अमेरिकी चुनाव प्रचार में अमूमन पर्यावरण समर्थक संगठन जलवायु संकट और पृथ्वी को बचाने की भावुक अपील करते नजर आते हैं, लेकिन इस बार सियासी दंगल में उनका तौर-तरीका पूरी तरह बदल चुका है। स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा एक संगठन अब पारंपरिक रक्षात्मक रवैया छोड़कर उन नेताओं को सीधे निशाने पर ले रहा है जो नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की राह में रोड़ा अटकाते रहे हैं। इस रणनीति के केंद्र में कोई साधारण पर्यावरण समूह नहीं, बल्कि 'इन्वेस्ट इन टुमारो कोएलिशन' नामक एक खास पोलिटिकल एक्शन कमेटी (पीएसी) है। न्यूयॉर्क के कुशल चुनावी रणनीतिकारों की निगरानी में चलने वाले इस संगठन को क्रिप्टो क्षेत्र की दिग्गज हस्ती क्रिस लार्सन का बड़ा आर्थिक संबल मिला हुआ है। लार्सन ब्लॉकचेन कंपनी रिपल के सह-संस्थापक हैं और उनका मानना है कि पारंपरिक जीवाश्म ईंधन कंपनियाँ वर्षों से बेहद कड़ा चुनावी खेल खेलती आई हैं, जबकि सौर ऊर्जा उद्योग अब तक जरूरत से ज्यादा नरम बना रहा।
रूढ़िवादी प्राथमिकताओं में दक्षिणपंथी मुद्दों से वार
इस नई राजनीतिक पहल की सबसे चौंकाने वाली बात इसका प्रचार का तरीका है। रिपब्लिकन पार्टी के आंतरिक मुकाबलों में जब इन नेताओं के खिलाफ विज्ञापन चलाए जाते हैं, तो उनमें सौर पैनलों, पवन चक्कियों या ग्लोबल वार्मिंग का कोई जिक्र तक नहीं होता। न्यूयॉर्क शहर के पूर्व मेयर माइकल ब्लूमबर्ग के प्रशासन में काम कर चुके रणनीतिकार क्रिस कॉफी इस अभियान का प्रबंधन संभाल रहे हैं। कॉफी की स्पष्ट राय है कि दक्षिणपंथी मतदाताओं के बीच पर्यावरण की चर्चा करने का कोई लाभ नहीं होता। इसकी जगह उन स्थानीय और वैचारिक कमजोरियों को उभारा जाता है जिससे संबंधित नेता अपने ही खेमे के मतदाताओं की नजरों में संदेहास्पद नजर आने लगे। चुनावी जंग में प्रत्याशी को यह साबित करके घेरना सबसे कारगर हथियार बन जाता है कि वह पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक आंदोलन के प्रति पूरी तरह वफादार नहीं है।
इसी सोची-समझी योजना के तहत टेक्सास के अटॉर्नी जनरल पद के चुनाव में चिप रॉय के खिलाफ लगभग पंद्रह लाख डॉलर झोंक दिए गए। प्रचार का बड़ा हिस्सा ट्रुथ सोशल और रंबल जैसे दक्षिणपंथी मंचों पर केंद्रित रखा गया। इसी तर्ज पर दक्षिण कैरोलिना के सांसद राल्फ नॉर्मन पर विज्ञापनों में निशाना साधा गया, जबकि टेनेसी के सांसद एंडी ओगल्स को काम से गैरहाजिर रहने वाला जनप्रतिनिधि बताकर घेरा गया। इन हमलों का असर यह रहा कि चिप रॉय, राल्फ नॉर्मन और एंडी ओगल्स अपनी-अपनी प्राथमिक प्रतियोगिताएं हार गए। इसी गठबंधन से वित्तीय मदद पाने वाले एक अन्य गुट ने रोड आइलैंड के डेमोक्रेटिक गवर्नर डैन मैकी को भी घेरा, जिन्हें भी अपनी चुनावी जंग गंवानी पड़ी।
करोड़ों डॉलर का चुनावी बजट और बदलते निशाने
