विरोध की गूंज
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में दादर स्थित शिवाजी पार्क से कामगार मैदान तक पार्टी के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च की रूपरेखा तैयार की है। उधर दिल्ली में प्रदर्शन का केंद्र 1 नवंबर को आयोजित कांग्रेस की सभा का विरोध है। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर उस आयोजन के खिलाफ दोपहर 12 बजे न्याय मार्च आयोजित हुआ। गुरुद्वारा बंगला साहिब से चलकर यह मार्च गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब तक पहुंचा, जिसमें दंगा पीड़ितों के परिजनों को भी साथ जोड़ा गया।



















