अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन पर भारी दबाव बना हुआ है, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह फिर से 160.0 के स्तर की ओर फिसल सकता है। बैंक ऑफ जापान द्वारा कथित तौर पर ब्याज दर की जांच किए जाने के बाद विनिमय दर में कुछ समय के लिए तेजी आई और अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन की जोड़ी 157.0 से नीचे चली गई। हालांकि, व्यापक वित्तीय स्थितियों और नीतिगत अंतर के कारण जापानी मुद्रा की यह मजबूती ज्यादा देर नहीं टिक पाई। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि टोक्यो के नीति निर्माता किसी निश्चित विनिमय स्तर को बचाने के बजाय विनिमय दर में होने वाले बदलाव की रफ्तार पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
आईएनजी के फ्रांसेस्को पेसोले ने उल्लेख किया कि शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा की गई दर जांच ने विनिमय दर को अस्थायी तौर पर 157.0 से नीचे धकेल दिया था। यदि इस कदम की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह स्पष्ट संकेत देता है कि जापानी अधिकारी एक निश्चित विनिमय दर का बचाव करने के बजाय एक तय समय अवधि के दौरान होने वाले तीव्र उतार-चढ़ाव की गति पर अधिक केंद्रित हैं। इसके बावजूद, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख और बैंक ऑफ जापान की चाल के बीच का फासला अमेरिकी डॉलर को मजबूत स्थिति में बनाए हुए है, जिससे बाजार में हस्तक्षेप के भारी जोखिम के बावजूद डॉलर-येन जोड़ी के 160.0 तक पहुंचने की पूरी गुंजाइश दिख रही है।
केंद्रीय बैंकों के रुख में अंतर और मुद्रा हस्तक्षेप की आशंकाएं
जापान के अधिकारियों की तरफ से विदेशी मुद्रा बाजार में सीधे हस्तक्षेप का जोखिम स्पष्ट रूप से बना हुआ है, लेकिन मौजूदा आर्थिक पृष्ठभूमि डॉलर की मजबूती का समर्थन करती नजर आ रही है। बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में सामान्यीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया था। यह निर्णय व्यापक रूप से बाजार की पूर्व अपेक्षाओं के अनुरूप था और नीति सामान्यीकरण का एक अहम चरण माना गया। हालांकि, जब तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी नहीं आती, तब तक इस तरह की दरों में बढ़ोतरी भी जापानी येन को डॉलर के मुकाबले लंबी राहत दिलाने में नाकाम साबित हो रही है।
एशियाई कारोबारी सत्र में जापानी बाजार अवकाश के कारण व्यापारी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। यूक्रेन और रूस के बीच बढ़ते तनाव के साथ-साथ पश्चिम एशिया के संकट जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने भी निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करने पर मजबूर किया है। शुक्रवार को हुई दर जांच के बाद येन में आई हल्की मजबूती के कारण डॉलर-येन विनिमय दर सोमवार को एशिया में फिर से 157.00 के नीचे आ गई, लेकिन सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की निरंतर मांग ने गिरावट के दायरे को काफी सीमित कर दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और चीनी मौद्रिक फैसलों का असर
अन्य प्रमुख मुद्राओं की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) जोड़ी सोमवार के एशियाई सत्र में 0.7100 के स्तर से ऊपर स्थिर बनी रही। अमेरिकी डॉलर में जुलाई के अंत के बाद से बने उच्चतम स्तर से हल्का सुधार देखने को मिला, लेकिन अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण यह गिरावट ठहर गई। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट में कोई बदलाव न करने और यथास्थिति बनाए रखने से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर थोड़ा दबाव देखा गया।
चीन के केंद्रीय बैंक के इस फैसले के बावजूद, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को घरेलू समर्थन प्राप्त हो रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने की प्रबल उम्मीदें बाजार में इस जोड़ी को सहारा दे रही हैं। इसके अलावा, ट्रंप और शी के बीच आगामी शिखर सम्मेलन से पहले मुद्रा व्यापारी अतिरिक्त जोखिम लेने से बच रहे हैं, जिससे विनिमय दरों में स्थिरता की स्थिति बनी हुई है।
सोने में सुस्ती और सरकारी बॉन्ड बाजार में हलचल
कमोडिटी बाजार में सोने (XAU/USD) की शुरुआत इस सप्ताह कमजोरी के साथ हुई। पिछले दो कारोबारी दिनों से जारी बढ़त का सिलसिला टूट गया क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में और ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं तथा मजबूत अमेरिकी डॉलर ने पीली धातु की कीमतों को सीमित कर दिया। निवेशकों का रुझान गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के बजाय डॉलर आधारित उपकरणों में बढ़ा है।
तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में वैश्विक वित्तीय बाजार एक असामान्य दौर से गुजर रहे हैं। एक तरफ व्यापक अनिश्चितता और भारी उतार-चढ़ाव ने समूचे बाजार को जकड़ रखा है, तो दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुख बना हुआ है। इसके उलट, यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ खुलने की तैयारी में दिखे। वित्तीय तनाव सबसे ज्यादा संप्रभु बॉन्ड बाजार में केंद्रित नजर आया, जहां शुक्रवार को यूरोपीय और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेज उछाल देखने को मिला था। इन जटिल वित्तीय परिस्थितियों में मुद्रा विनिमय दरों का संतुलन लगातार बदल रहा है।



