शुरुआती प्राथमिक मुकाबलों में करीब पचास लाख डॉलर खर्च करने के बाद यह पीएसी अब आम चुनाव की ओर बढ़ चुका है और उसने सात प्रमुख विरोधियों को हराने के लिए डेढ़ करोड़ डॉलर का अतिरिक्त बजट तय किया है। आगामी चरणों के लिए इंडियाना की सांसद विक्टोरिया स्पार्ट्ज़ को निशाना बनाने के लिए बीस लाख डॉलर के विज्ञापनों की योजना तैयार की गई है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा खत्म करने और बुजुर्गों पर विवादित टिप्पणियों को लेकर टेक्सास के ब्रैंडन हेरेरा को घेरने की तैयारी है। वहीं कोलोराडो की सांसद लॉरेन बोएबर्ट के चर्चित 'बीटलजूस' थियेटर विवाद को लेकर भी पंद्रह लाख डॉलर का विज्ञापन अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उनके सार्वजनिक आचरण पर सवाल खड़े किए गए हैं।
न्यूयॉर्क के उत्तरी हिस्से से संसद प्रत्याशी एंथनी कांस्टेंटिनो के खिलाफ भी इसी संगठन ने मोर्चा खोल रखा है। कांस्टेंटिनो की स्टिकर बनाने वाली कंपनी द्वारा पूर्व में पुलिस विरोधी नारे छपने के वाकये को जोर-शोर से प्रचारित किया जा रहा है। अमेरिका में बंदूक अधिकार समर्थक और श्रमिक संगठन दशकों से अपने विरोधियों को इसी आक्रामक अंदाज में चुनावी नुकसान पहुंचाते रहे हैं। 'कम्युनिटी क्लीन एनर्जी कोएलिशन' की बोर्ड अध्यक्ष स्टेफ़ बॉश मानती हैं कि स्वच्छ ऊर्जा उद्योग को अपनी बात मनवाने के लिए अब थोड़ा खौफ और आक्रामकता दिखानी ही होगी। हालांकि रणनीतिकार जेम्स कार्विल जैसे पुराने राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेल और गैस कंपनियों के अरबों डॉलर के राजनीतिक खर्च के सामने बीस लाख या दो करोड़ डॉलर की रकम बेहद सीमित है।
प्रशासन का रुख और रिपब्लिकन गढ़ों में सौर ऊर्जा का प्रसार
वॉशिंगटन में राजनीतिक समीकरण तेजी से पेचीदा हो रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने अतीत में स्वच्छ ऊर्जा की कई योजनाओं को कड़े नियमों में उलझाया और तटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं को रोकने के लिए भारी भरकम कदम उठाए। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अन्य देशों को इन योजनाओं से दूर रहने की नसीहत दी गई। प्रशासन के पूर्व राष्ट्रीय ऊर्जा प्रभुत्व परिषद के सदस्य रिचर्ड गोल्डबर्ग का आकलन रहा है कि जहां पवन ऊर्जा बेहद कठिन दौर में पहुंच चुकी है, वहीं सौर ऊर्जा अब भी किसी तरह बची हुई है।
दिलचस्प पहलू यह है कि तेल और गैस का गढ़ माना जाने वाला टेक्सास राज्य आज सौर ऊर्जा उत्पादन में अमेरिका के सबसे अग्रणी इलाकों में तब्दील हो चुका है। घरेलू बाजार में बिजली के बढ़ते बिल, पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) डेटा केंद्रों की बेतहाशा बिजली मांग ने ऊर्जा का नया संकट खड़ा कर दिया है। 'अमेरिकन क्लीन पावर एसोसिएशन' द्वारा कराए गए एक आंतरिक सर्वेक्षण के मुताबिक ट्रंप समर्थक मतदाताओं में से पचहत्तर प्रतिशत लोग राष्ट्रीय ऊर्जा उत्पादन में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के पक्ष में हैं। इस बदलाव को हवा देने के लिए दक्षिणपंथी पॉडकास्ट और पत्रिकाओं के साथ समझौते किए जा रहे हैं। पूर्व में एलन मस्क से जुड़ी रहीं केटी मिलर जैसी हस्तियां भी सोशल मीडिया पर यह तर्क रख रही हैं कि यूटिलिटी स्तर की सत्तर प्रतिशत से ज्यादा नई सौर क्षमता उन्हीं राज्यों में लगी है जहां ट्रंप को चुनावी जीत मिली थी, इसलिए बिजली उत्पादन किसी दल विशेष का नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है।
