लखीमपुर खीरी के ग्रामीण अंचलों में दीपावली के अवसर पर एक खास व्यंजन तैयार करने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। इस विशेष दिन पर घरों में जिमीकंद यानी सूरन की सब्जी बनाना बेहद शुभ और पारंपरिक माना जाता है। त्योहार के इस उल्लास भरे माहौल में जब चारों ओर साफ-सफाई, दीपों की सजावट और पूजा-पाठ की तैयारियां चलती हैं, तब रसोई घरों में इस पारंपरिक सब्जी की महक भी घुल जाती है। आधुनिक समय में खानपान के तौर-तरीके काफी बदल चुके हैं और बाजार में अनगिनत नए व्यंजन आ चुके हैं, लेकिन गांवों में आज भी लोग अपनी पुरानी संस्कृति और स्वाद से मजबूती से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि दीपावली के खास मौके पर जिमीकंद की यह पारंपरिक सब्जी हर घर की थाली में एक अलग ही स्थान रखती है।
जिमीकंद की सब्जी बनाने के दो प्रमुख तरीके
इस पारंपरिक व्यंजन को घरों में मुख्य रूप से दो अलग-अलग तरीकों से पकाया जाता है, और दोनों ही विधियों का स्वाद अपने आप में बहुत लजीज होता है। अनुपम बताती हैं कि पहली विधि में जिमीकंद को पकाने से पहले अच्छी तरह उबाला जाता है, और फिर इसे छोटे टुकड़ों में काटकर मसालों के साथ तैयार किया जाता है। वहीं दूसरी विधि के अंतर्गत सूरन को बिना उबाले ही छोटे टुकड़ों में काटकर सीधे मसालों के साथ पकाया जाता है। हर परिवार अपनी पारिवारिक परंपरा और पसंद के अनुसार इनमें से किसी एक तरीके को चुनता है, और दोनों ही तरीकों से बेहद स्वादिष्ट सब्जी बनकर तैयार होती है।
कम सामग्री में तैयार होने वाली लाजवाब रेसिपी
इस सूरन की सब्जी की एक सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसी भी तरह के महंगे या बाजार के विशेष सामान की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यह व्यंजन पूरी तरह से रसोई में पहले से मौजूद बुनियादी मसालों और सामग्रियों की मदद से ही आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके मुख्य घटकों में जिमीकंद के अलावा तेल, जीरा, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च, नमक, अदरक और हरी मिर्च शामिल हैं। कई घरों में लोग अपने व्यक्तिगत स्वाद को और अधिक बढ़ाने के लिए इसमें टमाटर या अन्य पसंदीदा चीजें भी मिलाते हैं, जिससे इसका जायका और अधिक बढ़ जाता है।
घर पर सूरन की सब्जी बनाने की आसान विधि
इस पारंपरिक रेसिपी को बनाने की प्रक्रिया बहुत ही सरल और सीधी होती है। सबसे पहले एक कड़ाही में तेल गरम किया जाता है, जिसके बाद उसमें जीरा चटकाया जाता है। इसके पश्चात बारीक कटी हुई हरी मिर्च और अदरक डालकर उन्हें हल्का भूरा होने तक भुना जाता है। अब इसमें हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। मसालों के अच्छी तरह भुन जाने के बाद इसमें जिमीकंद के टुकड़े डाल दिए जाते हैं, ताकि सभी टुकड़ों पर मसालों की एक बेहतरीन परत चढ़ जाए। इसके बाद आवश्यकतानुसार थोड़ा सा पानी डालकर इसे धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ दिया जाता है और बीच-बीच में इसे चलाना पड़ता है ताकि यह कड़ाही के तले से न चिपके। जब जिमीकंद पूरी तरह नरम हो जाए और मसाले उसमें अच्छी तरह रम जाएं, तब गैस बंद कर दी जाती है।



















