रोजमर्रा के भोजन में हरी सब्जियों को शामिल करना अक्सर बच्चों की नापसंदगी के कारण एक चुनौती बन जाता है, खासकर जब बात हरी पत्तेदार पालक की हो। अधिकतर घरों में पालक का उपयोग पनीर के साथ ही सबसे अधिक देखा जाता है। यदि आप भी नियमित पालक पनीर के जायके से कुछ नया तलाश रहे हैं, तो राजस्थान के पारंपरिक खानपान की धरोहर बेसन पालक की तरकारी एक नायाब विकल्प साबित हो सकती है। सीमित तेल और सामान्य घरेलू मसालों के संतुलन से बनने वाली यह सब्जी ढाबा जैसी सोंधी महक और गाढ़ी बनावट देती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत भुनी मूंगफली और चना दाल का दरदरा चूर्ण है, जो सामान्य बेसन की जगह ग्रेवी में एक दानेदार उभार लाता है।
सब्जी के लिए जरूरी सामग्री और मात्रा
इस मारवाड़ी शैली की तरकारी को पकाने से पूर्व सभी सामग्रियों का सही अनुपात एकत्र कर लेना चाहिए। इसके मुख्य आधार के रूप में 1 गड्डी एकदम ताजा हरी पालक की पत्तियां लें, जिन्हें अच्छी तरह धोकर महीन काट लें। खाना पकाने के माध्यम के तौर पर 4 से 5 बड़े चम्मच तेल और गाढ़ापन संतुलित करने हेतु लगभग 1/4 कप पानी की आवश्यकता होती है।
सब्जी को महक और तीखापन देने वाले छौंक के लिए निम्नलिखित सामग्री अलग रखें
- 1 चम्मच साबुत जीरा और 1/4 चम्मच हींग
- 1 इंच अदरक का टुकड़ा, बारीक कटा हुआ
- 8 से 9 लहसुन की कलियां, कटी हुई
- 2 बारीक कटी हरी मिर्चें
- 1 बड़ा प्याज, महीन टुकड़ों में कटा हुआ
- 2 मध्यम आकार के रसीले टमाटर, बारीक कटे हुए
मसालों का नाप और खास दरदरा मिश्रण
स्वाद को संतुलित करने के लिए स्वादानुसार साधारण नमक, 1/4 चम्मच हल्दी, 1/2 चम्मच पिसा धनिया, रंगत के लिए 1 चम्मच देगी लाल मिर्च, 1/2 चम्मच भुना जीरा पाउडर तथा 1/4 चम्मच पिसा गरम मसाला निकाल लें। इस व्यंजन की मुख्य जान इसका विशेष सूखा चूर्ण है। इसके लिए 6 चम्मच भुनी हुई मूंगफली के दाने और 6 चम्मच भुनी चना दाल की दरकार होती है। दोनों को एक साथ मिक्सी में हल्का दरदरा पीसकर रख लें। यदि किसी कारणवश भुनी चना दाल और मूंगफली उपलब्ध न हों, तो कड़ाही में 4 से 5 चम्मच सादा बेसन डालकर मंद आंच पर तब तक सूखा भूनें जब तक वह बादामी न हो जाए और सोंधापन न छोड़ने लगे।
तड़का लगाने और प्याज भूनने की विधि
पकाने की शुरुआत के लिए भारी तले की कड़ाही में तेल गरम करें। तेल के पर्याप्त गर्म होते ही जीरा और हींग डालें। जैसे ही जीरे के दाने तड़कने लगें, तुरंत कटी हरी मिर्च, अदरक और लहसुन डालकर कुछ पलों तक चलाएं। इसके उपरांत बारीक कटे प्याज को कड़ाही में डालें और मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक पकाएं जब तक उनका रंग सुनहरा भूरा न हो जाए। प्याज का यह सुनहरापन ही ग्रेवी को गहरा स्वाद प्रदान करता है।
टमाटर, सूखे मसाले और पालक पकाने का तरीका
प्याज के अच्छे से भुनने के बाद कड़ाही में कटे टमाटर और सूखे पिसे मसाले (हल्दी, धनिया, देगी मिर्च, नमक) शामिल करें। मिश्रण को मध्यम आंच पर तब तक भूनते रहें जब तक मसालों से चिकनाई या तेल किनारे न छोड़ने लगे। इस स्थिति में महीन कटी पालक को कड़ाही में डालें। यहां आंच को तेज रखें और कलछी से लगातार चलाते हुए केवल 2 से 3 मिनट ही पकाएं। तेज आंच पर अल्पकाल पकाने से पत्तों का प्राकृतिक हरा रंग सुरक्षित रहता है और पत्ते मसालों को तुरंत सोख लेते हैं।
गाढ़ापन लाना और सही परोसने का ढंग
पालक के थोड़ा नरम होते ही उसमें तैयार किया गया मूंगफली और चना दाल का दरदरा चूर्ण छिड़कें। साथ ही जीरा पाउडर और गरम मसाला डालकर अच्छी तरह उलट-पुलट कर मिला लें। इसके बाद 1/4 कप पानी डालें और कड़ाही को ढक्कन से बंद कर दें। आंच धीमी करके तरकारी को लगभग 4 से 5 मिनट तक भाप में पकने दें। विशेष ध्यान रखें कि पालक को जरूरत से अधिक देर तक न खौलाएं, क्योंकि अतिरिक्त आंच से पत्तों का आकर्षक हरापन खत्म होकर काला पड़ने लगता है और स्वाद भी बिगड़ जाता है। निर्धारित समय में पकने के बाद कड़ाही उतार लें और इस गरमागरम मारवाड़ी बेसन पालक को देसी घी लगी गेहूं की रोटियों अथवा कुरकुरे पराठों के साथ भोजन की थाली में सजाएं।



