चीन के साथ तकनीकी होड़ और देसी विनिर्माण की वकालत
ऊर्जा बहस का केंद्र अब पर्यावरण से हटकर चीन के साथ प्रतिस्पर्धा पर टिक गया है। पिछले वर्ष चीन ने अपने ग्रिड में 315 गीगावाट सौर ऊर्जा जोड़ी, जो अमेरिका द्वारा सभी स्रोतों से तैयार की गई कुल बिजली का लगभग छह गुना है। इसी भारी उत्पादन के बल पर चीन अपने विशाल डेटा केंद्रों को निर्बाध बिजली दे पा रहा है। अमेरिका के भीतर डेटा केंद्रों की बढ़ती भूख को पूरा करने के लिए अब 'अमेरिका फर्स्ट' के नजरिए से सौर ऊर्जा की वकालत की जा रही है।
अमेरिकी सौर निर्माता कंपनी 'टी1 एनर्जी' ने व्हाइट हाउस और सांसदों के बीच अपनी पैरवी मजबूत करने के लिए डॉनल्ड ट्रंप जूनियर के पुराने संपर्कों वाली लॉबिंग फर्म 'चेकमेट गवर्नमेंट रिलेशंस' और पूर्व सीआईए अधिकारी रिक डे ला टोरे की अगुवाई वाली 'टावर स्ट्रैटेजी' को नियुक्त किया है। इनका मुख्य तर्क यह है कि अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान का विरोध सौर ऊर्जा से नहीं, बल्कि चीनी प्रभुत्व से होना चाहिए। रणनीतिकार रिक डे ला टोरे ने सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया है कि डेटा केंद्रों के विस्तार के लिए केवल घरेलू सौर ऊर्जा ही अपेक्षित गति और पैमाने पर तैयार की जा सकती है। हाल के महीनों में विदेशी सौर पुर्जों पर पंद्रह प्रतिशत टैरिफ और न्यूनतम मूल्य सीमाएं तय की गई हैं, जिसे स्थानीय उद्योग अपनी जीत बता रहा है। इसके अलावा ग्रिड से जुड़ने की प्रक्रिया आसान बनाने वाले द्विदलीय अनुमति सुधार विधेयक पर भी संसद में चर्चा जारी है।
उद्योग के भीतर मतभेद और भविष्य की दिशा
आक्रामक विज्ञापनों की इस नई नीति को लेकर सौर उद्योग के सभी हितधारक पूरी तरह सहमत नहीं हैं। 'टी1 एनर्जी' के रणनीतिक संचार कार्यकारी उपाध्यक्ष रसेल गोल्ड जैसे दिग्गजों को डर है कि जब रिपब्लिकन सांसद सौर ऊर्जा की उपयोगिता को धीरे-धीरे स्वीकार करने लगे हैं, तब उनके खिलाफ कठोर अभियान चलाना उल्टा पड़ सकता है। उनका मानना है कि रिपब्लिकन नेताओं को ऊर्जा की प्रचुरता और सस्ती दरों के आधार पर साथ लाना ज्यादा समझदारी भरा कदम है और उन्हें सीधे निशाना बनाना एक ऐतिहासिक भूल साबित हो सकता है।
इस बीच 'इन्वेस्ट इन टुमारो कोएलिशन' का नेतृत्व 'क्लीन चॉइस एनर्जी' के मुख्य कार्यकारी टॉम मैट्ज़ी, 'अलाइड क्लाइमेट कैपिटल' के पीटर डेविडसन और 'सिएरा क्लब' के पूर्व प्रमुख माइकल ब्रून जैसे दिग्गज कर रहे हैं। लार्सन ने इस समूह को प्रारंभिक दौर में साठ लाख डॉलर से अधिक का भारी वित्तीय सहारा दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुराने जमाने की तरह जीवाश्म ईंधनों को पूरी तरह खारिज करने की जगह अब ऊर्जा के दोनों स्रोतों को समानांतर रूप से स्वीकार करने का व्यावहारिक संदेश रूढ़िवादी क्षेत्रों में दिया जा रहा है। चुनावी मैदान में सख्त प्रहार और नीतिगत स्तर पर व्यावहारिक तालमेल का यह नया मिश्रण आने वाले समय में अमेरिकी ऊर्जा परिदृश्य को गहराई से प्रभावित कर सकता है।



















