यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती 2025 का फाइनल रिजल्ट आते ही मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुशनगर कस्बे में एक परिवार की कहानी सुर्खियों में आ गई है। यहां के 25 वर्षीय श्याम मणि दीक्षित ने सब-इंस्पेक्टर पद पर सफलता पाई है, जबकि उनके पिता हमेशा से चाहते थे कि बेटा वर्दी नहीं बल्कि किताबें थामे और शिक्षक बने।
गांव के सरकारी स्कूल से यूनिवर्सिटी तक का सफर
श्याम मणि की शुरुआती पढ़ाई गुधौरा गांव के सरकारी स्कूल से हुई, जहां उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने लवकुशनगर के सरकारी स्कूल में दाखिला लिया और वहीं से 12वीं पास की। ग्रेजुएशन के लिए उन्होंने छतरपुर के महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का रुख किया। घर में पिता खुद शिक्षक थे, इसलिए शुरू से मन में भी शिक्षक बनने का ही सपना था। इसी सोच के साथ उन्होंने लवकुशनगर से बीएड की डिग्री भी हासिल कर ली।
भाई की राह देखकर बदला मन, चुना नया रास्ता
बीएड पूरा करने के बाद श्याम मणि बड़े भाई के साथ दिल्ली चले गए और वहीं रहकर आगे की तैयारी में जुट गए। लेकिन तभी उनके बड़े भाई शिक्षक बन गए और शादी के बाद घर में भाभी भी शिक्षिका के रूप में आ गईं। श्याम मणि बताते हैं कि परिवार में पहले से ही शिक्षक भरे होने के बाद उन्हें लगा कि अब कुछ अलग आजमाना चाहिए, इसी वजह से उन्होंने पुलिस लाइन में जाने का फैसला किया। हालांकि, वह यह भी बताते हैं कि उनकी असली प्राथमिकता पुलिस की वर्दी नहीं बल्कि कोई भी सरकारी नौकरी हासिल करना था।
चोट से चूका मौका, रनिंग में हुए बाहर, फिर मिली मंज़िल
पुलिस लाइन में जाने का फैसला करने के बाद श्याम मणि ने सबसे पहले एमपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा दी। उन्होंने इसकी लिखित परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन चोटिल होने के चलते फिजिकल परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा दी, जिसकी लिखित परीक्षा में भी वह सफल रहे, लेकिन इस बार रनिंग की दौड़ में पिछड़ गए और बाहर हो गए। दो बार मौका हाथ से फिसलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती में उनका चयन हो गया।
पिता बोले, वर्दी पसंद नहीं फिर भी बेटे पर पूरा भरोसा
पेशे से शिक्षक श्याम मणि के पिता रामनारायण दीक्षित बताते हैं कि उन्होंने अपनी पूरी नौकरी सादगी और ईमानदारी से की है, इसलिए वह चाहते थे कि बेटा भी उसी रास्ते पर चलते हुए शिक्षक बने। बेटे के सब-इंस्पेक्टर बनने पर उन्हें खुशी तो है, लेकिन वह मानते हैं कि पुलिस की नौकरी उन्हें पसंद नहीं है। उनका कहना है कि वह बेटे की नौकरी के विरोध में बिल्कुल नहीं हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि जिस परवरिश के साथ बेटे को बड़ा किया है, वह इस पद पर पूरी ईमानदारी से काम करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि बेटा आगे और पढ़ाई करके भविष्य में कुछ और भी बन सकता है।
रामनारायण दीक्षित यह भी बताते हैं कि श्याम मणि कभी वकालत की पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने इसकी इजाजत नहीं दी। उनका कहना है, "वकालत की कमाई झूठ और बेईमानी की होती है, यह मुझे पसंद नहीं था।" इसी वजह से उन्होंने बेटे को लॉ की पढ़ाई करने से रोक दिया और हमेशा चाहा कि वह शिक्षक ही बने।
दादा को हनुमान जी की कृपा पर भरोसा
श्याम मणि के दादा राम अवतार दीक्षित इस सफलता से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि परिवार में इससे पहले कभी कोई पुलिस की नौकरी में नहीं रहा, ऐसे में नाती का सब-इंस्पेक्टर बनना पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है। वह इसका श्रेय गुधौरा गांव के हनुमान जी को देते हुए कहते हैं, "ये सब गुधौरा वाले हनुमान जी की कृपा है।"


















